दिग्विजय के आरोपों पर सिंधिया बोले- चित्त भी मेरी-पट भी मेरी, नहीं चलेगा

दिग्विजय सिंह के एसआईआर मामले में लगाए आरोपों पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने पलटवार किया है। कांग्रेस के अशोक सिंह ने भी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

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Sanjay Dhiman
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Scindia said on Digvijay allegations that even my mind and heart will not work for me.

Photograph: (the sootr)

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Gwalior. मध्यप्रदेश में एसआईआर को लेकर फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एसआईआर (special intensive revision 2025) प्रक्रिया को लेकर भाजपा और बीएलओ पर आरोप लगाए।

दिग्विजय सिंह के आरोपों के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सोच अब नहीं चलने वाली। उन्होंने कहा कि चित भी मेरी-पट भी मेरी अब नहीं चलेगा। सिंधिया का यह बयान चुनावी राजनीति और सत्ता में बैठे लोगों को लेकर था।

एक्स पर यह पोस्ट की थी दिग्विजय सिंह ने

दिग्विजय सिंह ने एसआईआर प्रक्रिया में भाजपा के खिलाफ आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा कि भाजपा, समर्थकों के माध्यम से कांग्रेस समर्थक लोगों पर फॉर्म 07 के जरिए आपत्ति जताई जा रही है। इस पर जब सिंधिया से सवाल किया गया, तो उन्होंने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय जी चाहते हैं कि हर चुनाव में वही जीतें, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। जनता का मत, जनता की सोच और उनके विचार सबसे महत्वपूर्ण हैं। हमें अपने लोकतंत्र पर गर्व करना चाहिए।

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कांग्रेस नेताओं ने किया समर्थन

दिग्विजय सिंह के बयान का समर्थन करते हुए कांग्रेस से राज्यसभा सांसद अशोक सिंह ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने सही कहा है। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के बीच भी संदेह उत्पन्न हो चुका है।

राहुल गांधी सहित पूरी पार्टी ने इसे वोट चोरी करार दिया था। अशोक सिंह ने कहा कि अब इस पर पूरी प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। कांग्रेस एसआईआर पर अपनी निगाह बनाए रखे हुए है। वह यह देख रही है कि प्रक्रिया के बाद क्या स्थिति सामने आती है।

सियासी घमासान

इस मुद्दे ने मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। दिग्विजय सिंह का आरोप और सिंधिया का पलटवार दोनों ही पक्षों के बीच घमासान को और बढ़ा रहे हैं। चुनावों में हार और जीत की राजनीति पर अब से ज्यादा सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां एक तरफ दिग्विजय सिंह अपनी बात पर कायम हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी तीखा पलटवार कर मामले को राजनैतिक रंग दे दिया है।  

लोकतंत्र और हार-जीत का खेल

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह लड़ाई सिर्फ फॉर्म 07 तक सीमित नहीं है। यह आने वाले चुनावों के लिए जमीन तैयार करने की एक बड़ी राजनीतिक कोशिश है। बीजेपी इसे अपनी चुनावी तैयारी बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे धांधली कह रही है।

सिंधिया ने अपने बयान में बार-बार जनता के मत और सोच का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि हार स्वीकार करने का साहस दिग्विजय सिंह को अपने अंदर लाना चाहिए। फिलहाल, ग्वालियर की राजनीति में इस समय सिर्फ SIR प्रक्रिया की ही चर्चा हो रही है।

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SIR प्रक्रिया में फॉर्म 07 का पूरा गणित समझिए

आम लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर फॉर्म 07 का क्या मतलब है। यह फॉर्म मतदाता सूची से नाम कटवाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करने के लिए होता है। दिग्विजय सिंह का दावा है कि बीजेपी इसका गलत इस्तेमाल कर कांग्रेस वोटर्स को टारगेट कर रही है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक यह एक रूटीन सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस सियासी दबाव के बीच अपनी पारदर्शिता कैसे बनाए रखता है। आने वाले दिनों में यह विवाद और भी ज्यादा गहराने की पूरी उम्मीद है।

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