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आजादी के 78 साल हो गए, लेकिन फिर भी कई कुरीतियां समाज में बनी हुई हैं। हाल ही में बालाघाट जिले के लांजी में एक पिता ने अपनी विधवा बेटी की दूसरी शादी करवाई, लेकिन समाज ने इसका विरोध करते हुए पूरे परिवार का बहिष्कार कर दिया। साथ ही 25 हजार रुपए जुर्माना और 10 साल का सामाजिक प्रतिबंध भी लगा दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
लांजी के मंडई टेकरी में रहने वाले मानक सोनवाने की बेटी की शादी करीब चार साल पहले हुई थी। अफसोस की बात है कि शादी के ढाई महीने बाद ही उनके दामाद की मौत हो गई। 22 साल की उनकी बेटी की जिंदगी महज ढाई महीने में ही उजड़ गई। दहेज के साथ वह फिर से मायके लौट आई। तीन साल तक वो मायके में ही रही।
मानक सोनवाने को अपनी बेटी का दर्द देखा न गया और उन्होंने खुशी-खुशी अपनी बेटी की दूसरी शादी करवाई। ये शादी गैर-बिरादरी में थी। यह बात समाज के ठेकेदारों को बिल्कुल पसंद नहीं आई। उन्होंने गुपचुप तरीके से मीटिंग करके परिवार से सारे रिश्ते-नाते तोड़ने का फरमान जारी कर दिया। फिर तो अपनी जाति के लोगों ने भी उनके परिवार से बात करना बंद कर दिया।
भागकर शादी करने की सलाह
मानिक सोनवाने ने बताया कि शादी से पहले समाज के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को इस बारे में बताया था। तब उन्होंने उनकी बेटी को भागकर शादी करने की सलाह दी और 25 हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा। लेकिन उनके परिवार ने भागने की बजाय खुले तौर पर शादी करने का फैसला लिया। इसके बाद से समाज के लोगों ने उनसे अनौपचारिक रूप से रिश्ता तोड़ लिया। अब वह प्रशासन से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।
10 साल समाज से बाहर, 25 हजार का जुर्माना
यह भी आरोप है कि समाज के ठेकेदारों ने न सिर्फ इन्हें समाज से 10 साल के लिए बाहर किया है, बल्कि 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगा दिया है। परिवार का कहना है कि वे पैसे क्यों दें और किस बात के पैसे दें, क्या कोई गुनाह किया है उन्होंने? उन्होंने तो अपनी बेटी की टूट चुकी जिंदगी को फिर से सुधारा है। लड़का अच्छा है और बिरादरी अलग है तो उनके पेट में क्यों दर्द हो रहा है? बेची की मां का कहना है कि जब तीन साल तक उनकी बेटी घर में अकेली थी तब तो कोई मदद करने नहीं आया।
छोटी बहू के आरोप...
मानिक सोनवाने की छोटी और मंझली बहु ने आरोप लगाया है कि जब किसी समाज के लोग दूसरी जाति की लड़की लाते हैं तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। जब दूसरी जाति में लड़की विदा होती है, तो सबको ऐतरा होता है। इसके अलावा, उस लड़की को मायके जाने की भी इजाजत नहीं दी जाती। सात ही धमकी दी जाती है कि यदि लड़की मायके आई तो कोई भी समाज का आदमी खाना नहीं खाएगा।
कलेक्टर कार्यालय में न्याय की मांग
पीड़ित परिवार ने कलेक्टर कार्यालय जाकर जनसुनवाई में न्याय की मांग की है। अब इस मामले को एसडीएम लांजी को सौंपा गया है, और जांच की जाएगी। जो भी परिवार इस तरह के बहिष्कार करेंगे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
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