एमपी में एल्डरमैन नियुक्ति पर ब्रेक : जमीनी कार्यकर्ता इंतजार में, संगठन ‘सहमति’ में उलझा
Ramanand Tiwari | May 03, 2026, 07:30 IST
Photograph: (the sootr)
प्रदेश में 1800 एल्डरमैन पदों पर नियुक्तियां अटकी हैं। बड़े नेताओं की आपसी सहमति न बनने से जमीनी कार्यकर्ता परेशान हैं और संगठन में नाराजगी बढ़ रही है।
प्रदेश में भाजपा संगठन एक तरफ बड़े पदों पर नियुक्तियां तेजी से कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ जमीनी कार्यकर्ताओं को एडजस्ट करने वाली एल्डरमैन नियुक्तियां महीनों से अटकी हुई हैं। करीब 1800 पदों पर फैसला नहीं हो पाया है, जबकि कई शहरों से अब तक नाम ही नहीं पहुंचे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन अंदरूनी खींचतान में फंस गया है?
प्रदेश के 16 नगर निगम समेत कुल 413 नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्तियां होना है। यह पद संगठन के लिए इसलिए अहम हैं क्योंकि यहीं सबसे ज्यादा जमीनी कार्यकर्ताओं को जगह मिलती है। लेकिन हकीकत यह है कि दूसरे चरण की यह पूरी प्रक्रिया एक महीने से ज्यादा समय से अटकी हुई है।
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पिछले महीने 169 निकायों में 768 एल्डरमैन की सूची जारी कर दी गई थी। लेकिन चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र में सहमति न बनने के कारण कई सूचियों को होल्ड कर दिया गया। इसके बाद से बाकी 244 निकायों की सूची अब तक जारी नहीं हो सकी है।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में नेताओं के बीच नामों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है।
इंदौर की स्थिति सबसे ज्यादा उलझी हुई बताई जा रही है, जहां से अब तक नामों का पैनल भोपाल नहीं भेजा गया। यह संकेत देता है कि अंदरखाने खींचतान अब भी जारी है।
एल्डरमैन पद ही वह जगह है जहां वर्षों से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को मौका मिलता है। लेकिन देरी के कारण कई कार्यकर्ता खुद को नजरअंदाज महसूस कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ कार्यकर्ता इस प्रक्रिया से पीछे हटने भी लगे हैं।
संगठन के भीतर यह भी चर्चा है कि अगर यही स्थिति रही तो इन कार्यकर्ताओं को आगे पार्षद टिकट पाने में भी मुश्किल हो सकती है। यानी एल्डरमैन की देरी सिर्फ एक नियुक्ति का मामला नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति से भी जुड़ा है।
प्रदेश अध्यक्ष पहले ही कह चुके हैं कि “हर कार्यकर्ता को स्थान मिलेगा” और जल्द नियुक्तियां पूरी होंगी। लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर इसके उलट नजर आ रही है, जहां कार्यकर्ता अभी भी इंतजार में हैं।
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जब सूची लगभग तैयार है, सहमति की बात भी सामने आ चुकी है, तो आखिर फैसला क्यों नहीं हो पा रहा? क्या संगठन जमीनी कार्यकर्ताओं को लेकर गंभीर है, या फिर ‘मलाईदार कुर्सियों’ की राजनीति में ये मुद्दा पीछे छूट गया है? फिलहाल, सबसे बड़ा सच यही है—जो कार्यकर्ता संगठन की नींव हैं, वही आज सबसे लंबा इंतजार कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
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पहले चरण के बाद क्यों रुकी प्रक्रिया?
बड़े शहरों में ‘सहमति’ सबसे बड़ी रुकावट
इंदौर की स्थिति सबसे ज्यादा उलझी हुई बताई जा रही है, जहां से अब तक नामों का पैनल भोपाल नहीं भेजा गया। यह संकेत देता है कि अंदरखाने खींचतान अब भी जारी है।
जमीनी कार्यकर्ता क्यों नाराज़?
क्या चुनावी भविष्य पर पड़ेगा असर?
संगठन के दावे बनाम जमीनी हकीकत
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संख्या में समझें पूरा गणित:
- कुल नगरीय निकाय: 413
- पहले चरण में नियुक्ति: 169 निकाय, 768 एल्डरमैन
- बाकी बचे निकाय: 244
- प्रस्तावित कुल नियुक्तियां: करीब 1800
- बड़े नगर निगमों में: हर शहर में 12-12 एल्डरमैन
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