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News in short
- AVFO भर्ती में हाईकोर्ट के पुराने आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका।
- नोटिस के बावजूद अधिकारी कोर्ट में नहीं हुए पेश।
- वकालतनामा दाखिल न होने पर कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी।
- दोनों अधिकारियों पर 5-5 हजार का जमानती वारंट जारी।
- अगली सुनवाई में वारंट के जरिए उपस्थिति सुनिश्चित करने के आदेश।
News in Details
समूह-5 भर्ती परीक्षा 2024 के अंतर्गत AVFO भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट के नोटिस के बावजूद हाजिर न होने पर प्रिंसिपल सेक्रेटरी IAS उमाकांत उमराव और पशुपालन विभाग के डायरेक्टर डॉ. पीएस पटेल के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया। कोर्ट की टिप्पणी ने प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़ा किया।
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कोर्ट के आदेश की अवहेलना बनी विवाद की जड़
यह पूरा मामला समूह-5 भर्ती परीक्षा 2024 के तहत सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पदों की भर्ती से जुड़ा है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पशुपालन विभाग ने उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। उन्होंने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ।
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हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश: डिग्री नहीं
इंदौर हाईकोर्ट ने याचिका क्रमांक WP-19468-2019 में स्पष्ट आदेश दिया था। आदेश में था कि AVFO पद के लिए केवल पशुपालन विज्ञान में डिप्लोमा धारक अभ्यर्थी ही पात्र होंगे। कोर्ट ने उच्च योग्यता यानी डिग्री धारकों को इस पद के लिए अयोग्य घोषित किया था, ताकि नियमों का सख्ती से पालन हो।
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120 से अधिक पद खाली, अभ्यर्थियों में रोष
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने डिग्री धारकों को चयन प्रक्रिया से बाहर तो कर दिया। लेकिन इसके परिणामस्वरूप 120 से अधिक स्वीकृत पद रिक्त रह गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग ने रिक्त पदों के लिए न तो संशोधित परिणाम जारी किया और न ही विस्तृत प्रतीक्षा सूची बनाई।
समान परसेंटाइल पर भी भेदभाव का आरोप
अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समान परसेंटाइल प्राप्त करने वाले कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई। कुछ अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में डाला गया, जबकि कुछ को पूरी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। यह नियमों और मेरिट दोनों के खिलाफ है।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें
अभ्यर्थियों ने विभाग को पत्र लिखकर मांग की थी कि 120+ रिक्त पदों को भरने के लिए तत्काल संशोधित परिणाम जारी किया जाए। नियम पुस्तिका के अनुसार न्यूनतम अंक (अनारक्षित 50%, आरक्षित 40%) प्राप्त करने वाले सभी डिप्लोमा धारकों को प्रतीक्षा सूची में शामिल किया जाए। सभी पद केवल डिप्लोमा धारकों से मेरिट के आधार पर भरे जाएं। इसके बाद भी जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तो वह हाईकोर्ट पहुंचे।
अवमानना याचिका और कोर्ट की सख्ती
कोर्ट के आदेशों के पालन न होने पर मनोज नागले सहित सात अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता योगेंद्र सिंह बघेल कर रहे हैं। इससे पहले 11 सितंबर 2025 को जस्टिस प्रणय वर्मा ने दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी किया था।
इतने व्यस्त हैं तो छुट्टी दे देते हैं
सोमवार 2 फरवरी को हुई सुनवाई में न तो प्रिंसिपल सेक्रेटरी और न ही डायरेक्टर कोर्ट में उपस्थित हुए। डायरेक्टर की ओर से पेश अधिवक्ता ने वकालतनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा। इस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि वकालतनामा जमा करने के लिए समय नहीं दिया जा सकता। क्या ये अधिकारी इतने व्यस्त हैं कि कोर्ट में हाजिर भी नहीं हो सकते?
5-5 हजार रुपए का जमानती वारंट
कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी उमाकांत उमराव और डायरेक्टर डॉ. पीएस पटेल के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया। प्रत्येक के खिलाफ 5-5 हजार का वारंट जारी किया गया। अगली सुनवाई में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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