मध्यावधि 2026: भोपाल संभाग में मोहन सरकार से जनता कितनी खुश?
The Sootr | Jun 15, 2026, 15:30 IST
भोपाल संभाग
भोपाल संभाग: 13 जून 2026 को मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार का आधा सफर पूरा हो गया। ढाई साल बीत गए। अब उल्टी गिनती शुरू है। और ठीक इसी दौरान thesootr लेकर आया है मध्यप्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा और विश्वसनीय सर्वे…
मध्यप्रदेश की हर विधानसभा से डेटा लेकर तैयार किए गए इस सर्वे में जानिए... भोपाल संभाग के लोगों के मन की बात… और हां! ये सर्वे किसी तरह की घोषणा नहीं करता सिर्फ प्राप्त आंकड़ों से परसेप्शन बताता है।
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मध्यावधि 2026: भोपाल संभाग
भोपाल संभाग में 25 विधानसभा सीटें हैं। ये पांच जिलों में फैली हैं। इनमें भोपाल, राजगढ़, विदिशा, सीहोर और रायसेन शामिल हैं। यहां बीजेपी के पास 22 सीटें हैं। कांग्रेस के पास सिर्फ 3 सीटें हैं। ये भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य और सिलवानी हैं।
एक जनमत सर्वे में लोगों से तीन सवाल पूछे गए। पहला सवाल विधायक के काम को लेकर था। दूसरा सवाल सरकार के काम को लेकर था। तीसरा सवाल कांग्रेस की सक्रियता को लेकर था। तीनों आंकड़े 50 से 54 प्रतिशत के बीच हैं। यानी जनता का मूड बहुत बंटा हुआ नहीं है। फिर भी कुछ सीटों पर तस्वीर साफ अलग है।
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संभाग में विधायक से संतुष्ट लोगों की संख्या 54 प्रतिशत है। सबसे ज्यादा संतुष्टि उदयपुरा सीट पर मिली है। यहां विधायक नरेंद्र शिवाजी पटेल हैं, जो बीजेपी से हैं। उनकी संतुष्टि दर 64.6 प्रतिशत है।
दूसरे नंबर पर भोपाल उत्तर सीट है। यहां कांग्रेस के आतिफ आरिफ अकील विधायक हैं। उनकी संतुष्टि दर 61.3 प्रतिशत है। कांग्रेस के तीनों विधायक संभाग के औसत से ऊपर हैं। यानी जहां कांग्रेस का विधायक है, वहां लोग उससे संतुष्ट हैं।
सबसे कम संतुष्टि सिरोंज सीट पर दर्ज हुई। यहां बीजेपी के उमाकांत शर्मा विधायक हैं। उनकी संतुष्टि दर सिर्फ 44.1 प्रतिशत है। राजगढ़ सीट पर भी संतुष्टि सिर्फ 46 प्रतिशत है। सीहोर सीट पर भी यह आंकड़ा कम है।
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सरकार से संतुष्ट लोगों की संख्या 53.8 प्रतिशत है। यहां सरकार का मतलब डॉ. मोहन यादव की सरकार से है। सबसे ज्यादा भरोसा भोजपुर सीट पर दिखा। यहां बीजेपी के सुरेन्द्र पटवा विधायक हैं। सरकार संतुष्टि यहां 64.1 प्रतिशत है।
गोविंदपुरा सीट भी आगे है। यहां कृष्णा गौर विधायक हैं। सरकार संतुष्टि 61.5 प्रतिशत है। इन दोनों सीटों पर सरकार की छवि विधायक की छवि से बेहतर है।
चार सीटों पर सरकार संतुष्टि 50 प्रतिशत से कम है। ये हैं विदिशा, खिलचीपुर, सीहोर और नरेला। विदिशा में यह सिर्फ 44.6 प्रतिशत है, जो सबसे कम है। यहां विकास योजनाओं की जानकारी लोगों तक कम पहुंची है।
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सर्वे में पूछा गया कि कांग्रेस कितनी सक्रिय है। संभाग में 50.8 प्रतिशत लोगों ने कांग्रेस को सक्रिय बताया। यानी हर दूसरा वोटर कांग्रेस को मैदान में मानता है।
कांग्रेस सबसे सक्रिय भोपाल उत्तर सीट पर मानी गई। यहां 64.5 प्रतिशत लोगों ने ऐसा कहा। सारंगपुर और उदयपुरा में भी कांग्रेस सक्रिय मानी गई। ये दोनों सीटें बीजेपी के पास हैं। फिर भी यहां विपक्ष की मौजूदगी दिख रही है।
सबसे कम सक्रियता बासौदा सीट पर दिखी। यहां सिर्फ 36.6 प्रतिशत लोगों ने कांग्रेस को सक्रिय माना। सांची और नरेला में भी कांग्रेस की सक्रियता कम मानी गई। इन सीटों पर विपक्ष का जमीनी असर कमजोर लगता है।
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जिलों का रिपोर्ट कार्ड पांच जिलों में रायसेन सबसे आगे है। यहां विधायक संतुष्टि 56.6 प्रतिशत और सरकार संतुष्टि 56.1 प्रतिशत है। उदयपुरा और भोजपुर सीटें इसकी बड़ी वजह हैं।
