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INDORE. मध्यप्रदेश में इन दिनों ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) खासी सक्रिय है। मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर लगातार केस दर्ज हो रहे हैं। साथ ही संपत्तियां अटैच की जा रही हैं। हाल ही में कई चालान भी ईडी ने स्पेशल कोर्ट में पेश किए हैं। वहीं, अब ईडी इंदौर और भोपाल की मांग पर एमपी सरकार ने एक विशेष मंजूरी जारी कर दी है। इससे आरोपियों की आर्थिक कमर टूट जाएगी।
ईडी की थी खास मांग, मोहन सरकार ने मानी
ईडी ने हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार के पंजीयन विभाग से विशेष मंजूरी मांगी थी। इसमें मांग की गई थी कि उन्हें पंजीयन विभाग के ई-संपदा सॉफ्टवेयर का लॉगइन और पासवर्ड दिया जाए। साथ ही यह अधिकार भी दिए जाएं कि वे किसी की भी संपत्तियों को यहां से सर्च कर सकें। इससे ईडी इन संपत्तियों की जानकारी जुटाकर तेजी से उन्हें अटैच कर सकेगी। इस पर विचार करने के बाद आखिरकार पंजीयन विभाग ने इसकी मंजूरी ईडी को दे दी है।
ईडी अब स्पेशल टीम से कराएगी जांच
यह अधिकार मिलने के बाद ईडी की अटैचमेंट पावर बढ़ जाएगी। अभी ईडी को पंजीयन विभाग को पत्र लिखकर आरोपियों की संपत्तियों का विवरण मांगना पड़ता था। इसमें लंबा समय लगता था। कई बार आरोपी केस की जानकारी लगने पर इन संपत्तियों को दूसरों को बेचकर ठिकाने लगा देते थे।
ईडी अब अपने दफ्तर में एक स्पेशल टीम बनाएगा। यह टीम ई-संपदा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करेगी। इस सॉफ्टवेयर से पूरी मध्यप्रदेश में आरोपियों की संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा सकेगी। इसके बाद, उन संपत्तियों को तुरंत अटैच करने की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना तय है।
मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में होती है संपत्ति अटैच
ईडी केस दर्ज होने के बाद जितनी राशि की आर्थिक अनियमितता (मनी लॉन्ड्रिंग) की गई है, उतनी लागत की संपत्तियों को तलाश कर अटैच करती है। ईडी के प्रारंभिक अटैचमेंट के बाद मामला ईडी न्यायाधिकरण में जाता है। फिर इस अटैचमेंट पर अंतिम मुहर लगती है। एक बार संपत्ति अटैच हो जाने के बाद इसका छूटना बहुत मुश्किल होता है, जब तक कि आरोपी बाइज्जत बरी न हो जाए।
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