BJP नेता नीलेश चौधरी की 200 करोड़ की जमीन पर कलेक्टर का आदेश- निजी नहीं सीलिंग दर्ज करें

Sanjay Gupta | Jul 17, 2026, 18:34 IST
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बीजेपी नेता की जमीन
बीजेपी नेता की जमीन

बीजेपी नेता व पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी नीलेश चौधरी की 200 करोड़ की सीलिंग जमीन पर कॉलोनी मामले में द सूत्र खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के आदेश पर इस कॉलोनी को लेकर कई तरह की रोक लग गई है।

राऊ के पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी नेता और पूर्व पार्षद पति नीलेश चौधरी और उनके परिवार की सीलिंग की जमीन वाली स्वास्तिक ग्रांड कॉलोनी पर रोक लग गई है। द सूत्र के खुलासे के बाद इंदौर कलेक्टर ने इस 200 करोड़ की कॉलोनी की फाइल को लेकर कॉलोनी सेल के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद इसमें कई अहम निर्देश दिए। कॉलोनी को लेकर अब कई रोक लग गई। सबसे बड़ा आदेश राजस्व रिकॉर्ड में सुधार का है, जिसके बाद यह जमीन अब चौधऱी परिवार की नहीं होकर सीलिंग प्रभावित रहेगी।

यह है वह कॉलोनी और मामला

नीलेश चौधरी व उनके परिवार हातोद के गांव सोनगीर में स्वास्तिक ग्रांड नाम की कॉलोनी लेकर आए। सर्वे नंबर 5/1/1/1, 5/1/2, 5/2/1, 5/2/2, 15/1/1/1/1, 15/1/3, 15/2/1, 15/1/2/1 सहित विविध सर्वे की 17 हेक्टेयर जमीन नीलेश चौधरी के पिता बाबूलाल चौधरी के साथ ही भाई दिनेश, सुनील, उनकी पत्नी द्रौपदीबाई, सुनील की पत्नी कृष्णाबाई के नाम पर है। इसमें डेवलपर्स शरद गुप्ता पिता रामजीलाल गुप्ता बने। लेकिन जांच में यह जमीन सीलिंग की निकली। इसकी विकास मंजूरी यह बोलकर चौधऱी परिवार ने ली कि साल 2009-10 में यह जमीन एसडीएम के आदेश से निजी हो गई है। लेकिन जांच में यह आदेश कहीं मिला ही नहीं, यानी यह फर्जी आदेश है। सीलिंग की जमीन का मामला पता चलने पर कलेक्टर ने पूर्व में जारी विकास मंजूरी निरस्त कर दी।

कॉलोनी में खरीदी-बिक्री पर लगी रोक

जानकारी के अनुसार कॉलोनी में खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इसके लिए पंजीयन विभाग को पत्र जारी कर कॉलोनी के सर्वे नंबर पर रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है। साथ ही प्रशासन द्वारा रेरा को भी पत्र लिखकर इसका रेरा नंबर रद्द करने के लिए कहा है। एक अहम आदेश भी दिया गया है कि इन सर्वे नंबर को लेकर राजस्व रिकॉर्ड को दुरूस्त करते हुए इन्हें सीलिंग प्रभावित लिखा जाए। ऐसे में अब यह सर्वे नंबर की जमीन नीलेश चौधऱी व उनके परिवार की ना होकर सीलिंग प्रभावित हो जाएगी।

कलेक्टर ने फर्जी आदेश की जांच बैठाई

वहीं कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस मामले में जांच भी बैठा दी है कि आखिर साल 2009-10 में एसडीएम का फर्जी आदेश कहां से और कैसे आया। इसके आधार पर जमीन को निजी कैसे किया गया। इसमें उस समय के जिम्मेदार पटवारी, आरआई, तहसीलदार इन सभी की भूमिका की जांच होगी। यदि इसमें किसी की सांठगांठ सामने आती है तो संबंधित पर कानूनी कार्रवाई होगी। वहीं जांच में यदि चौधरी परिवार और डेवलपर्स गुप्ता व अन्य की भूमिका सामने आती है तो उन पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मंजूरी में टीएंडसीपी के रिटायर अधिकारी भी

इस फाइल की पूरी मंजूरी कराने में इंदौर टीएंडसीपी में पदस्थ रहे सहायक संचालक दर्शन लाल गोयल (डीएल गोयल) की भी अहम भूमिका रही है। उनकी पत्नी मनोरमा गोयल इसमें शरद गुप्ता की डेवलपर्स कंपनी में पार्टनर है। गोयल ने कुछ साल पहले वीआरएस ले लिया था। इस कंपनी में मनोरमा गोयल के साथ दीपक टेगे, शरद गुप्ता, रौनक अग्रवाल की हिस्सेदारी आन रिकॉर्ड मौजूद हैं। इन सभी के दस्तावेज भी रेरा और विकास मंजूरी की फाइल में लगे हुए हैं। इसमें मनोरमा गोयल की प्रॉफिट शेयरिंग 36 फीसदी है। वहीं दीपके टेगे और शरद गुप्ता की 28-28 फीसदी और रौनक की 8 फीसदी है। यानी मूल डेवलपर्स इसमें मनोरमा गोयल पति डीएल गोयल ही है।

रेरा के बाद करोड़ों के प्लॉट बिक गए

इस कॉलोनी में एक हजार वर्गफीट से लेकर ढाई-तीन हजार वर्गफीट तक के 271 प्लॉट है। इसमें जून 2025 में रेरा होने के बाद करोड़ों के प्लॉट की बुकिंग और बिक्री भी हो गई। ऐसे में अब विकास मंजूरी रद्द होने के बाद और सीलिंग जमीन का मामला सामने आने के बाद यह प्लॉट धारक उलझ गए हैं। वहीं अभी भी लोगों की इसकी जानकारी नहीं है और प्रोजेक्ट की खऱीदी-बिक्री चल रही है। ऐसे में जरूरी है कि रेरा रद्द कराया जाए और जमीन सीलिंग की होने के नाते खरीदी-बिक्री पर र लगाई जाए।

शुद्द रूप से चार सौ बीसी का मामला

इस पूरे मामले में कॉलोनी सेल के साथ चार सौ बीसी की गई है। इसमें फर्जी आदेश बताया गया है। इसके लिए पूर्व पार्षद पति नीलेश चौधरी व उनके परिवार के साथ ही डेवलपर्स कंपनी शरद गुप्ता व अन्य डायरेक्टर पर एफआईआर बनती है। साथ ही साल 2010-11 में जिन्होंने भी राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर इस जमीन को सीलिंग मुक्त बताकर निजी बताया उन पर भी धोखाधड़ी का केस बनता है। इनके चलते आज सीलिंग की जमीन पर जिन्होंने प्लॉट खरीदे वह सब उलझ गए हैं।

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