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BHOPAL. विदा होते साल के आखिरी दिनों में शिक्षक फिर आंदोलन पर उतर आए हैं। शिक्षकों ने सरकारी व्यवस्था और अव्यवहारिक नीतियों पर नाराजगी जताते हुए धरना दिया। प्रदेश के शिक्षकों ने अनुकंपा नियुक्ति, पुरानी पेंशन और अतिथि शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर अंबेडकर पार्क में प्रदर्शन किया।
शिक्षकों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग की अनदेखी पर नाराजगी जताई। उन्होंने समस्याओं का समाधान न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। राज्य शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम मांग पत्र सौंपा।
राज्य शिक्षक संघ के आव्हान पर गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से नियमित शिक्षक और अतिथि भोपाल पहुंचे थे। शिक्षकों ने अंबेडकर पार्क में सालों से लंबित बुनियादी मांगों पर सरकार की बेरुखी पर नाराजगी जताई।
शिक्षक संघ अध्यक्ष जगदीश यादव ने धरना स्थल पर शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए संसाधनों में बदलाव कर रही है। नए स्कूल भवन बन रहे हैं, छात्रों को सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन शिक्षकों की हालत खराब है। इस पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है।
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शिक्षकों को चोर समझ रही सरकार
शिक्षक सरकार द्वारा लागू की गई ई अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर भी नाराज दिखे। धरना स्थल पर प्रदेश भर से जमा हुए शिक्षकों का कहना था वे ई-अटेंडेंस का विरोध नहीं करते। शिक्षकों द्वारा ई अटेंडेंस का विरोध करने की अफवाह उड़ाई जा रही है।
शिक्षकों का विरोध केवल तकनीकी समस्याओं को लेकर है। जिन स्थानों पर जीपीएस या नेटवर्क संबंधी समस्या है केवल उनकी बात वे उठा रहे हैं। मोबाइल एप्लिकेशन में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए शिक्षक साल भर से मांग कर रहे हैं। लेकिन सुधार की बजाय अधिकारी शिक्षकों को बेईमान और चोर बता रहे हैं। यह शिक्षकों के लिए अपमानजनक है।
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अनुकंपा नियुक्ति और पुरानी पेंशन दो
राज्य शिक्षक संघ के आव्हान पर शिक्षकों ने अंबेडकर पार्क में प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार से पुरानी पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति की फिर शुरुआत की मांग की। शिक्षकों का कहना है कि जीवनभर बच्चों को पढ़ाने के बाद उनके पास कोई साधन नहीं बचता।
दूसरे काम करने के लिए समय नहीं मिलता, क्योंकि वे स्कूल आने-जाने और पढ़ाने में व्यस्त रहते हैं। शिक्षा विभाग का रवैया अनुकंपा नियुक्ति के पुराने मामलों में लचर है। कई परिवार सालों से अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं। शिक्षकों की बुनियादी मांगों को अनसुना किया जा रहा है।
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