मप्र में 2024 में बीजेपी राम और बलराम को बनाएगी गेमचेंजर, संघ ने तय किया प्रदेश के 15 लाख किसानों को जोड़ने का टारगेट
Jitendra Shrivastava | Nov 30, 2023, 24:00 IST
मप्र में 2024 में बीजेपी राम और बलराम को बनाएगी गेमचेंजर, संघ ने तय किया प्रदेश के 15 लाख किसानों को जोड़ने का टारगेट
चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद अब बीजेपी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने जा रही है।
अरुण तिवारी, BHOPAL. चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद अब बीजेपी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने जा रही है। बीजेपी इस बार राम और बलराम को गेमचेंजर के रुप देख रही है। अयोध्या के राम मंदिर का श्रेय लेने के साथ-साथ किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस जिम्मा संघ ने अपने संगठन किसान संघ को सौंपा है। किसान संघ 15 दिसंबर से प्रदेश के 15 लाख किसानों को अपने पाले में लाने के लिए किसान जोड़ो अभियान शुरु कर रहा है। 2024 के चुनाव को देखते हुए इस योजना पर काम किया जा रहा है। आइए आपको बताते हैं कि क्या है ये पूरा माजरा।
संघ ने किसानों को जोड़ने का जिम्मा संभाला
बीजेपी इस बार राम के सहारे और बलराम के भरोसे लोकसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रही है। बीजेपी के इस अभियान में संघ भी बराबर का साथ दे रहा है। एक तरफ गांव-गांव में पीले चावल बांटकर 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले भव्य राममंदिर के उद्घाटन का निमंत्रण दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ संघ भगवान बलराम को आराध्य मानने वाले अन्नदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संगठन के अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने किसानों को जोड़ने का जिम्मा संभाला है। किसान संघ 15 दिसंबर से प्रदेश में किसानों को जोड़ने के लिए किसान जोड़ो अभियान चलाने जा रहा है। इस योजना के तहत प्रदेश के 15 लाख किसानों को किसान संघ का सदस्य बनाया जाएगा। इसके लिए उनसे दस रुपए सदस्यता शुल्क भी लिया जाएगा।
प्रदेश में करीब एक करोड़ किसान
अब इसका राजनीतिक गणित समीकरण समझने की कोशिश करते हैं। प्रदेश में करीब एक करोड़ किसान हैं जो राजनीतिक रुप से बड़ा प्रभाव रखते हैं। किसानों को लागत मूल्य की जगह लाभकारी मूल्य दिलाने का मुद्दा हर चुनाव में उठता रहा है। किसानों के मुद्दों को लेकर किसान संघ की नाराजगी बीजेपी सरकार पर भी देखी गई है। किसान संघ उनकी इसी नाराजगी को दूर करेगा ताकि 2024 में उनको किसानों का साथ मिल सके। एक परिवार में यदि तीन से चार सदस्य माने जाएं तो इस योजना के तहत किसान संघ 60 लाख किसान परिवारों तक अपनी पहुंच बना सकता है। इस अभियान के तहत किसान संघ उन किसानों तक भी पहुंचेगा जिनके कर्ज का ब्याज शिवराज सरकार ने माफ किया है। ऐसे 11 लाख किसान हैं जिनके कर्ज के ब्याज के रुप में शिवराज सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपए माफ किए हैं। लेकिन इन किसानों ने अपना मूलधन जमा नहीं किया। यह मूलधन करीब पांच हजार करोड़ रुपए का है। किसान संघ ये जानने की कोशिश करेगा कि कहीं किसान कांग्रेस के कर्ज माफी के झांसे में तो नहीं हैं।
कब कैसे दिखाई किसानों ने अपनी ताकत
