भोपाल मास्टर प्लान लागू होने में लगेंगे 6 महीने, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
Jitendra Shrivastava | Sept 14, 2026, 23:27 IST
Photograph: (THESOOTR)
भोपाल में मास्टर प्लान को सरकार की मंजूरी मिलने पर भी लागू होने में 6 महीने लगेंगे। मिक्स्ड लैंड यूज के लिए डायवर्सन की कीमत चुकानी होगी। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पर टिका है इसमें 15 सितंबर को अहम सुनवाई होनी है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मास्टर प्लान की हां भी हो जाए, फिर भी 6 महीने लगेंगे।
- मिक्स्ड लैंड यूज के लिए बड़ी कीमत चुकानी होगी।
- भोपाल में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले नया मोड़।
- 21 साल पुराने मास्टर प्लान पर टिका शहर का विकास।
- व्यापारियों के विरोध के बाद रुकी सीलिंग की कार्रवाई।
अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ के मुताबिक मंजूरी मिलने पर भी लागू होने में कम से कम 6 महीने लगेंगे। मिक्स्ड लैंड यूज में डायवर्सन के लिए निश्चित राशि भी चुकानी होगी।
भोपाल में साल 2005 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं बना है। शहर 21 साल पुराने प्लान के भरोसे ही चल रहा है। यही वजह है कि रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां बेतरतीब तरीके से बढ़ती चली गईं। अरेरा कॉलोनी के मामले के बाद पूरे शहर में ऐसे प्रतिष्ठान चिन्हित किए गए थे।
मास्टर प्लान जरूरी क्यों है
मास्टर प्लान नहीं होने से यह असंतुलन आज की स्थिति तक पहुंच गया। रहवासी क्षेत्रों में ही बड़े पैमाने पर कमर्शियल गतिविधियां शुरू हो गईं। इसी के चलते अब सीलिंग और नोटिस जैसी कार्रवाई करनी पड़ रही है।
मिक्स्ड लैंड यूज में क्या बदलेगा
अगर सरकार अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां और रोहित नगर जैसे बड़े इलाकों को मिक्स्ड लैंड यूज के दायरे में लाती भी है तो पार्किंग, सीवेज, बिजली और पानी का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर नए सिरे से तैयार करना होगा।
जिन भवनों को कमर्शियल दायरे में लाया जाएगा, उन्हें डायवर्ट करने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके लिए तय राशि भी चुकानी होगी, जो सरकार खुद तय करेगी। इस पूरी प्रक्रिया में भी 4 से 6 महीने लग सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिका मामला
अगस्त में आया था बड़ा मोड़
कोर्ट ने साफ कहा था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी आदेश के बाद नगर निगम ने नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की।
एक सप्ताह के भीतर 8 हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए गए। कुल 62 हजार नोटिस दिए जाने थे, लेकिन 8 हजार में ही निगम को कड़ा विरोध झेलना पड़ा।
व्यापारियों ने किया जमकर विरोध
इसके बाद कोलार व्यापारी महासंघ के आह्वान पर कोलार रोड का पूरा बाजार एक दिन बंद रखा गया। डी-मार्ट और शराब की दुकानें तक बंद रहीं। अवधपुरी और रायसेन रोड पर भी ऐसे ही प्रदर्शन हुए। लगातार बढ़ते विरोध के बाद नगर निगम ने सीलिंग की कार्रवाई फिलहाल रोक दी है।
सीएम से मिले जनप्रतिनिधि
रविवार को सीएम मोहन यादव ने निर्देश दिए थे कि यह पूरा विषय सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया जाए। कोर्ट के निर्देश के अनुसार ही आगे की कार्रवाई तय होगी। अब सभी की निगाहें 15 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं।
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