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Photograph: (thesootr)
BHOPAL. सरकार की नीति और सेवा शर्तों की विसंगतियों के विरोध में प्रदेश के शिक्षकों ने राजधानी भोपाल में प्रदर्शन किया। साल की शुरूआत में शिक्षकों का यह पहला प्रदर्शन था जिसमें हजारों की संख्या में अध्यापक संवर्ग के कर्मचारी जुटे।
आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के आव्हान पर पहुंचे शिक्षकों ने मंच से सरकारी स्कूलों के संचालन और शैक्षणिक व्यवस्था से संबंधित नीतियों पर नाराजगी जताई।
संगठन ने प्रदर्शन के बाद अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर सरकार से शिक्षकों की 20 सूत्रीय मांगों को अनदेखा न करने की अपील की। शिक्षकों ने कहा अगर सरकार ने अब भी गंभीरता नहीं दिखाई तो प्रदेश में पूरी शिक्षा व्यवस्था की बदहाल नजर आएगी।
20 सूत्रीय मांगों की अनदेखी
मध्य प्रदेश में नया साल सरकार के सामने कर्मचारी वर्ग की चुनौतियां लेकर आया है। साल के दूसरे ही दिन प्रदेश के अध्यापक- शिक्षक राजधानी में प्रदर्शन के लिए जमा हो गए।
आजाद अध्यापक- शिक्षक संघ के आव्हान पर प्रदेश के जिलों से आए शिक्षकों ने सरकार से वेतन विसंगति, पदोन्नति, पुरानी पेंशन, डीए वृद्धि, स्थानांतरण, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी का लाभ सहित 20 सूत्रीय मांगों को उठाया।
संघ के प्रांत अध्यक्ष ने कहा सालों से अध्यापक- शिक्षक संगठन सरकार के सामने अपनी समस्याएं उठाते आ रहे हैं। सरकार के प्रतिनिधियों से हर बार केवल आश्वासन ही मिलता रहा है लेकिन सुनवाई नहीं होती।
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इन मांगों पर बुलंद की आवाज
राजधानी के सेकेंड स्टाप स्थित अंबेडकर पार्क में इकट्ठा हुए अध्यापक और शिक्षकों ने सरकार के सामने अपनी समस्याओं को रखा। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है।
एक-एक शिक्षक कई कक्षाओं और बच्चों को संभालने मजबूर है। इसके बावजूद परीक्षा परिणाम को लेकर कभी जिला और विकासखंड शिक्षा अधिकारी तो कभी लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा चेतावनी भरे नोटिस देकर या दूसरी दंडात्मक कार्रवाई से डराया जाता है।
शिक्षकों पर बच्चों के पढ़ाने के अलावा दूसरे सरकारी काम भी जबरन थोपे जाते हैं लेकिन विभागीय अधिकारी शासन के सामने उनका पक्ष ही नहीं रखते।
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मंहगाई भत्ता, डीए में विसंगति
आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के प्रांत अध्यक्ष भारत पटेल ने शिक्षा विभाग से शिक्षकों की बातों को अनसुना न करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहा है लेकिन विभाग और सरकार अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही।
शिक्षकों को मंहगाई भत्ता, डीए देने में विसंगति हो रही है। पूरे जीवन को स्कूलों में खपा देने के बाद जब शिक्षक सेवानिवृत्त होता है तो उसे अपनी ही जमा पूंजी यानी ग्रेच्युटी के लिए चक्कर लगाने मजबूर किया जाता है। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए लोक शिक्षण संचालनालय पोर्टल का संचालन करता है लेकिन उसके लिए संकुल केंद्र और स्कूलों के प्राचार्यों पर जबरन बोझ डाला जा रहा है।
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