11 साल पुरानी लड़ाई में उपभोक्ता की जीत, टाटा मोटर्स को लौटानी होगी पूरी कीमत
VINAY VERMA | Jul 24, 2026, 15:10 IST
टाटा मोटर्स - रायपुर कंज्यूमर कोर्ट का फ़ैसला
खरीद के तीन महीने भीतर ही टाटा इंडिगो कार में बार-बार खराबी आने पर 11 साल चली कानूनी लड़ाई में उपभोक्ता प्रमोद कुमार गौतम की जीत हुई। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने टाटा मोटर्स और डीलर को पूरी कीमत ब्याज सहित लौटाने व मुआवजा देने का आदेश दिया।
RAIPUR : नई कार खरीदी, लेकिन राहत की जगह परेशानी मिली। बार-बार गैराज के चक्कर, लगातार तकनीकी खराबियां और आखिर में 11 साल लंबी कानूनी लड़ाई। अब छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने साफ कहा है कि दोषपूर्ण वाहन बेचकर कंपनी और डीलर दोनों बच नहीं सकते। आयोग ने टाटा मोटर्स और उसके डीलर नेशनल गैरेज को वाहन की पूरी कीमत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही मुआवजा और अन्य खर्च भी देने होंगे।
शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार गौतम ने 2014 को टाटा इंडिगो eCS LSTDI खरीदी थी। लेकिन खरीद के महज तीन महीने के भीतर और करीब पांच हजार किलोमीटर चलने के बाद ही कार चार बार सर्विस सेंटर पहुंच गई। शिकायत थी कि ईंधन गेज ठीक से काम नहीं करता, वाहन एक तरफ खिंचता है और ठंड में इंजन स्टार्ट होने में दिक्कत आती है।
लगातार शिकायतों के बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई तो मामला उपभोक्ता आयोग पहुंच गया। सुनवाई के दौरान डीलर ने दावा किया कि वारंटी के तहत सभी शिकायतें दूर कर दी गई थीं। वहीं टाटा मोटर्स ने इसे निर्माण दोष मानने से इनकार करते हुए कहा कि दिक्कत सामान्य घिसावट और रखरखाव से जुड़ी थी। लेकिन आयोग ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
राज्य उपभोक्ता आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चोरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा शामिल थे, ने माना कि वाहन में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट था। आयोग ने यह भी कहा कि सर्विस सेंटर बार-बार मरम्मत के बावजूद वाहन को ठीक करने में विफल रहा। यही सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का स्पष्ट मामला है।
![11 साल पुरानी लड़ाई में उपभोक्ता की जीत]()
आयोग ने जिला आयोग के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि अब वाहन वापस लेने की शर्त व्यावहारिक नहीं है। क्योंकि वह कबाड़ जैसी स्थिति में पहुंच चुका है। इसलिए कंपनी और डीलर को संयुक्त रूप से 4 लाख 77 हजार 865 रुपए की पूरी खरीद राशि 2015 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटानी होगी। इसके अलावा जिला आयोग द्वारा तय 2 लाख रुपए वित्तीय क्षति, 10 हजार रुपए मानसिक पीड़ा और वाद व्यय की राशि भी देनी होगी।
यह फैसला सिर्फ एक उपभोक्ता की जीत नहीं, बल्कि वाहन कंपनियों के लिए भी कड़ा संदेश है। आयोग ने साफ कर दिया कि यदि वाहन में निर्माण दोष है और ग्राहक को बार-बार गैराज के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तो निर्माता और डीलर दोनों जिम्मेदार होंगे। यानी वारंटी के नाम पर मामला टालने से कंपनियां अब आसानी से नहीं बच पाएंगी।
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तीन महीने में खुल गई पोल
लगातार शिकायतों के बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई तो मामला उपभोक्ता आयोग पहुंच गया। सुनवाई के दौरान डीलर ने दावा किया कि वारंटी के तहत सभी शिकायतें दूर कर दी गई थीं। वहीं टाटा मोटर्स ने इसे निर्माण दोष मानने से इनकार करते हुए कहा कि दिक्कत सामान्य घिसावट और रखरखाव से जुड़ी थी। लेकिन आयोग ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने मानी बड़ी खामी
11 साल पुरानी लड़ाई में उपभोक्ता की जीत
पूरी कीमत लौटाने का आदेश
कंपनियों के लिए बड़ा संदेश
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