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BHOPAL. भोपाल की पॉश अरेरा कॉलोनी में चल रही कथित अवैध शराब दुकान पर अब मामला गरमा गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भोपाल कलेक्टर को फटकार लगाई।
आयोग ने चार सप्ताह में ठोस कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। यदि समय सीमा में निष्पक्ष कदम नहीं उठाए गए, तो दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। यह अब एक दुकान का मामला नहीं, बल्कि जनता बनाम सिस्टम की लड़ाई बन गया है। कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने 'द सूत्र' को बताया कि दुकानदार को दुकान खाली किए जाने का नोटिस चार दिन पूर्व दिया जा चुका है।
क्या है पूरा मामला?
अरेरा कॉलोनी के एक आवासीय प्लॉट पर शराब दुकान संचालित होने का आरोप है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि यह दुकान मंदिर और अस्पताल के बेहद करीब है, जो आबकारी नीति का खुला उल्लंघन है। शिकायतों के बाद NHRC ने जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर जांच के निर्देश दिए थे।
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आयोग क्यों हुआ सख्त?
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासनिक जांच रिपोर्ट में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। बताया गया कि मंदिर को मंदिर मानने से ही इंकार कर दिया गया। नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन की जानकारी छुपाई गई। स्थल पंचनामे में मंदिर और दुकान की दूरी का उल्लेख नहीं किया गया। आयोग को भ्रमित करने की कोशिश की गई। जब शिकायतकर्ताओं ने वस्तुस्थिति बताई, तब NHRC ने पुनः जांच शुरू की।
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औचक निरीक्षण में क्या मिला?
हाल ही में आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने मौके पर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मीडिया की मौजूदगी में कथित अवैध अहाते का संचालन पाया गया। आबकारी अधिकारियों से जवाब मांगा गया, लेकिन वे संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए। यहीं से आयोग की नाराजगी खुलकर सामने आई।
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सरकार का दावा बनाम जमीनी हकीकत
एक तरफ सरकार प्रदेश में शराब अहाते बंद करने का दावा करती है। दूसरी तरफ प्रशासन की नाक के नीचे आवासीय क्षेत्र में कथित अवैध अहाता चलने के आरोप सवाल खड़े कर रहे हैं। सवाल साफ है संरक्षण किसका है? स्थानीय लोगों की मुख्य आपत्तियां हैं कि दुकान आर्य समाज मंदिर से 50 मीटर से कम दूरी पर है।
यह अनुश्री चिल्ड्रन हॉस्पिटल के पास संचालित हो रही है। नशाखोरी सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ी है। महिलाओं की सुरक्षा पर खतरा महसूस हो रहा है। असामाजिक तत्वों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। लोगों का कहना है कि यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सामाजिक वातावरण पर हमला है।
आयोग के स्पष्ट निर्देश
NHRC ने अपने आदेश में कहा है कि केवल नगर निगम के टैक्स रिकॉर्ड के आधार पर दुकान को वैध नहीं माना जा सकता। कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि लीज शर्तों की जांच की जाए। मास्टर प्लान के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित किया जाए। भवन अनुमति की शर्तों की समीक्षा की जाए। उल्लंघन मिलने पर दुकान को बंद या स्थानांतरित किया जाए। अन्यथा आयोग सख्त कार्रवाई करेगा।
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जनता की चेतावनी, आंदोलन की तैयारी
रहवासी लवनीश भाटी का कहना है कि यह मामला मानवाधिकार, महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक आस्था से जुड़ा है। उन्होंने मांग की है कि दुकान को निर्धारित व्यावसायिक क्षेत्र जैसे नंबर 7 मार्केट या चार इमली मार्केट में शिफ्ट किया जाए। साथ ही, अवैध संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की गई है।
डेडलाइन तय, 20 मार्च 2026
मानवाधिकार आयोग ने 20 मार्च 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यदि कार्रवाई नहीं होती, तो इसे आयोग की अवमानना माना जाएगा। अब प्रशासन पर नजर है। NHRC की सख्त टिप्पणी से संकेत है कि अब ढिलाई नहीं होगी। जनता इंतजार में है। क्या सिस्टम कानून के अनुसार कार्रवाई करेगा? या रसूख और दबाव की राजनीति हावी रहेगी? भोपाल की यह लड़ाई अब प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन चुकी है।
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