बीजेपी की गाड़ी में कांग्रेस नेताओं की वेटिंग, ढाई साल में भी सीट नहीं क्लियर

Sanjay Sharma | Jun 22, 2026, 21:15 IST
Share
कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए नेता
कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए नेता

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए कई बड़े नेताओं का पुनर्वास अब भी अटका है। ढाई साल बीत जाने के बाद भी इन्हें कोई पद नहीं मिला। सुरेश पचौरी, दीपक सक्सेना जैसे नेता गुमनामी में हैं।

BHOPAL. लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी की न्यू ज्वाइनिंग टोली ने कांग्रेस के जिन पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और बड़े नेता को पार्टी में शामिल किया था उन्हें अब भी पूनर्वास का इंतजार है। बीजेपी में शामिल हुए इन नेताओं की लोकसभा चुनाव के पार्टी में पूछपरख ही नहीं हो रही। इनमें से ज्यादातर नेताओं की राजनीतिक गतिविधियां ही लगभग शून्य हो चुकी हैं। जबकि इन नेताओं को बीजेपी सरकार में बड़ा ओहदा या मलाईदार पद मिलने की उम्मीद थी। इसी अभिलाषा को पूरा करने की चाह में ही उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था।

कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए दर्जनभर विधायक और कुछ पूर्व सांसदों के अलावा जिला पंचायत, जनपद पंचायत सहित प्रदेश और जिला कांग्रेस संगठन के नेताओं की लंबी फेहरिस्त है। मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार आधा सफर यानी ढाई साल पूरे कर चुकी है। वहीं कांग्रेस छोड़ने वाले इन नेताओं को इस सफर में शामिल होने का मौका ही नहीं मिल पाया है।

नरोत्तम मिश्रा के हाथ में थी कमान

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्षी दलों से नेताओं को तोड़कर लाने के लिए अलग प्रकोष्ठ बनाया था। न्यू ज्वाइनिंग टोली के नाम से बनी इस इकाई की कमान मध्य प्रदेश में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के हाथ में थी। न्यू ज्वाइनिंग टोली ने चुनावी हलचल के बीच राजधानी भोपाल से लेकर प्रदेश के हर जिले में कांग्रेस संगठन से नेताओं को तोड़कर बीजेपी की सदस्यता दिलाई थी। इस इकाई के काम ने कांग्रेस संगठन को भी मुश्किल में डाल दिया था। बीजेपी ने चुनाव के दौरान एक लाख से ज्यादा कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल करने का दावा भी किया था।

सांसद, विधायक, मंत्री रहे नेताओं ने थामा बीजेपी का हाथ

न्यू ज्वाइनिंग टोली ने कांग्रेस के कई दिग्गज और कई बार विधायक, सांसद और मंत्री रहे नेताओं को भी बीजेपी में शामिल कराया था। इस फेहरिस्त में कांग्रेस संगठन के राजधानी से लेकर जिला और ब्लॉक इकाइयों के पदाधिकारियों के नाम भी शामिल थे। पूर्व विधायक, सांसद और बड़े नेता बीजेपी में अपने कद और अहमियत को दिखाने के लिए सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को लेकर पहुंचे थे।

बड़ा पद पाने की ख्वाहिश नहीं हुई पूरी

नेताजी को बीजेपी में शामिल होने और चुनाव के बाद सरकार, निगम मंडल या संगठन में अहम पद मिलने की आस थी। कार्यकर्ता भी इसी प्रलोभन में नेताजी के साथ कांग्रेस छोड़ गए थे। अब बीजेपी में न तो इन नेताओं की पूछ हो रही है न ही कार्यकर्ताओं को कोई पहचान रहा है। चुनाव के बाद लंबे अरसे तक बीजेपी में कोई तवज्जो नहीं मिलने से कुछ नेता और उनके समर्थक कांग्रेस में वापसी कर चुके हैं।

सुरेश पचौरी अब भी हाशिये पर

सुरेश पचौरी
सुरेश पचौरी


कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं में सबसे बड़ा चेहरा पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे सुरेश पचौरी का है। पचौरी ने कांग्रेस पर राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण ठुकराने का आरोप लगाकर बीजेपी की सदस्यता ली थी। पचौरी के साथ उनके कुछ अनुयायी भी गए थे। पचौरी को उनके कद के अनुरूप बीजेपी में अब तक कोई पद नहीं मिला है। पार्टी के प्रमुख आयोजन, संगठन की बैठकों में भी उनकी उपस्थिति लगभग शून्य है।

कमलनाथ के करीबी रहे दीपक सक्सेना तलाश रहे वजूद

दीपक सक्सेना
दीपक सक्सेना


कमलनाथ के सबसे करीबी और छिंदवाड़ा के पूर्व विधायक दीपक सक्सेना भी लोकसभा चुनाव के बाद से बीजेपी में अपना वजूद तलाश रहे हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और नाथ को झटका देने वाले सक्सेना को दो साल बाद भी बीजेपी ने उपकृत नहीं किया है। उन्हें भी संगठन या सत्ता में किसी तरह की भागीदार नहीं दी गई है। कांग्रेस छोड़ने और बीजेपी नेताओं द्वारा पूछपरछ न करने से उनकी सक्रियता कम हो गई है।

पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे भी गुमनाम

अरुणोदय चौबे
अरुणोदय चौबे


बुंदेलखंड अंचल की खुरई विधानसभा के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे भी बीजेपी में शामिल होने के बाद गुमनामी झेल रहे हैं। न्यू ज्वाइनिंग टोली के आमंत्रण पर बीजेपी में शामिल होने के बाद अब उन्हें स्थानीय प्रतिद्वंद्विता का सामना भी करना पड़ रहा है। सरकार और संगठन में उनकी सुनवाई नहीं हो रही और क्षेत्रीय विधायक भूपेन्द्र सिंह के विरोध के चलते स्थानीय कार्यकर्ता भी उन्हें तवज्जो नहीं दे रहे हैं।

शिवपुरी में हरिवल्लभ शुक्ला की पकड़ हुई ढीली

हरिवल्लभ शुक्ला
हरिवल्लभ शुक्ला


शिवपुरी की पोहरी विधानसभा से पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला भी अंचल के धाकड़ नेता रहे है। वे भी नरोत्तम मिश्रा की न्यू ज्वाइनिंग टोली के लुभावने वायदों का शिकार हो गए। उन्होंने जिस जोश के साथ अपने समर्थक और पार्टी नेताओं के साथ भोपाल जाकर बीजेपी की सदस्यता ली थी अब वह ठंडा पड़ गया है। बीजेपी के स्थानीय नेता, विधायकों की अनदेखी से अब शिवपुरी अंचल में उनकी धमक कमजोर पड़ गई है। उन्हें भी बीजेपी ने सत्ता- संगठन में कोई पद नहीं दिया है।

पूर्व सांसद राजूखेड़ी की सक्रियता न के बराबर

गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी
गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी


पूर्व सांसद गजेन्द्र सिंह राजूखेड़ी, धार से सांसद रह चुके हैं। 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उनका भी कांग्रेस से मोहभंग हो गया था। सरकार और चुनाव कैंपेन की चकाचौंध में आए पूर्व सांसद बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन्होंने अपनी ही सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के लिए प्रचार भी किया, लेकिन चुनाव के बाद उनके हाथ भी कुछ नहीं आया। गजेन्द्र सिंह अब बीजेपी की राजनीति के नेपथ्य में हैं और उनकी सक्रियता भी काफी कम हो गई है।

प्रदेश संगठन भी नहीं ले रहा सुध

संजय शुक्ला
संजय शुक्ला


बीजेपी सरकार के ग्लैमर और न्यू ज्वाइनिंग टोली के प्रस्ताव पर कांग्रेस छोड़ने वाले ऐसे ही पूर्व विधायक, सांसद और नेता अब अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। बीजेपी के स्थानीय नेता पुराने विरोध और प्रतिद्वंद्विता के चलते उन्हें जगह नहीं दे रहे और प्रदेश संगठन भी उनकी खबर नहीं ले रहा है। ऐसे नेताओं में इंदौर -1 से पूर्व विधायक संजय शुक्ला, देपालपुर से पूर्व विधायक विशाल पटेल, महू से पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार, इंदौर के पूर्व कांग्रेस नेता पंकज संघवी, पिपरिया से पूर्व विधायक अर्जुन पलिया, रीवा से पूर्व सांसद देवराज सिंह पटेल, नागौद से पूर्व विधायक यादवेन्द्र सिंह, विदिशा से पूर्व विधायक शशांक भार्गव, डबरा से पूर्व विधायक इमरती देवी, इंदौर लोकसभा से कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार रहे अक्षय कांति बम भी शामिल हैं।

ढाई साल से संजोए बैठे हैं सपना

इन सभी कांग्रेस नेताओं को लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाते समय कई सतरंगी सपने देखे थे। अब मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार को ढाई साल हो चुके हैं। ये नेता सरकार के साथ सफर का इंतजार कर रहे हैं लेकिन पहले से ही सत्ता और संगठन में पदों की कतार में लगे बीजेपी नेताओं के कारण उन्हें जगह ही नहीं मिल पाई है। इनमें से कई नेताओं ने तो अब हताशा के कारण अपने क्षेत्र में ही सक्रियता कम कर दी है। पुनर्वास की आस लगाए इन पूर्व कांग्रेसियों को सत्ता और संगठन की गाड़ी में सीट मिलेगी या ऐसे ही उनका टिकट वेटिंग में रहेगा।

ये खबरें भी पढ़ें...

सड़क नहीं बनी तो भड़के ग्रामीण, बीजेपी विधायक ओमप्रकाश सखलेचा को खदेड़ा

घर बैठे हैं बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस नेता, बस एक को मिली सांसदी

कांग्रेस कचरे की तरह हो रही साफ, ग्रीन फील्ड कॉरिडोर भूमिपूजन में बोले सीएम

राज्यसभा चुनाव ने टाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान, आखिर किसके साथ हैं निर्मला सप्रे?

Tags:
  • कमलनाथ
  • कांग्रेस
  • बीजेपी
  • संजय शुक्ला
  • सुरेश पचौरी
  • इमरती देवी
  • पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे
  • दीपक सक्सेना
  • हरिवल्लभ शुक्ला
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा