भोपाल का सदियों पुराना इत्र व्यापार संकट में, जानें क्यों

ईरान-यूएस युद्ध के कारण भोपाल के इत्र उद्योग पर संकट गहरा गया है। पश्चिम एशिया को होने वाला 35% निर्यात प्रभावित है। रमजान के दौरान शिपमेंट रुकीं और कई ऑर्डर रद्द हो गए।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • ईरान-यूएस युद्ध के कारण भोपाल के आईट्रा व्यापार में संकट।

  • पश्चिम एशिया को निर्यात होने वाले 35% माल की शिपमेंट्स रुकीं।

  • आईट्रा उत्पादों के आदेश रद्द, गोदामों में भर गया माल।

  • छोटे व्यापारियों में 40-50% तक गिरावट, व्यापार प्रभावित।

  • युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला के संकट ने रमजान की बिक्री पर असर डाला।

News In Detail

भोपाल का सदियों पुराना इत्र उद्योग इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है। इस परेशानी की मुख्य वजह ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति से पैदा हुई सप्लाई चेन की दिक्कतें हैं। रमजान के मौके पर जब व्यापारियों को बिक्री बढ़ने की उम्मीद थी, उसी समय उनकी शिपमेंट्स रोक दी गईं।

भारत से पश्चिम एशिया में 35% इत्र निर्यात

भोपाल से बनने वाले इत्र का लगभग 35 प्रतिशत निर्यात पश्चिम एशिया के देशों में होता है। यह क्षेत्र इस कारोबार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और एक तरह से इसकी जीवनरेखा है। लेकिन मौजूदा हालात के कारण शिपमेंट्स रुक गई हैं। इससे व्यापारियों के गोदामों में तैयार माल जमा हो गया है और वे आगे की स्थिति को लेकर असमंजस में हैं।

इत्र कारोबारी सैयद मोहम्मद आलमाश जलाल का कहना है कि उनका परिवार करीब 100 सालों से इस व्यापार से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी। उनके अनुसार, मध्य-पूर्व के देशों के लिए भेजा गया कई किलोग्राम प्रीमियम इत्र रास्ते में ही फंसा हुआ है। इतना ही नहीं, कुछ ग्राहकों ने अपने ऑर्डर पूरी तरह से रद्द भी कर दिए हैं।

सस्ती से लेकर प्रीमियम खुशबू तक

भोपाल के इत्र उद्योग में सस्ती बोतलों से लेकर 20 हजार रुपये प्रति तोला तक के महंगे और प्रीमियम इत्र बनाए और बेचे जाते हैं। यह कारोबार शहर के कई स्थानीय कारीगरों की मेहनत से चलता है, जो पारंपरिक तरीकों से खुशबू तैयार करते हैं।

इत्र व्यापारी अरिफ खान और अन्य व्यापारियों का कहना है कि इस समय हालात बहुत खराब हैं। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियां उनके लिए सबसे कठिन समय लेकर आई हैं। इस साल अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध के असर से त्योहारों की रौनक कम हो गई है। इसके अलावा सप्लाई चेन की समस्याएं, माल ढुलाई का बढ़ा हुआ खर्च और आयातकों की हिचकिचाहट ने भी कारोबार को प्रभावित किया है। इन कारणों से इस साल बिक्री के अनुमान काफी कम हो गए हैं।

छोटे व्यापारियों को नुकसान, 40-50% तक गिरावट

सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। परिवार द्वारा चलाए जा रहे छोटे कारखानों और इकाइयों में ऑर्डर 40 से 50 प्रतिशत तक घट गए हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कई छोटे कारखाने बंद हो सकते हैं। इसका असर जाहरंगीराबाद और बैरागढ़ जैसे इलाकों के व्यापार पर भी पड़ सकता है, जहां इत्र का काम बड़ी संख्या में होता है।

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