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नवाबों के शहर भोपाल में अब टेक्नोलॉजी का जादू बिखरेगा! मध्यप्रदेश सरकार ने भौंरी में AI सिटी बनाने का फैसला लिया है।
यह प्रोजेक्ट करीब 3700 एकड़ में फैलेगा और भारत को दुनिया के डिजिटल नक्शे पर एक नई पहचान दिलाएगा। इस सिटी में शिक्षा, रिसर्च और बड़ी टेक कंपनियों का मिलाजुला होगा, जो इसे एक अनोखा हब बना देगा।
आज (5 फरवरी) इस AI सिटी को लेकर एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक भी होनी है। यह प्रोजेक्ट न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। तो, आइए जानते हैं इस AI सिटी की खास बातें!
37 सौ एकड़ में फैलेगा AI का साम्राज्य
ये एआई सिटी कोई छोटा-मोटा प्रोजेक्ट (एआई और डिजिटल मीडिया) नहीं है, बल्कि लगभग 37 सौ एकड़ जमीन पर इसे बसाया जाएगा। इसका विजन बड़ा है।
सरकार यहां एक ऐसा इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम (एआई का प्रभाव) बनाना चाहती है जहां पढ़ाई, रिसर्च और बिजनेस सब एक साथ हों। यहां बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां, वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटीज और नए जमाने के स्टार्टअप्स एक ही जगह पर मिलकर काम करेंगे।
ग्लोबल कंपनियों की लगी कतार
इस एआई सिटी को डेवलप करने में अबतक 20 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है। इन कंपनियों ने अपने Expressions of Interest (EOIs) जमा कर दिए हैं। अर्बन एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के सूत्रों की मानें तो इस महीने यानी फरवरी के अंत तक उस मेन एजेंसी का नाम फाइनल हो सकता है।
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IISER तैयार कर रहा जीत का फॉर्मूला
भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (iiser bhopal) को इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई है। IISER इसका रोडमैप और एक्शन प्लान तैयार करेंगे।
अर्बन एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने IISER को निर्देश दिए हैं कि वे एक ऐसा ब्लूप्रिंट बनाएं जो इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स पर खरा उतरे। आज (5 फरवरी) इसी नॉलेज और एआई सिटी को लेकर एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक भी आयोजित की गई है। इसमें प्रोजेक्ट की बारीकियों पर चर्चा हो रही है।
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रोजगार और रिसर्च का नया केंद्र
इस एआई सिटी का सबसे बड़ा फायदा यहां के युवाओं और प्रोफेशनल्स को मिलेगा। ये प्रोजेक्ट न केवल हजारों नए रोजगार पैदा करेगा, बल्कि हाई-लेवल रिसर्च के लिए नए दरवाजे भी खोलेगा।
सरकार का मकसद भारत को दुनिया के एआई मैप पर एक लीडर के रूप में स्थापित करना है। उम्मीद है कि डेवलपमेंट एजेंसी इस महीने के आखिर तक फाइनल कर दिया जाएगा। आने वाले कुछ सालों में भोपाल एक ऐसा नॉलेज हब बन जाएगा जहां से पूरी दुनिया को नई तकनीक सप्लाई होगी।
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