/sootr/media/media_files/2026/02/13/bhopal-bjp-district-executive-list-withdrawn-2026-02-13-07-34-17.jpg)
News In Short
भाजपा जिला कार्यकारिणी की सूची जारी होते ही विवाद खड़ा हो गया है।
विधायकों से रायशुमारी के बिना सूची जारी होने पर आपत्ति उठाई गई।
संगठन के नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति से महामंत्री होना अनिवार्य था।
जिला कार्यकारिणी की सूची को 15 मिनट बाद ही रद्द कर दिया गया है।
नई सूची जल्द या शिवरात्रि तक जारी होने की संभावना है।
News In Detail
भोपाल भाजपा जिला कार्यकारिणी की सूची जारी होने के 15 मिनट के भीतर ही रद्द करनी पड़ी। आरोप है कि सूची बिना विधायकों से रायशुमारी किए जारी कर दी गई थी।
इतना ही नहीं संगठन के बायलॉज के अनुसार एक महामंत्री अनुसूचित जाति वर्ग से बनाना अनिवार्य है लेकिन इस नियम का पालन नहीं किया गया। विवाद बढ़ने के बाद अब संकेत हैं कि नई सूची जल्द या अधिकतम शिवरात्रि तक जारी की जाएगी।
रायशुमारी से पहले जारी हुए नाम
सूत्रों के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम और मध्य विधानसभा क्षेत्र से करीब 8-8 नाम शामिल किए गए हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित विधायकों से पहले चर्चा नहीं हुई। विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा, कृष्णा गौर समेत अन्य जनप्रतिनिधियों को सूची की जानकारी जारी होने के बाद मिली थी। इसके बाद आपत्तियां सामने आईं।
15 मिनट में क्यों रोकनी पड़ी सूची?
सूची सार्वजनिक होते ही असंतोष खुलकर सामने आया। विधायकों ने संगठन को अवगत कराया कि बिना सलाह नाम तय करना उचित नहीं है। प्रदेश स्तर पर चर्चा के बाद करीब 15 मिनट में सूची होल्ड कर दी गई। इस त्वरित फैसले ने आंतरिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महामंत्री पद पर नियमों की अनदेखी का आरोप
संगठन के बायलॉज के अनुसार जिला कार्यकारिणी में एक महामंत्री अनुसूचित जाति वर्ग से होना अनिवार्य बताया जाता है।
भोपाल की जारी सूची में इस प्रावधान का पालन नहीं होने की बात सामने आई है। इसके अलावा एक ऐसे नाम को महामंत्री बनाए जाने पर भी चर्चा है जो पूर्व में बागी के रूप में चुनाव लड़ चुका है। इन दोनों बिंदुओं को लेकर संगठन के भीतर मंथन जारी है।
जिलाध्यक्ष ने क्या कहा
भोपाल जिलाध्यक्ष रविंद्र यति ने सूची रोके जाने को तकनीकी कारण बताया है। उन्होंने कहा कि उचित समय पर संशोधित सूची जारी की जाएगी। संकेत दिए गए हैं कि नई कार्यकारिणी शिवरात्रि तक घोषित की जा सकती है। हालांकि बड़े फेरबदल से फिलहाल इनकार किया गया है।
एक साल बाद भी सहमति की चुनौती
जिलाध्यक्षों के चयन के लगभग एक साल बाद कार्यकारिणी घोषित की गई थी। इतने समय बाद भी नामों पर सर्वसम्मति न बन पाना चर्चा का विषय है। प्रदेश के 62 जिलों में नई कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया चल रही है। एक दर्जन से अधिक जिलों में अब भी सहमति लंबित है। संतुलन साधने की कवायद पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में अन्य दलों से नेता भाजपा में शामिल हुए हैं।
पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाना संगठन के लिए चुनौती बना हुआ है। जिला स्तर पर यही संतुलन कई जगह देरी की वजह भी बन रहा है। भोपाल जिला कार्यकारिणी को लेकर उठे विवाद के बाद अब निगाहें अगली सूची पर हैं। देखना होगा कि संशोधित घोषणा से संगठनात्मक सहमति बनती है या बहस का नया दौर शुरू होता है।
ये खबरें भी पढ़िए...
भाजपा संगठन में घमासान: सांसद-मंत्री-विधायकों की खींचतान से एक साल बाद भी जिला कार्यकारिणी अधर में
मंत्री विश्वास सारंग का पलटवार : कांग्रेस ने लोकतंत्र को बदनाम करने की सुपारी ली है
एमपी न्यूज: भोपाल में शराब बनाम जनता टकराव: मानवाधिकार आयोग ने कलेक्टर को दी आखिरी चेतावनी
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us