इंदौर भागीरथपुरा कांड में शहर की छवि से लेकर निगम, प्रशासन को डैमेज करने की साजिश की आशंका

Sanjay Gupta | Jan 09, 2026, 17:28 IST
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bhagirathpura indore
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भागीरथपुरा, इंदौर में दूषित पानी से 20 मौतें हुईं। नगर निगम और प्रशासन में किसी की साजिश की आशंका है। पानी में पोटेशियम क्लोराइड मिलाने की संभावना जताई जा रही है।

Indore. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कांड ने शहर की छवि को दागदार कर दिया है। इसमें अभी तक 20 मौतों की बात सामने आ चुकी है। हाईकोर्ट इंदौर में जनहित याचिकाएं दायर हो गई, जिसमें सीएस को जवाब देना है। वहीं जिला कोर्ट में अधिकारियों के खिलाफ परिवाद दायर हुआ है, लेकिन अंदरखाने से चौंकाने वाली खबर आ रही है।

नगर निगम में साजिश की बात

इस पूरे मामले में नगर निगम के अंदरखाने में किसी साजिश की आशंका से इंकार नहीं किया जा रहा है। यह मसला शहर की छवि खराब करने की साजिश है। निगम अधिकारियों और सरकार को घेरने का प्रयास किया जा रहा है।

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क्यों साजिश के रूप मे देखा जा रहा है, ये कारण

  • शहर में सीवेरज के लीकेज के कारण गंदे पानी की शिकायते नई नहीं है। लेकिन इसके चलते इतनी तादाद में लोगों के प्रभावित होने और मौत होने का मामला पहली बार सामने आया है।
  • गुजरात में भी इसी दौरान दूषित पानी की बात आई, लेकिन वहां केवल बीमार हुए और मौत जैसी बात नहीं हुई।
  • भोपाल में भी पानी की जांच हुई तो इसमें भी वही ई कोलाई बैक्टिरीया मिला। लेकिन इससे वहां बड़े स्तर पर बीमार नहीं हुए और ना ही मौत हुई।
  • उड़ीसा के एक नवोदय स्कूल में भी प्रदूषित पानी से संक्रमण फैला, लेकिन मौत नहीं हुई लेकिन इंदौर में दूषित पानी से 20 मौत।
  • वहीं इसी बैक्टिरिया के चलते दूषित पानी से 20 मौत हुई, 446 अस्पताल में भर्ती हुए। वहीं किसी ना किसी रूप में दो हजार से ज्यादा प्रभावित हुए। ऐसा किसी अन्य मामले में नहीं देखा गया है।
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निगम ने अंदरूनी स्तर पर की जांच

इस पूरे मामले में नगर निगम ने अंदरूनी स्तर पर जांच भी की। इसमें एक कर्मचारी शक के दायरे में था, जिसे बुलाकर सख्त पूछताछ की गई। साथ ही मौके पर जाकर और जल शाखा के कर्मचारियों व अन्य जगह पर पूछताछ की और जानकारी जुटाई गई। इसमें कई बाते संदेहास्पद आई।

इस दौरान सामने आया कि 23 दिसंबर को ही पानी में बदबू आ रही थी। इससे लीकेज की बात सामने आई। इस दौरान पानी में पोटेशियम क्लोराइड भी भारी मात्रा में मिलाने की बात सामने आई। यह भी पता चला कि इस दौरान पानी की सप्लाय रोकने की बात उठी, लेकिन क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने वाटर सप्लाय के लिए कहा, इसके बाद 25 दिसंबर को पानी दिया गया।

इसी पानी ने पूरे एरिया को गंभीर त्रासदी में ला दिया। हालांकि वाघेला ने द सूत्र से कहा कि पानी देना, रोकना, क्लोरीन मिलाना यह सब जल शाखा का काम है। इस संबंध में मैंने किसी से नहीं कहा। इसी दौरान 23 से 25 दिसंबर के बीच में पानी में कुछ मिलाने की बात निगम के अधिकारियों को पता चली। लेकिन इस मामले में ऑन रिकार्ड जांच इसलिए नहीं आगे बढ़ी क्योंकि मरीज सामने आने के बाद हंगामा मच गया और सभी लोग व्यवस्थाओं में लग गए।

निगम के अधिकारियों ने द सूत्र को अनौपचारिक रूप से जांच की बात कही। मामला संदिग्ध और साजिश की आशंका वाला है। हालांकि, संवेदनशीलता के कारण औपचारिक बयान नहीं दिया गया है।

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28 दिसंबर को रविवार के चलते पता नहीं चला

इसके बाद 26 दिसंबर से कुछ मरीज सामने आने लगे, उधर 28 दिसंबर को रविवार के चलते प्राथमिक केंद्र बंद थे। इसके चलते एरिया में फैली महामारी की जानकारी बड़े स्तर पर नहीं फैली, लेकिन 29 दिसंबर सोमवार को एक के बाद एक कई मरीज भर्ती होने लगे और हालत यह हो गई कि मंत्री कैलाश विजयवयर्गीय दिल्ली दौरा छोड़कर रात को इंदौर आ गए और सीधे अस्पताल गए। इसके बाद ही पूरे मामले की गंभीरता सामने आई।

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इससे इंदौर कितना हुआ डैमेज

इस पूरे मसले ने इंदौर को बुरी तरह डैमेज किया। शहर के साथ मप्र की छवि, सरकार की छवि धूमिल हुई। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय घिर गए, नगर निगम महापौर पुष्यमित्र भार्गव की छवि भी धूमिल हुई। निगमायुक्त आईएएस दिलीप यादव तीन माह में ही ट्रा्ंसफर हो गए। वहीं अपर आयुक्त आईएएस रोहित सिसोनिया सस्पेंड और ट्रांसफर हुए। इसके सात ही अन्य अधिकारी सस्पेंड हुए।

पूरे मामले की जांच जरूरी

इस पूरे मसले पर अंदरूनी स्तर पर फारेंसिंक जांच की बात की जा रही है। सीएम डॉ. मोहन यादव जांच कमेटी भी बना चुके हैं। उधर एसीएस संजय दुबे भी आकर जांच कर चुके हैं। लेकिन अभी इस एंगल पर जांच नहीं की गई है कि क्या बाहर से इस पानी में कुछ मिलाया गया है, जिससे इतने बड़े स्तर पर यह त्रासदी हुई। उधर एरिया के बोरिंग में भी बडे़ स्तर पर बैक्टिरीया पाए गए है। यह भी आया कि इन बोरिंग के कनेक्शन कई जगह नर्मदा मैन लाइन से जुड़े थे जिसने पूरे पानी को भी प्रदूषित किया। वहीं सीवरेज लाइन लीकेज तो थे ही। इस बैक्टीरिया से इतनी बड़ी मौतें और प्रभावित लोग नहीं हुए। गुजरात और उड़ीसा जैसी स्थिति नहीं आई।



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