एमपी में चल रहा चमड़ी-दमड़ी का खेल, सफेदा के नाम पर बिक रहा गौ मांस

भोपाल में पिछले कई सालों से चमड़ी-दमड़ी का खेल चल रहा है। इसमें गौ मांस को सफेदा के नाम पर बेचा जाता है। यह मामला नगर निगम से लेकर वन विहार तक फैल चुका है। अब इस मामले में कई बड़े खुलासे हो रहे हैं।

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Amresh Kushwaha
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News In Short

  • भोपाल में पिछले 25 साल से चमड़ी-दमड़ी का खेल चल रहा है, अब अन्य क्षेत्रों में फैल चुका है।

  • वन विहार में कच्चा मांस असलम कुरैशी के जरिए सप्लाई किया जाता है, जो गौ मांस का व्यापार करता है।

  • नगर निगम भोपाल के स्लॉटर हाउस में गाय काटने के मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं।

  • असलम के पास नगर निगम के डॉक्टरों के साइन किए हुए खाली कागज थे, जिनके आधार पर प्रतिबंधित मवेशी काटे जाते थे।

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले में हस्तक्षेप किया, आरोप लगाए कि असलम ने रोहिंग्या मुसलमानों को बसाया।

News In Detail

BHOPAL. मध्यप्रदेश की राजधानी में पिछले 25 साल से चमड़ी और दमड़ी का खेल चल रहा है। दैनिक अखबार प्रजातंत्र में छपी वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र पैगवार की खबर के मुताबिक, यह सिर्फ नगर निगम तक सीमित नहीं रहा। अब यह खेल अन्य क्षेत्रों में भी फैल चुका है। वन विहार में हिंसक जानवरों को कच्चा मांस दिया जाता है। इसकी सप्लाई असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़े के पास है। राजधानी में गया के मांस को सफेदा के नाम पर बेचा जाता है। यह गौ मांस सिर्फ शहर में ही नहीं, बाहर भी सप्लाई किया जा रहा है।

जांच रिपोर्ट ने मचा दिया हंगामा

दो दिन पहले आई एक जांच रिपोर्ट ने भोपाल और पूरे प्रदेश को हिला दिया है। नगर निगम भोपाल के स्लॉटर हाउस में गाय काटने का मामला सामने आया है। जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, नगर निगम और पशु चिकित्सालय में इस गिरोह का वर्चस्व है। यही कारण है कि स्लॉटर हाउस में आने वाले मवेशियों की जांच नहीं होती। असलम के पास नगर निगम के डॉक्टरों के साइन किए हुए खाली कागज थे। इन कागजों के आधार पर प्रतिबंधित मवेशी भी काटे जाते थे।

राजधानी में चल रहा गाय-भैंस के मांस का कारोबार

खबर के अनुसार, भोपाल में गौ मांस की भारी मांग है, जो लोकल, देश और विदेश से आती है। सागर जिले के राहतगढ़ से बीमार और आवारा गायों को भोपाल लाया जाता है। इसके अलावा, भैंस के छोटे पाड़े का मांस बकरे के गोश्त के नाम पर बेचा जाता है। भोपाल के कई होटल और वन विहार में बकरे के नाम पर भैंस का मांस सप्लाई होता है। इस पूरे मामले में नगर निगम, वन विहार और खाद्य विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।

नगर निगम की अनुमति और प्रशासन की चुप्पी

मार्च 2022 में नगर निगम ने जीरो वेस्ट स्लॉटर हाउस बनाने की अनुमति दी। उस समय के नगर निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी  और गुलशन बामरा ने इसे मंजूरी दी। महापौर मालती राय के नेतृत्व में, मौजूदा महापौर परिषद ने इसे पीपीपी मोड पर संचालित करने की अनुमति दी थी।

विश्राम घाट की जमीन पर असलम का कब्जा

स्लॉटर हाउस के पास स्थित विश्राम घाट ट्रस्ट कमेटी की जमीन पर असलम और उसके साथियों ने कब्जा कर लिया है। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष डॉ. दीपक मेहता के अनुसार, इस मामले में कई बार नगर निगम और जिला प्रशासन को शिकायत की गई है। हालांकि, अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यहां सेवा भारती का मातृ छाया प्रकल्प भी स्थित है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एंट्री

इस पूरे मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी हस्तक्षेप किया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर भोपाल पुलिस की रिपोर्ट पोस्ट की है। इसमें आयोग की शिकायत पर जांच की गई थी। हालांकि, जहांगीराबाद एसीपी ने असलम को क्लीन चिट दी। आयोग ने आरोप लगाया कि असलम ने स्लॉटर के मजदूरों के नाम पर बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से, खासकर रोहिंग्या मुसलमानों को भोपाल में बसाया है।

नगर निगम अध्यक्ष भी हुए सक्रियता

नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि उन्होंने भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन से इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है। जैन ने बताया कि फिलहाल पुलिस जांच कर रही है। साथ ही, नगर निगम का कोई कर्मचारी स्लॉटर हाउस में कार्यरत नहीं है। यह पूरा काम पीपीपी मोड पर एक कंपनी के जरिए संचालित हो रहा है।

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भोपाल पुलिस प्रियंक कानूनगो नगर निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी किशन सूर्यवंशी भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन
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