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नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई पर सवाल, सील दुकानों में कारोबार, खाद्य विभाग के छापे ने खोली पोल
Atul Dwivedi | Sept 14, 2026, 19:14 IST
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भोपाल में नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई सवालों में है। अगस्त में सील किया गया साक्षी ढाबा 13 सितंबर को चालू मिला, जब खाद्य सुरक्षा विभाग ने वहां छापा मारकर मटन-पनीर के नमूने लिए।
भोपाल नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई सवालों के घेरे में है। सील की गई कई दुकानें दोबारा खुल गई हैं। अगस्त में सील किए गए साक्षी ढाबे में 13 सितंबर को खाद्य सुरक्षा विभाग ने छापा मारा। आरोप है कि यहां तय मांस की जगह दूसरा मांस परोसा जा रहा था। अब रहवासी समिति पूछ रही है कि सील ढाबा दोबारा कैसे खुला।
भोपाल के रहवासी इलाकों में नगर निगम लंबे समय से सीलिंग की कार्रवाई कर रहा है। मकसद था कि रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हों। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बता रही है। कई जगह सील की गई दुकानें, शोरूम और मॉल फिर से खुल चुके हैं। कुछ जगह तो देर रात कारोबार होने की बात भी सामने आई है।
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इसी कड़ी में सबसे चर्चित मामला साक्षी ढाबे का है। अगस्त में इस ढाबे को सील किया गया था। उस समय सीलिंग के वीडियो और फोटो भी खूब वायरल हुए थे। लेकिन 13 सितंबर को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम यहां छापा मारने पहुंची।
टीम को शिकायत मिली थी कि ढाबे में बकरे या चिकन की जगह दूसरा मांस इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद टीम ने मटन और पनीर के नमूने लिए। सवाल यही है कि जो ढाबा निगम के रिकॉर्ड में सील दर्ज है, वहां कारोबार कैसे चल रहा था।
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इस पूरे मामले पर संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने फिर आवाज उठाई है। समिति ने निगम आयुक्त को शिकायत भेजी है। समिति की मांग है कि दोबारा खुले सभी प्रतिष्ठानों का सर्वे कराया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और संचालकों की भूमिका की जांच हो।
समिति ने सीधा सवाल पूछा है कि क्या निगम ने दोबारा खोलने की अनुमति दी थी। अगर अनुमति नहीं दी गई, तो नियम तोड़ने वालों पर अब तक FIR (एफआईआर – First Information Report) क्यों नहीं हुई। समिति की मांग है कि साक्षी ढाबे पर हुई खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई को एक्शन टेकन रिपोर्ट में शामिल किया जाए।
इस मामले में द सूत्र ने भोपाल नगर निगमायुक्त संस्कृति जैन से बात की। उनका कहना है कि उन्हें फिलहाल इस बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की पूरी जानकारी लेकर आगे बताया जाएगा।
भोपाल की सीलिंग कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। इस पर 15 सितंबर को सुनवाई होनी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को स्टे से जुड़े मामलों पर जल्द सुनवाई पूरी करने को कहा था।
जबलपुर हाईकोर्ट ने इसके बाद कारोबारियों को 7 दिन का समय दिया था। 9 सितंबर को हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि कारोबारी जरूरी दस्तावेज पेश करें। दस्तावेजों की जांच के बाद निगम को 4 हफ्ते में फैसला लेना होगा। इसके साथ ही संबंधित पक्ष को सुनवाई का मौका भी देना होगा।
मामले में एक बड़ा पेच भी है। अगर साक्षी ढाबे को हाईकोर्ट से स्टे मिला हुआ था, तो पहले इसे सील क्यों किया गया। और अगर स्टे नहीं था, तो सीलिंग के बाद ढाबा दोबारा कैसे खुल गया। यही सवाल अब पूरी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।
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भोपाल के रहवासी इलाकों में नगर निगम लंबे समय से सीलिंग की कार्रवाई कर रहा है। मकसद था कि रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हों। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बता रही है। कई जगह सील की गई दुकानें, शोरूम और मॉल फिर से खुल चुके हैं। कुछ जगह तो देर रात कारोबार होने की बात भी सामने आई है।
ढाबा सील, फिर भी चालू कैसे?
टीम को शिकायत मिली थी कि ढाबे में बकरे या चिकन की जगह दूसरा मांस इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद टीम ने मटन और पनीर के नमूने लिए। सवाल यही है कि जो ढाबा निगम के रिकॉर्ड में सील दर्ज है, वहां कारोबार कैसे चल रहा था।
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समिति ने उठाए सवाल
समिति ने सीधा सवाल पूछा है कि क्या निगम ने दोबारा खोलने की अनुमति दी थी। अगर अनुमति नहीं दी गई, तो नियम तोड़ने वालों पर अब तक FIR (एफआईआर – First Information Report) क्यों नहीं हुई। समिति की मांग है कि साक्षी ढाबे पर हुई खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई को एक्शन टेकन रिपोर्ट में शामिल किया जाए।
निगम आयुक्त की सफाई
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
जबलपुर हाईकोर्ट ने इसके बाद कारोबारियों को 7 दिन का समय दिया था। 9 सितंबर को हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि कारोबारी जरूरी दस्तावेज पेश करें। दस्तावेजों की जांच के बाद निगम को 4 हफ्ते में फैसला लेना होगा। इसके साथ ही संबंधित पक्ष को सुनवाई का मौका भी देना होगा।
मामले में एक बड़ा पेच भी है। अगर साक्षी ढाबे को हाईकोर्ट से स्टे मिला हुआ था, तो पहले इसे सील क्यों किया गया। और अगर स्टे नहीं था, तो सीलिंग के बाद ढाबा दोबारा कैसे खुल गया। यही सवाल अब पूरी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।
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