2050 तक 40 प्रतिशत सिमट जाएगा बड़ा तालाब, इस रिसर्च में भोपाल वालों के लिए खतरे की घंटी
Anjali Dwivedi | Apr 02, 2026, 15:15 IST
bhopal upper lake
IISER और MANIT की साझा स्टडी में चेतावनी दी गई है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण साल 2050 तक भोपाल की लाइफलाइन बड़ा तालाब 40% तक सिमट सकता है। एआई मॉडल के जरिए वैज्ञानिकों ने यह डरावना अनुमान लगाया है।
भोपाल. जिस बड़े तालाब के किनारे भोपाल की सुबहें सजती हैं। जहां से शहर के लाखों घरों में पानी पहुंचता है, वही तालाब आने वाले सालों में तेजी से सिकुड़ सकता है।
एक नई स्टडी में इसे लेकर चेतावनी दी गई है। रिसर्च में कहा गया है कि यदि दुनिया का तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है तो साल 2050 तक भोपाल की लाइफ लाइन बड़ा तालाब करीब 40 प्रतिशत तक सिमट सकता है।
यह चेतावनी भोपाल के हर नागरिक के लिए अलार्म है। क्योंकि यह तालाब शहर की करीब 40 फीसदी पेयजल जरूरत को पूरा करता है। यानी तालाब का हर इंच घटना सीधे आपके घर के नल से जुड़ा हुआ है।
स्टडी कहती है कि पानी कम होने का असर सिर्फ पानी की सप्लाई तक सीमित नहीं रहेगा। तालाब में मछलियों की संख्या घटेगी। जैव विविधता प्रभावित होगी। सूखे की स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है। भूजल स्तर पर दबाव बढ़ेगा। यानी एक तरफ नलों में पानी कम होगा, दूसरी तरफ पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ेगा। इसका असर आम आदमी की जेब और जीवन दोनों पर पड़ेगा।
यह स्टडी IISER भोपाल (iiser bhopal) और MANIT भोपाल के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार की है। इसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल Remote Sensing Applications: Society and Environment में प्रकाशित किया गया है।
इस रिसर्च में रोशन नाथ, प्रो. सोमिल स्वर्णकार, डॉ. विकास पूनिया और डॉ. विनोद के. कुर्मी शामिल हैं। प्रो. सोमिल स्वर्णकार का कहना है कि आने वाले समय में तालाब को ज्यादा बार सूखे दौर का सामना करना पड़ेगा और मानसून से होने वाला भराव भी कमजोर होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ा तालाब अब पहले जैसा स्थिर नहीं रहेगा। पानी का स्तर कभी बहुत कम, कभी ज्यादा होगा। सूखे के दौर बार-बार आएंगे। मानसून से भरने की क्षमता कमजोर पड़ेगी। बाढ़ जैसे हालात कम ही देखने को मिलेंगे। यानी तालाब का प्राकृतिक संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ सकता है।
इस स्टडी की सबसे खास बात है इसका तरीका। वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का शानदार इस्तेमाल किया है। दरअसल, 1990 से 2022 तक के सैटेलाइट डेटा में कई जगह खालीपन था। बादलों के कारण तस्वीरें साफ नहीं थीं। कई रिकॉर्ड अधूरे थे। इसे ठीक करने के लिए ही वैज्ञानिकों ने दो चरणों में काम किया।
पहले चरण में एक फीड-फॉरवर्ड न्यूरल नेटवर्क ने बारिश, तापमान, वाष्पीकरण और मिट्टी की नमी जैसे आंकड़ों की मदद से पुराने डेटा को पूरा किया।
दूसरे चरण में LSTM (Long Short-Term Memory) मॉडल ने इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य का अनुमान लगाया। खासतौर पर तब, जब तापमान 2 डिग्री तक बढ़ जाए। अब वैज्ञानिकों का दावा है कि यह मॉडल करीब 90% तक सटीक है।