भोपाल जिले का हाल भी ठीक है। यहां विधायक संतुष्टि 55.3 प्रतिशत है। सरकार संतुष्टि 54.6 प्रतिशत है। आठ में से ज्यादातर सीटें औसत से ऊपर हैं।
राजगढ़ जिले में मिला-जुला असर दिख रहा है। यहां विधायक संतुष्टि 52 प्रतिशत है, जो औसत से कम है। खिलचीपुर और राजगढ़ सीटें सबसे कमजोर मानी गई हैं।
विदिशा जिले की खास बात अलग है। यहां कांग्रेस की सक्रियता सिर्फ 45 प्रतिशत मानी गई है। यह संभाग में सबसे कम है। हालांकि विदिशा सीट पर सरकार संतुष्टि सबसे कम है।
सीहोर जिला सबसे कमजोर कड़ी निकला है। यह इकलौता जिला है जहां सरकार संतुष्टि 50 प्रतिशत से नीचे है। यहां यह सिर्फ 49.2 प्रतिशत है। विधायक संतुष्टि भी औसत से कम है।
सबसे मजबूत और कमजोर सीटें कुछ सीटों पर तीनों आंकड़े अच्छे हैं। इनमें उदयपुरा, बुधनी और सारंगपुर शामिल हैं। यहां लोग जागरूक भी हैं और संतुष्ट भी हैं। इन सीटों पर राजनीतिक चर्चा भी तेज रहती है।
कुछ सीटें सबसे ज्यादा ध्यान मांगती हैं। सीहोर और सिरोंज में संतुष्टि सबसे कम है। यहां विधायक और सरकार, दोनों को मेहनत करनी होगी। जनसंपर्क बढ़ाने की जरूरत साफ दिख रही है।
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सर्वे बताता है कि बढ़त व्यक्तिगत मेहनत पर टिकी है। जहां विधायक सक्रिय हैं, वहां संतुष्टि ऊंची है। जहां जनसंपर्क कमजोर है, वहां संतुष्टि घटकर 44 से 48 प्रतिशत तक आ जाती है।
विदिशा में कांग्रेस की कमजोर सक्रियता सत्ता पक्ष के लिए अच्छा संकेत है। लेकिन राजगढ़, सीहोर और भोपाल के शहरी इलाकों में कांग्रेस की सक्रियता ध्यान देने वाली बात है।
यह सर्वे सिर्फ धारणा बताता है। यह कोई चुनाव परिणाम की भविष्यवाणी नहीं है। फिर भी यह जमीनी हलचल का एक संकेत देता है।
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मोहन यादव सरकार | द सूत्र मध्यावधि 2026 | मोहन सरकार के ढाई साल | एमपी बीजेपी | एमपी कांग्रेस। सागर संभाग द सूत्र सर्वे। thesootr Survey
हमने पूछे सिर्फ तीन सवाल
- क्या आप अपने विधायक से संतुष्ट हैं?
- BJP और डॉ. मोहन यादव की सरकार से संतुष्ट हैं या नहीं?
- क्या कांग्रेस प्रदेश में active दिखती है?
तो पहली बार हर नागरिक जान सकेगा
- उसके अपने जिले का मूड क्या है
- उसके विधायक को जनता पास करती है या फेल
- मोहन यादव सरकार के बारे में उसके इलाके की राय क्या है
- कांग्रेस जनता को active दिखती है या नहीं
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मध्यावधि 2026: भोपाल संभाग thesootr Survey
सर्वे में क्या निकला
एक जनमत सर्वे में लोगों से तीन सवाल पूछे गए। पहला सवाल विधायक के काम को लेकर था। दूसरा सवाल सरकार के काम को लेकर था। तीसरा सवाल कांग्रेस की सक्रियता को लेकर था। तीनों आंकड़े 50 से 54 प्रतिशत के बीच हैं। यानी जनता का मूड बहुत बंटा हुआ नहीं है। फिर भी कुछ सीटों पर तस्वीर साफ अलग है।
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विधायक संतुष्टि का हाल
दूसरे नंबर पर भोपाल उत्तर सीट है। यहां कांग्रेस के आतिफ आरिफ अकील विधायक हैं। उनकी संतुष्टि दर 61.3 प्रतिशत है। कांग्रेस के तीनों विधायक संभाग के औसत से ऊपर हैं। यानी जहां कांग्रेस का विधायक है, वहां लोग उससे संतुष्ट हैं।
सबसे कम संतुष्टि सिरोंज सीट पर दर्ज हुई। यहां बीजेपी के उमाकांत शर्मा विधायक हैं। उनकी संतुष्टि दर सिर्फ 44.1 प्रतिशत है। राजगढ़ सीट पर भी संतुष्टि सिर्फ 46 प्रतिशत है। सीहोर सीट पर भी यह आंकड़ा कम है।
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सरकार पर भरोसे की तस्वीर
गोविंदपुरा सीट भी आगे है। यहां कृष्णा गौर विधायक हैं। सरकार संतुष्टि 61.5 प्रतिशत है। इन दोनों सीटों पर सरकार की छवि विधायक की छवि से बेहतर है।
चार सीटों पर सरकार संतुष्टि 50 प्रतिशत से कम है। ये हैं विदिशा, खिलचीपुर, सीहोर और नरेला। विदिशा में यह सिर्फ 44.6 प्रतिशत है, जो सबसे कम है। यहां विकास योजनाओं की जानकारी लोगों तक कम पहुंची है।
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कांग्रेस कितनी सक्रिय?
