87%-13% फार्मूला, कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद अब दिव्यांगों के प्रमोशन में उलझी सरकार

Sanjay Sharma | Nov 19, 2025, 20:44 IST
Share
87-13-formula-employee
87-13-formula-employee

मध्य प्रदेश सरकार आरक्षण के कई मुद्दों में उलझी है। पहले ओबीसी आरक्षण का 87%-13% फार्मूला विवादित था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अब पदोन्नति में आरक्षण और दिव्यांगों के आरक्षण की मांग ने चुनौती खड़ी की है।

BHOPAL. मध्यप्रदेश सरकार हर ओर से आरक्षण के चक्रव्यूह में उलझी नजर आ रही है। पहले विभागीय भर्तियों में ओबीसी आरक्षण का 87-13% फार्मूला सरकार के लिए समस्या बन गया था। जिसे सुलझाने के लिए सरकार को अब सुप्रीम कोर्ट तक दौड़भाग करनी पड़ रही है।

पहले विभागीय भर्तियों में ओबीसी आरक्षण का विवाद सुलझा नहीं था। अब पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा सामने आ गया है। दिव्यांगों की पदोन्नति में आरक्षण की मांग ने नई उलझन खड़ी कर दी है। सरकार एक मसला सुलझा नहीं पाती कि दूसरा सामने आ जाता है।

ये भी पढ़ें...मेडिकल पीजी में सिर्फ मध्य प्रदेश के अभ्यर्थियों को मिल रहा मौका, 50% से अधिक आरक्षण असंवैधानिक: HC

अब दिव्यांग मांग रहे प्रमोशन में आरक्षण

प्रदेश में पहले ही प्रमोशन में आरक्षण पर कर्मचारी संगठनों के विरोध के चलते मामला कोर्ट की सुनवाई में फंसकर रह गया है। पदोन्नति में आरक्षण के लिए बनाई नई नीति हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में सरकार की मुसीबत बनी हुई है।

इस बीच अब दिव्यांग कर्मचारियों ने भी पदोन्नति में आरक्षण का राग आलापना शुरू कर दिया है। दिव्यांग कर्मचारी कल्याण संघ का पत्र आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा। इसमें उनकी अनुशंसा भी शामिल है। दिव्यांग कर्मचारियों ने अपनी मांग के समर्थन में कोर्ट के आदेश और संवैधानिक प्रावधान भी आयुक्त को सौंपे हैं।

68c4d886-0f1
68c4d886-0f1


ये भी पढ़ें...MP Weather Report : प्रदेश में सर्दी का सितम, राजगढ़ में पारा 6.5 डिग्री, भोपाल-इंदौर में गिरावट

सरकार के सामने दिव्यांग बने चुनौती

मध्य प्रदेश में दिव्यांगजनों की मांग ने सरकार के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि, दिव्यांग कर्मचारियों के संगठन जो मांग कर रहा है उसके आधार को कोर्ट के निर्णय और दस्तावेज मजबूत कर रहे हैं। दिव्यांग कर्मचारियों का कहना है प्रदेश में अब तक उनके साथ पक्षपात होता रहा है।

दिव्यांग अधिनियम 1995 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में स्पष्ट प्रावधान है कि उनके लिए आरक्षित पदों पर अन्य को नियुक्ति से लेकर पदोन्नति तक कोई लाभ नहीं दिया जा सकता लेकिन अब तक सरकार ही इसकी अनदेखी करती रही है। जबकि अन्य राज्यों में दिव्यांगों को पदोन्नति भी उनके लिए तय आरक्षण के आधार पर दी जा रही है। दिव्यांग कर्मचारियों को इन अधिनियमों के बावजूद केवल नियुक्ति तक ही लाभ मिल पाया है।

ये भी पढ़ें...कैबिनेट का फैसला : प्रवासी राजस्थानियों के लिए नया विभाग, युवाओं के लिए आएगी नई पॉलिसी

दूसरे राज्यों में मिल रहा आरक्षण

प्रदेश में दूसरे कर्मचारी संगठन पदोन्नति में आरक्षण की मांग कर रहे हैं। मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है तो दिव्यांग कर्मचारियों ने भी अपने हक की मांग तेज कर दी है। उधर छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश सहित देश के कुछ राज्य पहले ही दिव्यांगों को प्रमोशन में आरक्षण दे रहे हैं। कोर्ट के पुराने निर्णयों और संवैधानिक प्रावधानों की प्रतियां सामाजिक न्याय और निशक्तजन संचालनालय को दी गईं। इसे लेकर मांग से अवगत कराया गया है।

आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने दिव्यांगजनों की मांग को सरकार तक पहुंचाया। दस्तावेजों के साथ पत्र को अनुशंसा सहित भेजा गया है। अब सरकार इस पर निर्णय लेगी। यह मामला कोर्ट तक पहुंचेगा या नहीं, यह समय बताएगा।

eb5a2b04-225
eb5a2b04-225


ये भी पढ़ें...केंद्रीय मंत्री शिवराज ने धमतरी में किया 2,225 करोड़ की परियोजना का शुभारंभ; किसानों के खातों में पहुंचे 500 करोड़

न्यायालयीन आदेशों का दिया हवाला

दिव्यांग कर्मचारियों ने अपनी मांग के लिए न्यायालयीन फैसलों का सहारा लिया। निशक्तजन संचालनालय आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला दिया गया। मांग पत्र में 2016 का राजीव कुमार गुप्ता मामला भी जोड़ा गया। इसमें न्यायमूर्ति चेलमेश्वर की बेंच का फैसला शामिल है।

निर्णय में कहा गया कि दिव्यांग आरक्षण पदोन्नति पर लागू होगा। सिद्धाराजू विरुद्ध कर्नाटक राज्य मामले में न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ. नारीमन ने आरक्षण की वैधता की पुष्टि की। 2021 में न्यायमूर्ति नागेश्वर राव, बीआर गवई और संजीव खन्ना की पीठ ने भी सुनवाई की। इस दौरान दिव्यांग आरक्षण पर बहस की गई। यह आरक्षण राज्य सिविल सेवा से आईएएस कैडर तक लागू किया गया। समूह क के उच्च पदों को दिव्यांगजनों के लिए सुरक्षित करने पर भी बहस हुई।

मध्य प्रदेश में स्थिति...

  1. एमपी के 48 विभागों में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पद: 37,328
  2. कुल आरक्षित पदों में से 21,939 पदों पर नियुक्ति नहीं हुई
  3. कई विभागों में 9,431 पदों पर भर्ती का विज्ञापन तक जारी नहीं हुआ
  4. एमपी में दिव्यांगों की संख्या 15,51,931(2011 की गणना के अनुसार)
Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • मध्यप्रदेश सरकार
  • ओबीसी आरक्षण
  • पदोन्नति में आरक्षण
  • प्रमोशन में आरक्षण
  • 87-13%
  • दिव्यांग आरक्षण
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई