हाईकोर्ट ने हटाया, शासन ने नीरज आनंद लिखारे को संयुक्त संचालक के साथ सिटी प्लानर की दी जिम्मेदारी

हाईकोर्ट के आदेश के बाद इंदौर सिटी प्लानर पद से हटाए गए नीरज लिखारे। शासन ने अब भोपाल में संयुक्त संचालक और सिटी प्लानर का दोहरा प्रभार दिया।

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Ravi Awasthi
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The government gave the responsibility of city planner along with joint director to Neeraj Anand Likhare

Photograph: (the sootr)

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NEWS IN SHORT

  • 21 मई 2025 को हाईकोर्ट ने इंदौर सिटी प्लानर पद से हटाने के आदेश दिए थे।
  • मामला जाति प्रमाण-पत्र की वैधता पर उठे सवालों से जुड़ा है।
  • शासन ने कोर्ट को बताया था कि जांच हाई-पॉवर कमेटी कर रही है।
  • हालिया आदेश में लिखारे को संयुक्त संचालक बनाया गया।
  • भोपाल नगर निगम में सिटी प्लानर का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया।

INTRO

हाईकोर्ट ने 21 मई को नीरज लिखारे को इंदौर सिटी प्लानर पद से हटाने के निर्देश दिए थे। नौ माह बाद पालन हुआ। अब उन्हें संयुक्त संचालक बनाकर भोपाल में सिटी प्लानर का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया। नीरज के अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र की जांच जारी है।

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. गए साल 21 मई को हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण-पत्र जांच को लेकर नीरज आनंद लिखारे को इंदौर नगर निगम के सिटी प्लानर पद से हटाने के निर्देश दिए थे। करीब नौ महीने बाद आदेश का पालन तो हुआ, लेकिन इस बीच शासन ने उन्हें पदोन्नति देते हुए ग्राम एवं नगर निवेश विभाग में संयुक्त संचालक बना दिया। साथ ही भोपाल नगर निगम में सिटी प्लानर का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया।

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सिटी प्लानर संग संयुक्त संचालक का भी पद

सोमवार को जारी पदस्थापना आदेश के मुताबिक, नीरज आनंद लिखारे को ग्राम एवं नगर निवेश विभाग में संयुक्त संचालक बनाया गया है। साथ ही उन्हें भोपाल नगर निगम में सिटी प्लानर का अतिरिक्त दायित्व भी दिया गया है।

हाईकोर्ट का आदेश किस संदर्भ में था

हाईकोर्ट जबलपुर ने गत 21 मई को नीरज को इंदौर नगर निगम सिटी प्लानर पद से हटाने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने यह फैसला अशोका गार्डन,भोपाल निवासी सतीश नायक (अब स्वर्गीय) की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। दरअसल,याचिका में उनके जाति प्रमाण-पत्र की वैधता पर सवाल उठाए गए थे।

जाति प्रमाण पत्र की जांच जारी

याचिका में यह भी उल्लेख था कि नीरज के बड़े भाई का जाति प्रमाण-पत्र फर्जी पाए जाने पर उन्हें सरकारी नौकरी गंवानी पड़ी। ऐसे में नीरज का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र भी संदेह के दायरे में है। इसी प्रकरण में शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नीरज लिखारे के जाति प्रमाण-पत्र की जांच हाई-पॉवर कमेटी को सौंपी गई है।

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एक पद से हटाकर सौंपा दोहरा दायित्व 

सूत्रों के अनुसार, नीरज के जाति प्रमाण-पत्र की जांच अभी भी जारी है। ऐसे में उन्हें महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व दिए जाने को लेकर विभागीय हलकों में चर्चा है। इस संबंध में विभाग के जिम्मेदार ​अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

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