दो साल पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिलाए थे CM राइज स्कूल, आज तक जमीन तक नहीं दे पाया शिक्षा विभाग

CM राइज स्कूलों की घोषणा दो साल पहले की गई थी, लेकिन अब तक सिर्फ कागजों में ही सीमित रह गई है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सिफारिश पर 130 स्कूलों को मंजूरी मिली थी, लेकिन कई जिलों में अभी तक इन स्कूलों के लिए जमीन का टेंडर भी नहीं हुआ है।

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Ramanand Tiwari
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मध्य प्रदेश में अच्छी शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की असलियत एक बार फिर सामने आ गई है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सिफारिश पर दो साल पहले CM राइज स्कूलों को मंजूरी मिली थी, लेकिन आज भी ये स्कूल जमीन की तलाश में हैं।

शिवपुरी जिले में हालात ये हैं कि विधायक, कलेक्टर और शिक्षा विभाग के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं। जबकि सच तो ये है कि ये स्कूल सिर्फ कागजों में ही चल रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

5 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सिफारिश पर प्रदेश में 130 CM राइज स्कूलों को मंजूरी दी गई थी। इनका उद्देश्य था कि 2023-24 से हर जिले में आधुनिक, सुविधाओं से लैस और गुणवत्तापूर्ण स्कूल शुरू किए जाएं, लेकिन दो साल हो गए। कई जिलों में आज भी जमीन का फैसला नहीं हो पाया है।

शिवपुरी में तीन CM राइज स्कूल आज भी अधर में

शिवपुरी जिले में तीन CM राइज स्कूल स्वीकृत हुए थे। इनमें पिछोर में माध्यमिक विद्यालय क्रमांक एक खनियाधाना, बामोर ग्राम पंचायत और मानपुरा माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। लेकिन आज तक किसी भी स्कूल के लिए जमीन नहीं मिल पाई।

पिछोर के विधायक प्रीतम लोधी का कहना है कि जगह देखी जा रही है और जल्द ही फाइनल कर ली जाएगी। सवाल ये है कि दो साल बाद भी जगह देखी जा रही है, तो अब तक क्या किया गया?

वहीं, शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि जगह तय हो चुकी है। PIU से बात कर लीजिए। यानी विधायक कह रहे हैं कि जगह ढूंढ रहे हैं, और कलेक्टर कह रहे हैं कि जगह तय हो गई है। वहीं, जमीन पर स्कूल का काम कहीं नजर नहीं आ रहा है।

शिक्षा विभाग के अफसरों की गोलमोल जवाबी नीति

एमपी स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों का कहना है कि वो देखकर ही कुछ बता सकेंगे। ये खुद बताता है कि विभाग को ये तक पता नहीं कि स्कूल कहां बनना है। जब जगह ही तय नहीं है, तो CM राइज स्कूल कैसे बनेगा?

द सूत्रकी जांच में ये सामने आया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा शिवपुरी जिले में स्वीकृत किए गए स्कूलों का कोई पता ही नहीं है। अभी तक न तो जमीन मिली है और न ही कोई निर्माण शुरू हुआ है।

स्कूल शिक्षा विभाग ने जो पत्र भेजा है, उसमें कहा गया है कि CM राइज स्कूलों को योजना के अनुसार काम करने की अनुमति दी गई है। सभी शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियां भी शुरू करने की इजाजत दी गई है।

दो साल बाद फिर सिंधिया को लिखना पड़ा पत्र

जब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग काम नहीं कर पाए, तो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को खुद ही दखल देना पड़ा। 15 जनवरी 2026 को उन्होंने स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को एक पत्र लिखा। इसमें कहा कि आवेदक के अनुरोध पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाए और मुझे और आवेदक को की गई कार्रवाई के बारे में बताया जाए। सवाल ये है कि जब केंद्रीय मंत्री की सिफारिश भी फाइलों में दब जाए, तो आम आदमी की सुनवाई कहां होगी?

शिक्षा मंत्री ने फोन काटा

जब स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से संपर्क किया गया, तो उनके पीए ने फोन उठाया। पीए ने कहा कि वो बात करवाएंगे, लेकिन फिर बात नहीं करवाई। जब दोबारा फोन लगाया गया, तो उन्होंने बताया कि मंत्री जी रामपुर के कार्यक्रम में व्यस्त हैं।

जैसे ही CM राइज स्कूल का मुद्दा उठाया गया, फोन काट दिया गया। इस रवैये से साफ जाहिर होता है कि मंत्री इस गंभीर मामले को लेकर कितने संवेदनशील हैं।

आंकड़ों में सच

130 CM राइज स्कूल स्वीकृत लेकिन कई स्कूलों के टेंडर अब तक नहीं हुए है। कई जगह निर्माण गुणवत्ता पर सवाल है। कई जिलों में जमीन तक उपलब्ध नहीं है।

शिक्षा विभाग के दावे बनाम हकीकत

खोखले दावे, कागजी आंकड़े और शून्य जमीनी काम, ये सब पिछोर के सबसे बड़े विवादित मामले हैं। पहले पिछोर के लिए स्कूल स्वीकृत हुआ था, लेकिन बाद में उसे गणेशखेड़ा (25 किमी दूर) शिफ्ट कर दिया गया।

हालांकि, स्कूल आज भी पिछोर के नाम से ही दर्ज है। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फिर तीन नए CM राइज स्कूल स्वीकृत कराए, लेकिन पिछोर का स्कूल अभी भी जमीन के इंतजार में है।

युवा मोर्चा नेता का दर्द: दो साल से सिर्फ इंतजार

इस पूरे मामले पर जब भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला कार्यसमिति सदस्य नीरज पारासर से बात की गई, तो उन्होंने अपनी गहरी नाराजगी और दुख जताया। उन्होंने कहा, "मैं बहुत दुखी हूं।

दो साल पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने CM राइज स्कूल स्वीकृत कराए थे। आज तक उन स्कूलों के लिए न तो जमीन मिली है और न ही किसी स्तर पर कोई ठोस कदम उठाया गया है। मजबूरी में मुझे फिर से सिंधिया जी को पत्र लिखना पड़ा, ताकि कम से कम इस मामले में कोई कार्रवाई हो सके।"

यह बयान साफ बताता है कि समस्या सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति की भी कमी है। केंद्रीय मंत्री की सिफारिश, मुख्यमंत्री की योजना, और विभागीय स्वीकृति सब कुछ मौजूद है, लेकिन न तो इच्छाशक्ति है और न ही जवाबदेही। सवाल यही है कि जब CM राइज स्कूल भी दो साल में जमीन नहीं पा सके, तो प्रदेश में शिक्षा सुधार के जो दावे किए जा रहे हैं, उनका भरोसा किस पर किया जा सकता है?

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