इस AI सिस्टम की एक खास बात यह है कि इसे किसी भी झील या वेटलैंड पर लागू किया जा सकता है। जहां डेटा कम है, वहां भी यह काम करता है। यानि यह तकनीक दूसरे शहरों और देशों को भी पानी बचाने की दिशा में मदद कर सकती है।
भोपाल का बड़ा तालाब और छोटा तालाब मिलकर भोज वेटलैंड बनाते हैं, जिसे रामसर साइट का दर्जा मिला है। इसका मतलब यह है कि यह दुनिया के महत्वपूर्ण वेटलैंड्स में शामिल है। यह तालाब शहर को पानी देता है। भूजल को रिचार्ज करता है। पर्यावरण को संतुलित रखता है। हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा है।
स्टडी में यह भी सामने आया है कि खतरा सिर्फ ग्लोबल वार्मिंग से नहीं है। शहर का तेजी से फैलना, प्रदूषण और अतिक्रमण भी तालाब पर दबाव बढ़ा रहे हैं। यानि समस्या दो तरफ से बढ़ रही है। एक तो प्रकृति बदल रही है और इंसानी दबाव भी बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी भी समय है। जल संरक्षण पर जोर देना होगा। हरित नीतियां बनानी होंगी। तालाब के आसपास अतिक्रमण और प्रदूषण रोकना होगा, तभी आने वाले संकट को कम किया जा सकता है।
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एक नई स्टडी में इसे लेकर चेतावनी दी गई है। रिसर्च में कहा गया है कि यदि दुनिया का तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है तो साल 2050 तक भोपाल की लाइफ लाइन बड़ा तालाब करीब 40 प्रतिशत तक सिमट सकता है।
यह चेतावनी भोपाल के हर नागरिक के लिए अलार्म है। क्योंकि यह तालाब शहर की करीब 40 फीसदी पेयजल जरूरत को पूरा करता है। यानी तालाब का हर इंच घटना सीधे आपके घर के नल से जुड़ा हुआ है।
स्टडी कहती है कि पानी कम होने का असर सिर्फ पानी की सप्लाई तक सीमित नहीं रहेगा। तालाब में मछलियों की संख्या घटेगी। जैव विविधता प्रभावित होगी। सूखे की स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है। भूजल स्तर पर दबाव बढ़ेगा। यानी एक तरफ नलों में पानी कम होगा, दूसरी तरफ पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ेगा। इसका असर आम आदमी की जेब और जीवन दोनों पर पड़ेगा।
किसने दी यह चेतावनी?
इस रिसर्च में रोशन नाथ, प्रो. सोमिल स्वर्णकार, डॉ. विकास पूनिया और डॉ. विनोद के. कुर्मी शामिल हैं। प्रो. सोमिल स्वर्णकार का कहना है कि आने वाले समय में तालाब को ज्यादा बार सूखे दौर का सामना करना पड़ेगा और मानसून से होने वाला भराव भी कमजोर होगा।
आने वाले सालों में क्या बदलेगा?
AI ने दिखाया भविष्य, 30 साल का डेटा खंगाला
पहले चरण में एक फीड-फॉरवर्ड न्यूरल नेटवर्क ने बारिश, तापमान, वाष्पीकरण और मिट्टी की नमी जैसे आंकड़ों की मदद से पुराने डेटा को पूरा किया।
दूसरे चरण में LSTM (Long Short-Term Memory) मॉडल ने इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य का अनुमान लगाया। खासतौर पर तब, जब तापमान 2 डिग्री तक बढ़ जाए। अब वैज्ञानिकों का दावा है कि यह मॉडल करीब 90% तक सटीक है।
सिर्फ भोपाल नहीं, दुनिया के लिए भी चेतावनी
क्यों खास है बड़ा तालाब?
खतरा सिर्फ मौसम से नहीं, शहर से भी
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी भी समय है। जल संरक्षण पर जोर देना होगा। हरित नीतियां बनानी होंगी। तालाब के आसपास अतिक्रमण और प्रदूषण रोकना होगा, तभी आने वाले संकट को कम किया जा सकता है।
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