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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- स्कूल कैंपस में आवारा कुत्ता घुसा तो प्रिंसिपल की सीधी जिम्मेदारी तय होगी।
- मिड-डे मील के दौरान बच्चों पर कुत्तों के हमले रोकने हेतु निर्देश जारी।
- हर स्कूल में निगरानी के लिए एक विशेष सुरक्षा दल का गठन होगा।
- प्रिंसिपल इस सुरक्षा टीम में टीचर और चपरासी की ड्यूटी लगा सकते हैं।
- यह आदेश जिले के सभी प्राथमिक और माध्यमिक सरकारी स्कूलों पर लागू है।
NEWS IN DETAIL
Chhatarpur. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। बात सुनने में शायद थोड़ी अजीब लगे, लेकिन मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है। अब अगर स्कूल परिसर में कोई आवारा कुत्ता दिखाई दिया, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी स्कूल के प्रिंसिपल की होगी। छतरपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अरुण शंकर पांडे ने एक लिखित आदेश जारी कर सभी सरकारी स्कूलों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।
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मिड-डे मील की खुशबू और कुत्तों का 'डेरा'
असल में यह पूरा विवाद और डर तब शुरू हुआ जब गौरिहार जनपद के कंदैला स्कूल जैसी जगहों से शिकायतें आईं। यहां बच्चे दोपहर का भोजन (मिड-डे मील) करने बैठते हैं, तो खाने की महक से स्ट्रीट डॉग्स की टोली वहां जमा हो जाती है। कई बार ये कुत्ते बच्चों पर झपट पड़ते हैं, जिससे मासूमों में दहशत का माहौल बन जाता है। अब सरकार और प्रशासन का मानना है कि बच्चों की थाली के पास कुत्तों का होना खतरे से खाली नहीं है।
टीचर और चपरासी करेंगे 'डॉग पेट्रोलिंग'
DEO के आदेश के मुताबिक, अब हर स्कूल को एक खास 'निगरानी दल' यानी मॉनिटरिंग टीम बनानी होगी। इस टीम का काम होगा सुबह स्कूल खुलते ही और छुट्टी होने तक पूरे कैंपस का चक्कर लगाना। आदेश में साफ कहा गया है कि स्कूल प्रिंसिपल इसके लिए प्यून (भृत्य) और टीचर्स की ड्यूटी लगा सकते हैं। अगर कोई कुत्ता परिसर में पाया गया, तो प्रिंसिपल को जवाब देना होगा कि सुरक्षा में चूक कैसे हुई।
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क्या है इस आदेश के पीछे का असली तर्क?
प्रशासन का कहना है कि वे किसी बड़ी घटना का इंतज़ार नहीं कर सकते। हाल के दिनों में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। छतरपुर के सभी प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूलों में यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी का तर्क है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए स्कूल स्टाफ को थोड़ी मेहनत तो करनी ही पड़ेगी। अब देखना यह है कि क्या मास्टर साहब बच्चों को पढ़ाएंगे या डंडा लेकर कुत्तों को भगाएंगे।
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