किसान मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक अपनी ताकत दिखा चुके हैं। मध्यप्रदेश में किसानों ने एक बार भोपाल को बंधक बना लिया था। वहीं मंदसौर गोलीकांड आज भी फाइलों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में सुलगता रहा है। इसके लिए सीएम शिवराज सत्याग्रह भी कर चुके हैं। वहीं मंदसौर गोलीकांड को उछालकर और कर्ज माफी का दांव चल कमलनाथ 15 महीने के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। दिल्ली में केंद्र के कानूनों के खिलाफ किसानों का धरना एक बड़ी घटना रही है। किसानों के दवाब में ही मोदी सरकार ने अपने कृषि कानून वापस लेने पड़े। इन सारी स्थितियों को देखते हुए ही संघ किसान जोड़ो अभियान शुरू कर रहा है। इसकी शुरुवात मध्यप्रदेश से हो रही है जो आगे दूसरे राज्यों की ओर बढ़ेगी।
संघ ने किसानों को जोड़ने का जिम्मा संभाला
बीजेपी इस बार राम के सहारे और बलराम के भरोसे लोकसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रही है। बीजेपी के इस अभियान में संघ भी बराबर का साथ दे रहा है। एक तरफ गांव-गांव में पीले चावल बांटकर 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले भव्य राममंदिर के उद्घाटन का निमंत्रण दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ संघ भगवान बलराम को आराध्य मानने वाले अन्नदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संगठन के अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने किसानों को जोड़ने का जिम्मा संभाला है। किसान संघ 15 दिसंबर से प्रदेश में किसानों को जोड़ने के लिए किसान जोड़ो अभियान चलाने जा रहा है। इस योजना के तहत प्रदेश के 15 लाख किसानों को किसान संघ का सदस्य बनाया जाएगा। इसके लिए उनसे दस रुपए सदस्यता शुल्क भी लिया जाएगा।
प्रदेश में करीब एक करोड़ किसान
अब इसका राजनीतिक गणित समीकरण समझने की कोशिश करते हैं। प्रदेश में करीब एक करोड़ किसान हैं जो राजनीतिक रुप से बड़ा प्रभाव रखते हैं। किसानों को लागत मूल्य की जगह लाभकारी मूल्य दिलाने का मुद्दा हर चुनाव में उठता रहा है। किसानों के मुद्दों को लेकर किसान संघ की नाराजगी बीजेपी सरकार पर भी देखी गई है। किसान संघ उनकी इसी नाराजगी को दूर करेगा ताकि 2024 में उनको किसानों का साथ मिल सके। एक परिवार में यदि तीन से चार सदस्य माने जाएं तो इस योजना के तहत किसान संघ 60 लाख किसान परिवारों तक अपनी पहुंच बना सकता है। इस अभियान के तहत किसान संघ उन किसानों तक भी पहुंचेगा जिनके कर्ज का ब्याज शिवराज सरकार ने माफ किया है। ऐसे 11 लाख किसान हैं जिनके कर्ज के ब्याज के रुप में शिवराज सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपए माफ किए हैं। लेकिन इन किसानों ने अपना मूलधन जमा नहीं किया। यह मूलधन करीब पांच हजार करोड़ रुपए का है। किसान संघ ये जानने की कोशिश करेगा कि कहीं किसान कांग्रेस के कर्ज माफी के झांसे में तो नहीं हैं।
कब कैसे दिखाई किसानों ने अपनी ताकत
किसान मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक अपनी ताकत दिखा चुके हैं। मध्यप्रदेश में किसानों ने एक बार भोपाल को बंधक बना लिया था। वहीं मंदसौर गोलीकांड आज भी फाइलों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में सुलगता रहा है। इसके लिए सीएम शिवराज सत्याग्रह भी कर चुके हैं। वहीं मंदसौर गोलीकांड को उछालकर और कर्ज माफी का दांव चल कमलनाथ 15 महीने के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। दिल्ली में केंद्र के कानूनों के खिलाफ किसानों का धरना एक बड़ी घटना रही है। किसानों के दवाब में ही मोदी सरकार ने अपने कृषि कानून वापस लेने पड़े। इन सारी स्थितियों को देखते हुए ही संघ किसान जोड़ो अभियान शुरू कर रहा है। इसकी शुरुवात मध्यप्रदेश से हो रही है जो आगे दूसरे राज्यों की ओर बढ़ेगी।
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