भागीरथपुरा में मौत महामारी से मानी, लेकिन मुआवजा नहीं, जबलपुर सड़क हादसे में 10-10 लाख दिए

इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों पर मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया है। यह चौंकाने वाली बात है। बड़े हादसों में सरकार तत्काल मुआवजा घोषित करती है, लेकिन इंदौर भागीरथपुरा कांड में अभी तक एक रुपए का मुआवजा नहीं दिया गया है।

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Sanjay Gupta
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News In Short

  • भागीरथपुरा में दूषित पानी से अभी तक 23 मौत हो चुकी है और 447 अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं।

  • इस मामले में शासन खुद हाईकोर्ट में एपिडेमिक से 15 मौतों को मान चुका है।

  • प्रशासन द्वारा 21 मृतकों के परिजन को दो-दो लाख दिए गए, लेकिन वह मुआवजा नहीं, केवल राहत राशि है।

  • अस्पतालों के बिल के भुगतान का भी बोझ रेडक्रॉस पर ही आ रहा है। शासन स्तर पर राशि जारी नहीं हुई।

  • कांग्रेस पीड़ितों को अपनी ओर से डेढ़-डेढ़ लाख दे चुकी है।

News in Detail

INDORE. इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से अभी तक 23 मौत हो चुकी हैं। वहीं, इतने बड़े कांड के बाद भी किसी भी पीड़ित को कोई मुआवजा राशि नहीं दी गई है। प्रशासन के जरिए जो दो-दो लाख रुपए दिए गए हैं। वह रेडक्रॉस से दी गई राहत राशि मात्र है, ना कि मुआवजा।

खुद जिला कलेक्टर शिवम वर्मा कह चुके हैं कि पीड़ित क्षेत्र में हुई मौतों पर हम राहत राशि दे रहे हैं। हाईकोर्ट में भागीरथपुरा मामले में मंगलवार 20 जनवरी को सुनवाई है। इसमें सीएस अनुराग जैन फिर अपनी बात रखेंगे।

राजस्व बुक सर्कुलर में यह नियम

राजस्व बुक सर्कुलर (आरबीसी) के नियम 6(4) के तहत प्राकृतिक घटनाओं में मुआवजे का प्रावधान है। यह न्यूनतम 4 लाख रुपए है। यह भी तर्क रखा जा रहा है कि यह प्राकृतिक घटना नहीं है, इसलिए इसमें मुआवजे का प्रावधान इस धारा में नहीं किया जा सकता है।

इसमें दो बातें हैं: यदि इसे प्राकृतिक नहीं मानते तो फिर डेथ ऑडिट रिपोर्ट में एपिडेमिक से मौत क्यों माना गया है? एपिडेमिक यानी महामारी तो प्राकृतिक होती है।

यदि आप प्राकृतिक नहीं मान रहे तो सीधी बात है कि यह नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों की गलती से हुआ मानववध यानी गैर-इरादतन हत्या है। फिर इन पर अभी तक केस क्यों नहीं कराया गया है? वहीं, मुआवजा मुख्यमंत्री फंड से भी दिया जाता है।

जब चाइनीज मांझे में गैर-इरादतन हत्या केस

हाईकोर्ट की डबल बैंच ने हाल ही में इंदौर में चाइनीज मांझे पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा कि चाइनीज मांझे के उपयोग से जान जाने पर लापरवाही से जान लेने का केस दर्ज किया जाए। इसके लिए धारा 106(1) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इस संबंध में कलेक्टर ने भी आदेश दिए थे। फिर इतने बड़े भागीरथपुरा कांड में यह क्यों लागू नहीं होता है? इसका भी कोई जवाब नहीं है।

जबलपुर सड़क हादसे में 10-10 लाख रुपए

जबलपुर में सड़क दुघर्टना में सड़क निर्माण श्रमिकों की मौत हुई थी। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ट्विटर करते हुए मृतकों को चार-चार लाख रुपए देने की घोषणा की थी। साथ ही कार्य एजेंसी को आदेश दिए कि वह मृतक के परिजनों को 6-6 लाख रुपए दें। यानी कुल दस लाख।

फिर इंदौर में भागीरथपुरा में मृतक के परिजनों को शासन ने 4 लाख का मुआवजा क्यों नहीं दिया। इसमें नगर निगम को भी राहत राशि देने के आदेश क्यों नहीं दिए गए? ना ही खुद नगर निगम ने अपनी ओर से कोई राहत राशि दी है।

Sootr Knowledge

जानें क्या है इंदौर का भागीरथपुरा कांड?

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में दूषित पानी की वजह से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया। दरअसल, नर्मदा जल की पाइपलाइन में सीवेज और ड्रेनेज लाइन का पानी मिल गया था।

इससे फीकल कोलिफॉर्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया फैल गए। इसके अलावा, इलाके के बोरवेल का गंदा पानी नर्मदा की पाइपलाइन में घुसकर पीने के पानी को जहरीला बना रहा था।

इस वजह से उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां फैल गईं, और 3500 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए। इसे भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के मुख्य कारण के तौर पर बताया जा रहा है।

भागीरथपुरा में अभी तक 34631 घरों का सर्वे किया है। अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। एक 6 महीने का बच्चा भी इस संकट का शिकार हो गया। 447 लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इनमें से 400 अधिक को छुट्टी मिल गई है। अब तक (जनवरी 2026 तक ) भागीरथपुरा इलाके में नए मरीज निकल रहे हैं।

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