भाजपा संगठन में घमासान: सांसद-मंत्री-विधायकों की खींचतान से एक साल बाद भी जिला कार्यकारिणी अधर में

मध्यप्रदेश भाजपा संगठन में गुटबाजी और प्रतिस्पर्धा है। जिला कार्यकारिणी का गठन एक साल बाद भी नहीं हुआ। ग्वालियर, भोपाल और सागर जैसे जिलों में असमंजस है।

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Ramanand Tiwari
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NEWS In short

  • मध्यप्रदेश भाजपा संगठन में एक साल बाद भी जिला कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। 
  • सांसद, मंत्री और विधायकों के विवाद ने संगठन को संकट में डाला। कार्यकर्ताओं का सब्र टूटता जा रहा है।
  • ग्वालियर, भोपाल और सागर में दिग्गज नेताओं की प्रतिस्पर्धा के कारण कार्यकारिणी का गठन अटका है। 
  • नेता अपने समर्थकों को पद दिलाने के लिए अड़े हैं। इस वजह से सहमति नहीं बन पा रही है।
  • भोपाल में सांसद, मंत्री और विधायक अपने समर्थकों को पद दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

News in Detail

मध्यप्रदेश भाजपा संगठन में अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। जिला अध्यक्षों के चुनाव को एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक जिला कार्यकारिणियों का गठन नहीं हो पाया। सांसद, मंत्री और विधायकों के आपसी विवाद ने संगठन को संकट में डाल दिया है। कार्यकर्ताओं का सब्र टूटता हुआ दिखाई दे रहा है।

संभागीय राजनीति बनी सबसे बड़ी रुकावट

ग्वालियर, भोपाल और सागर जैसे बड़े संभागीय मुख्यालयों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। सूत्रों के अनुसार, दिग्गज नेताओं की प्रतिस्पर्धा के कारण जिला कार्यकारिणी घोषित नहीं हो सकी। नेता अपने-अपने समर्थकों को पद दिलाने पर अड़े हैं। इस वजह से सहमति की कोई संभावना नहीं बन पा रही।

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एक अनार, सौ बीमार की हालत में सागर संभाग

सागर संभाग में हालात और ज्यादा पेचीदा हैं। यहां सिंधिया समर्थक गुट और भाजपा के दूसरे प्रभावशाली गुट आमने-सामने हैं। दोनों पक्ष जिला कार्यकारिणी में वर्चस्व कायम करना चाहते हैं। इस कारण संगठनात्मक संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है।

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भोपाल में भी वही कहानी

राजधानी भोपाल, जहां से पूरा प्रदेश संगठन संचालित होता है, वहां भी हालात अलग नहीं हैं। सांसद, मंत्री और विधायक अपने-अपने सागिर्दों को पद दिलाने के लिए खींचतान में लगे हैं। इस गुटबाजी के चलते पार्टी की सार्वजनिक तौर पर फजीहत हो रही है।

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एक साल पूरा, फिर भी टीम अधूरी

14 जनवरी को ग्वालियर के जिलाध्यक्ष के निर्वाचन को एक साल पूरा हो गया। लेकिन पार्टी अब तक अपनी जिला कार्यकारिणी घोषित नहीं कर सकी। यही स्थिति अन्य 13  जिलो में भी है। प्रदेश के 62 जिलों में से केवल 48 जिलों में कार्यकारिणी बनी है। 14 जिलों में प्रक्रिया अभी भी अधर में है।

ग्वालियर की सूची वायरल, संगठन में मची खलबली

इस असमंजस का सबसे बड़ा नतीजा यह हुआ कि ग्वालियर जिला कार्यकारिणी की कथित सूची वायरल हो गई। इससे पार्टी में जबरदस्त हड़कंप मच गया। जिन कार्यकर्ताओं के नाम सूची में नहीं हैं, वे अब खुला विरोध करने की तैयारी में हैं। यही स्थिति अन्य जिलों में भी बनती नजर आ रही है।

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चुनाव को साल भर, सहमति अब भी दूर

मध्यप्रदेश में भाजपा के ऐसे 14 जिले हैं, जहां अध्यक्ष चुने जाने के बाद भी उनकी टीम का गठन नहीं हो सका। ग्वालियर, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सागर और भोपाल जैसे जिले इस सूची में शामिल हैं।

कार्यक्रमों की आड़ में टल रहा संगठन विस्तार?

पार्टी सूत्रों के अनुसार, संगठन इस समय अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त है। इनमें एसआईआर, अटल बिहारी वाजपेयी शताब्दी और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शामिल हैं। संभागीय प्रभारी, जिला प्रभारी और पदाधिकारी कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। इस कारण जिला कार्यकारिणी का गठन पीछे छूट गया है।

प्रभारियों को सौंपा गया टास्क, लेकिन नतीजा शून्य

प्रदेश संगठन महामंत्री और अध्यक्ष ने प्रभारियों को निर्देश दिए। जिलाध्यक्षों की मौजूदगी में नामों पर सहमति बनाने को कहा। हालांकि, सीनियर नेताओं की पसंद-नापसंद के कारण कार्य पूरा नहीं हो पाया।

संगठन बनाम सत्ता: बढ़ता संकट

प्रदेश भाजपा में यह पहली बार हुआ है कि सभी जिलाध्यक्ष तो चुने जा चुके हैं, लेकिन उनकी टीम एक साल बाद भी अधूरी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह असर डालेगा। इसका प्रभाव चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक मजबूती पर पड़ेगा।

मध्यप्रदेश भोपाल भाजपा ग्वालियर एसआईआर
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