सरकारी धान परिवहन में 2.79 करोड़ की धोखाधड़ी, EOW ने दर्ज की FIR

बालाघाट में शासकीय धान की अवैध हेराफेरी का मामला सामने आया। इसमें 2.79 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई। इस मामले में मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों और राइस मिल संचालकों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

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Sandeep Kumar
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balaghat illegal rice scam

News in Short

  • बालाघाट में 2.79 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
  • मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों पर FIR दर्ज की गई।
  • राइस मिल संचालकों ने सरकारी धान का अवैध परिवहन किया।
  • आरोपियों ने गलत दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन हड़पने की कोशिश की।
  • जांच में पाया गया कि अनुबंध में अनियमितताएं और दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई।

News in Detail

बालाघाट में एक बड़े आर्थिक अपराध का खुलासा हुआ है। EOW ने सरकारी धान की हेराफेरी और धोखाधड़ी के आरोप में मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों समेत राइस मिल संचालकों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह मामला 2.79 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का है।

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शिकायतकर्ता का आरोप

शिकायतकर्ता मिलिंद ठाकरे ने आरोप लगाया कि मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने मिलकर धोखाधड़ी की। उन्होंने सरकारी धान की कस्टम मिलिंग के नाम पर करोड़ों रुपए हड़पने का आरोप लगाया। जांच शुरू की गई। 2 अप्रैल 2024 को सचदेव राईस मिल के ट्रकों को अवैध रूप से महाराष्ट्र ले जाते हुए पकड़ा गया।

इन ट्रकों के ओवरलोड होने पर परिवहन विभाग ने 12 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। जांच में यह भी सामने आया कि सचदेव राईस मिल ने ट्रकों पर सरकारी धान लोड किया था। मिल मालिक ने झूठा दावा किया कि ट्रक गलती से महाराष्ट्र सीमा तक पहुंचे।

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सरकारी धान का अवैध परिवहन

पुलिस ने एफआईआर में आठ प्रमुख आरोपियों का नाम लिया है। इनमें मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी शामिल हैं। आरोपियों ने सरकारी धान का अवैध परिवहन किया और गलत दस्तावेज तैयार किए। राइस मिल संचालकों ने धोखाधड़ी करके सरकारी धन हड़पने की कोशिश की।

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अन्य दोषियों की जांच

यह मामले केवल ट्रकों के अवैध परिवहन तक सीमित नहीं थे। मिल संचालकों ने मिल की क्षमता को ज्यादा दिखाकर अनुबंध किया। इससे वे अधिक लॉट धान प्राप्त कर सके। इसके अलावा, बिजली खपत कम दिखाने और दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई थी।

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इन लोगों को बनाया गया हैं आरोपी

  • अभिषेक निषाद, तत्कालीन उप प्रबंधक (वित्त), मार्कफेड बालाघाट
  • हिरेन्द्र सिंह रघुवंशी, तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी, मार्कफेड बालाघाट
  • विवेक तिवारी, वर्तमान जिला विपणन अधिकारी, मार्कफेड बालाघाट
  • हरीश कोरी, उप प्रबंधक (वित्त), मार्कफेड बालाघाट
  • पीयूष माली, तत्कालीन जिला प्रबंधक, म.प्र. स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन, बालाघाट
  • दुर्गेश बैस, लेखापाल (वित्त), मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन, बालाघाट
  • प्रकाश सचदेव, प्रोप्राइटर, सचदेव राईस मिल, कोसमी
  • समीर सचदेव, संचालक, सचदेव राईस मिल, कोसमी

जांच में यह पाया गया कि राइस मिल संचालकों ने शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया। उन्होंने 36 लॉट धान के अनुबंध में अनियमितता की। सभी दस्तावेज छुपाए और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना भुगतान लिया।

मार्कफेड के अधिकारियों की भूमिका

मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। इन्होंने मिल की क्षमता का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया। बिना निरीक्षण के ही अनुबंध की स्वीकृति दी। भुगतान की स्वीकृति भी बिना सत्यापन के दी गई, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ।

मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम मार्कफेड EOW बालाघाट
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