योग दिवस पर सियासत की कपालभाति, गुस्सा हुए बीजेपी के ईश्वर ने छोड़ा मंच
Arun Tiwari | Jun 21, 2026, 21:06 IST
योग दिवस पर भड़के BJP विधायक ईश्वर साहू
साजा में योग दिवस कार्यक्रम के दौरान बीजेपी विधायक ईश्वर साहू मंच से नाराज होकर चले गए। उनका आरोप था कि पोस्टर और मंच पर उनका नाम नहीं था, जिससे प्रोटोकॉल की अनदेखी हुई। इस घटना के बाद प्रशासन और बीजेपी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
समझें क्या है पूरा मामला
विधायक के इस कदम से कार्यक्रम स्थल पर अचानक राजनीतिक माहौल गरमा गया और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। कार्यक्रम स्थल से बाहर आने के बाद ईश्वर साहू ने बिना किसी व्यक्ति विशेष का नाम लिए कहा कि सरकारी आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने इसे ओछी राजनीति बताते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत हैं।
पोस्टर में नहीं था विधायक का नाम
कार्यक्रम से जुड़े पोस्टरों और प्रचार सामग्री में भी उनका नाम या तस्वीर नहीं थी। इसी बात से नाराज होकर विधायक ईश्वर साहू कार्यक्रम के दौरान ही मंच से उठकर बाहर निकल गए। उनके मंच छोड़ने के बाद कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और आयोजकों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक मामला राजनीतिक रंग ले चुका था।
क्या बोले विधायक
विधायक के कार्यक्रम छोड़ने की खबर फैलते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों में नाराजगी बढ़ गई। कई कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि बीजेपी के जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है और प्रशासन इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
रमन सिंह कर चुके हैं नाराजगी जाहिर
इसके बावजूद प्रशासनिक कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में बढ़ते टकराव की झलक भी प्रस्तुत करती है। बीजेपी इसे जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
FAQ
- यह विवाद किस वजह से हुआ?
योग दिवस कार्यक्रम में विधायक ईश्वर साहू का नाम पोस्टर और मंच पर नहीं होने से विवाद हुआ। इससे वे नाराज होकर मंच छोड़कर चले गए। - विधायक ने क्या आरोप लगाया?
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की जा रही है और यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। इसे उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया। - इस घटना का क्या असर पड़ा?
घटना के बाद प्रशासन और बीजेपी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी और मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया।
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