मुआवजा देने से बचने के लिए कलेक्टर ने दिया यूनिसेफ का तालाब तोड़ने का आदेश
Jitendra Shrivastava | Jun 08, 2024, 20:40 IST
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मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में किसानों को सिंचाई के लिए मदद और पर्यावरण की रक्षा के लिए यूनिसेफ के द्वारा बनवाए गए तालाब को कलेक्टर इस कारण से तुड़वा रहे थे इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कलेक्टर ने क्यों दिया था ऐसा आदेश, पढ़िए...
नील तिवारी, JABALPUR. किसानों की जमीन पर यूनिसेफ के द्वारा बनवाए गए तालाब से किसानों को सिंचाई का लाभ तो मिल रहा था पर उस जमीन का मुआवजा उन्हें नहीं मिला था। जिसके कारण उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की, पर इस मुआवजे से बचने के लिए सीहोर के जिला कलेक्टर ने बिना किसी लिखित आदेश के तालाब को तुड़वाना शुरू कर दिया। इसके खिलाफ 16 किसानों ने हाईकोर्ट की शरण ली है।
सीहोर जिले के कड़ी गांव में साल 2002-03 में एक तालाब बनवाया गया था। यूनिसेफ का तालाब ( UNICEF pond ) के निर्माण में पूरा फंड यूनिसेफ संस्था के द्वारा दिया गया था। इस तालाब को बनवाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और गांव के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था। जिस जमीन में यह तालाब बना था वह जमीन किसानों की थी जिसके लिए उन्हें मुआवजा दिया जाना था। पर मुआवजा न मिलने पर किसानों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई में साल 2012 में ही हाईकोर्ट ने जिला कलेक्टर को यह आदेश दिए थे कि किसानों को मुआवजा दिया जाए।
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कलेक्टर बिना बताए बार-बार भाग जाते हैं पत्नी के पास, पूर्व विधायक ने लगाए आरोप
साल 2012 में जारी हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला और उन्होंने दोबारा इस मामले में एक रिट पिटीशन दायर की इसके बाद साल 2022 में सीहोर कलेक्टर को नोटिस भी इशू किया गया। कोर्ट का आदेश मानते हुए किसानों को मुआवजा देने की बजाय सीहोर जिला कलेक्टर ने बिना किसी लिखित आदेश के इस तालाब को तुड़वाना शुरू कर दिया। याचिककर्ता किसानों का आरोप है कि कलेक्टर ने मुआवजा देने से बचने के लिए इस तालाब को ही खत्म करने की कार्यवाही शुरू कर दी है।
सीहोर जिले के खड़ी गांव के किसान लक्ष्मी नारायण सहित 16 किसानों की ओर से अधिवक्ता एन. एस. रूपराह ने उच्च न्यायालय में दोबारा एक याचिका दायर की। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में वेकेशन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई जिसमें जस्टिस विवेक जैन ने यूनिसेफ प्रोजेक्ट में बनाए जा रहे तालाब को तोड़ने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश शासन एवं सीहोर जिला कलेक्टर सहित अन्य प्रतिवादियों को हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए गए। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
ये है पूरा मामला
सीहोर जिले के कड़ी गांव में साल 2002-03 में एक तालाब बनवाया गया था। यूनिसेफ का तालाब ( UNICEF pond ) के निर्माण में पूरा फंड यूनिसेफ संस्था के द्वारा दिया गया था। इस तालाब को बनवाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और गांव के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था। जिस जमीन में यह तालाब बना था वह जमीन किसानों की थी जिसके लिए उन्हें मुआवजा दिया जाना था। पर मुआवजा न मिलने पर किसानों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई में साल 2012 में ही हाईकोर्ट ने जिला कलेक्टर को यह आदेश दिए थे कि किसानों को मुआवजा दिया जाए।
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हाईकोर्ट का आदेश मानने की बजाय कलेक्टर तुड़वा रहे थे तालाब
साल 2012 में जारी हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला और उन्होंने दोबारा इस मामले में एक रिट पिटीशन दायर की इसके बाद साल 2022 में सीहोर कलेक्टर को नोटिस भी इशू किया गया। कोर्ट का आदेश मानते हुए किसानों को मुआवजा देने की बजाय सीहोर जिला कलेक्टर ने बिना किसी लिखित आदेश के इस तालाब को तुड़वाना शुरू कर दिया। याचिककर्ता किसानों का आरोप है कि कलेक्टर ने मुआवजा देने से बचने के लिए इस तालाब को ही खत्म करने की कार्यवाही शुरू कर दी है।
नहीं टूटेगा यूनिसेफ प्रोजेक्ट में बना तालाबः हाईकोर्ट
सीहोर जिले के खड़ी गांव के किसान लक्ष्मी नारायण सहित 16 किसानों की ओर से अधिवक्ता एन. एस. रूपराह ने उच्च न्यायालय में दोबारा एक याचिका दायर की। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में वेकेशन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई जिसमें जस्टिस विवेक जैन ने यूनिसेफ प्रोजेक्ट में बनाए जा रहे तालाब को तोड़ने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश शासन एवं सीहोर जिला कलेक्टर सहित अन्य प्रतिवादियों को हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए गए। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
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