जबलपुर के ओम चौकसे की कहानी हर किसी को सुननी चाहिए
thesootr Desk | Jul 21, 2026, 18:37 IST
jabalpur success story om
जबलपुर से एक दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है। फुटपाथ पर बैग बेचकर परिवार चलाने वाले के बेटे ओम चौकसे ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में सफलता हासिल की है। आर्थिक परेशानियों और संघर्षों के बावजूद ओम ने अपने सपने को पूरा किया।
देश में NEET (National Eligibility cum Entrance Test) रिजल्ट को लेकर जहां गड़बड़ियों की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां फुटपाथ पर बैग बेचने वाले के बेटे ओम चौकसे ने कठिन परिस्थितियों के बीच NEET परीक्षा पास कर परिवार का नाम रोशन किया है।
मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले ओम चौकसे ने आर्थिक परेशानियों और संघर्षों के बावजूद देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET पास कर ली है।ओम ने सीमित संसाधनों के बीच मेहनत और लगन से यह सफलता हासिल की। उनके पिता मॉडल हाई सेकेंडरी स्कूल के बाहर फुटपाथ पर स्कूल बैग बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
वहीं, ओम ने अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल से पूरी की। स्कूल जाने से पहले वह पिता की दुकान लगाने में मदद करते थे और शाम को दुकान समेटने में भी उनका हाथ बंटाते थे। इसके बाद समय निकालकर पढ़ाई करते थे। ओम ने मेहनत, अनुशासन और हौसले के दम पर NEET जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की।
ओम बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार रहे हैं। उन्होंने घर और पढ़ाई दोनों की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से संभाला। ओम ने MP बोर्ड की 10वीं परीक्षा में प्रदेश में सातवां स्थान हासिल किया था। वहीं, 12वीं बोर्ड परीक्षा में भी उन्होंने टॉप 10 छात्रों में अपनी जगह बनाई थी।
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आर्थिक तंगी के बीच पास की परीक्षा
वहीं, ओम ने अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल से पूरी की। स्कूल जाने से पहले वह पिता की दुकान लगाने में मदद करते थे और शाम को दुकान समेटने में भी उनका हाथ बंटाते थे। इसके बाद समय निकालकर पढ़ाई करते थे। ओम ने मेहनत, अनुशासन और हौसले के दम पर NEET जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की।
MP बोर्ड में हासिल किया सातवां स्थान
एक दर्द ने दी डॉक्टर बनने की वजह
- हर व्यक्ति की जिंदगी में कोई न कोई ऐसी घटना होती है, जो उसे अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देती है। ओम चौकसे के जीवन में भी एक ऐसी ही घटना हुई, जिसने उन्हें डॉक्टर बनने का लक्ष्य दिया।
- कुछ साल पहले ओम की दादी का हार्ट अटैक से निधन हो गया था। परिवार इस दुख से उबर भी नहीं पाया था कि ओम ने डॉक्टर बनने का फैसला कर लिया।
- ओम का सपना था कि वह ऐसा डॉक्टर बनें, जो मरीजों को बेहतर इलाज दे सके। वह चाहते हैं कि किसी परिवार को इलाज की कमी की वजह से अपने किसी करीबी को न खोना पड़े।
- यही सपना ओम की सबसे बड़ी ताकत बन गया।
- NEET की तैयारी आसान नहीं थी। लाखों छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा थी। इसके अलावा NEET पेपर लीक विवाद के बाद दोबारा परीक्षा की स्थिति बनी, लेकिन ओम ने अपना धैर्य नहीं खोया।
- री-NEET के घोषित नतीजों में ओम ने 720 में से 521 अंक हासिल कर पहली बार में ही परीक्षा पास कर ली। इससे पहले उनके 625 अंक आए थे, लेकिन पेपर लीक के बाद बदली परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।
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