कांग्रेस सबसे सक्रिय भोपाल उत्तर सीट पर मानी गई। यहां 64.5 प्रतिशत लोगों ने ऐसा कहा। सारंगपुर और उदयपुरा में भी कांग्रेस सक्रिय मानी गई। ये दोनों सीटें बीजेपी के पास हैं। फिर भी यहां विपक्ष की मौजूदगी दिख रही है।
सबसे कम सक्रियता बासौदा सीट पर दिखी। यहां सिर्फ 36.6 प्रतिशत लोगों ने कांग्रेस को सक्रिय माना। सांची और नरेला में भी कांग्रेस की सक्रियता कम मानी गई। इन सीटों पर विपक्ष का जमीनी असर कमजोर लगता है।
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जिलों का रिपोर्ट कार्ड
भोपाल जिले का हाल भी ठीक है। यहां विधायक संतुष्टि 55.3 प्रतिशत है। सरकार संतुष्टि 54.6 प्रतिशत है। आठ में से ज्यादातर सीटें औसत से ऊपर हैं।
राजगढ़ जिले में मिला-जुला असर दिख रहा है। यहां विधायक संतुष्टि 52 प्रतिशत है, जो औसत से कम है। खिलचीपुर और राजगढ़ सीटें सबसे कमजोर मानी गई हैं।
विदिशा जिले की खास बात अलग है। यहां कांग्रेस की सक्रियता सिर्फ 45 प्रतिशत मानी गई है। यह संभाग में सबसे कम है। हालांकि विदिशा सीट पर सरकार संतुष्टि सबसे कम है।
सीहोर जिला सबसे कमजोर कड़ी निकला है। यह इकलौता जिला है जहां सरकार संतुष्टि 50 प्रतिशत से नीचे है। यहां यह सिर्फ 49.2 प्रतिशत है। विधायक संतुष्टि भी औसत से कम है।
सबसे मजबूत और कमजोर सीटें कुछ सीटों पर तीनों आंकड़े अच्छे हैं। इनमें उदयपुरा, बुधनी और सारंगपुर शामिल हैं। यहां लोग जागरूक भी हैं और संतुष्ट भी हैं। इन सीटों पर राजनीतिक चर्चा भी तेज रहती है।
कुछ सीटें सबसे ज्यादा ध्यान मांगती हैं। सीहोर और सिरोंज में संतुष्टि सबसे कम है। यहां विधायक और सरकार, दोनों को मेहनत करनी होगी। जनसंपर्क बढ़ाने की जरूरत साफ दिख रही है।
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आगे की चुनौती क्या है
विदिशा में कांग्रेस की कमजोर सक्रियता सत्ता पक्ष के लिए अच्छा संकेत है। लेकिन राजगढ़, सीहोर और भोपाल के शहरी इलाकों में कांग्रेस की सक्रियता ध्यान देने वाली बात है।
यह सर्वे सिर्फ धारणा बताता है। यह कोई चुनाव परिणाम की भविष्यवाणी नहीं है। फिर भी यह जमीनी हलचल का एक संकेत देता है।
FAQ
- प्रश्न 1: भोपाल संभाग में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं और किस पार्टी का कब्जा ज्यादा है?
उत्तर: भोपाल संभाग में कुल 25 विधानसभा सीटें हैं। ये भोपाल, राजगढ़, विदिशा, सीहोर और रायसेन जिलों में फैली हैं। इनमें से 22 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। बाकी 3 सीटें कांग्रेस के पास हैं, जो भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य और सिलवानी हैं। - प्रश्न 2: भोपाल संभाग के सर्वे में सरकार से सबसे ज्यादा संतुष्टि किस सीट पर मिली है?
उत्तर: सर्वे के मुताबिक सरकार से सबसे ज्यादा संतुष्टि भोजपुर सीट पर है, जहां 64.1 प्रतिशत लोग संतुष्ट हैं। यहां बीजेपी के सुरेन्द्र पटवा विधायक हैं। इसके बाद गोविंदपुरा सीट पर 61.5 प्रतिशत संतुष्टि दर्ज हुई, जहां कृष्णा गौर विधायक हैं। - प्रश्न 3: भोपाल संभाग का कौन सा जिला सबसे कम संतुष्ट पाया गया और क्यों?
उत्तर: सीहोर जिला सबसे कम संतुष्ट पाया गया है। यह संभाग का इकलौता जिला है जहां सरकार से संतुष्टि 50 प्रतिशत से नीचे, यानी 49.2 प्रतिशत है। साथ ही यहां कांग्रेस की सक्रियता का परसेप्शन भी औसत से ऊपर है, जो सत्ता पक्ष के लिए चुनौती बताता है।
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