इंदौर में कांग्रेस विधायक जीतू के भाई नाना को जेल में ही रखने के लिए उतरी सरकारी वकीलों की फौज, लेकिन 30 घंटे में ही छूटे
Jitendra Shrivastava | Nov 03, 2023, 24:00 IST
इंदौर में कांग्रेस विधायक जीतू के भाई नाना को जेल में ही रखने के लिए उतरी सरकारी वकीलों की फौज, लेकिन 30 घंटे में ही छूटे
जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी को गुरुवार दोपहर में जेल भेज गया था, लेकिन 30 घंटे में ही वह शुक्रवार शाम को बाहर आ गए।
संजय गुप्ता, INDORE. विधानसभा चुनाव की वोटिंग के 15 दिन पहले कांग्रेस के राउ विधायक जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी को गुरुवार दोपहर में जेल भेज गया था लेकिन 30 घंटे में ही वह शुक्रवार शाम को जेल से बाहर आ गए। इस मामले में कुल 17 आरोपी थे जिसमें से 11 गिरफ्तार हुए थे, इन सभी की जमानत हो गई है। साल 2017 के किसान आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ केस दर्ज हुए थे। इस मामले में दो स्थाई वारंट जारी थे।
निजी व्यक्ति ने आपत्ति ली, आठ सरकारी वकील उतरे
इस गिरफ्तारी के बाद मामला कानूनी होने जगह राजनीतिक अखाड़ा अधिक बन गया। शुक्रवार दोपहर में जमानत के लिए सुनवाई हुई तो इसमें एक-दो नहीं आठ सरकारी वकील खड़े हो गए और उन्होंने जमानत पर आपत्ति ली। निजी व्यक्ति द्वारा इसमें नाना की गिरफ्तारी पर आपत्ति बिना शपथ पत्र के लगाई गई। सरकारी वकील द्वार कहा गया कि पुलिस को इस मामले में जब्ती करना है और पूछताछ करना है इसलिए जमान नहीं दी जाए।
निजी व्यक्ति कैस ले रहा आपत्ति, पुलिस ने ही रिमांड नहीं मांगी
लेकिन नाना पटवारी की ओर से वकील जय हार्डिया ने तर्क दिए कि जब सरकारी काम में बाधा का केस तो फिर निजी व्यक्ति आपत्ति कैसे ले सकता है? खुद फरियादी (जो पुलिस थी) उनके द्वारा ही आपत्ति नहीं ली गई है। साथ ही यदि पुलिस को उनसे कोई जब्ती करना या पूछताछ करना होती तो फिर पुलिस रिमांड मांगी, लेकिन पुलिस ने रिमांड मांगी ही नहीं और उन्हें जेल भेजा गया, यानि पुलिस को इसमें अभी आगे उनकी जरूरत ही नहीं है। इन सभी तर्कों के आधार पर कोर्ट ने नाना सहित अन्य आरोपियों की 25-25 हजार की राशि पर जमानत राशि पर जमानत मंजूर कर ली।
नाना पर एक-दो नहीं, भाई की विधानसभा थाने में ही सात केस
नाना पटवारी पर साल 2012 से लेकर 2018 के बीच में राजेंद्र नगर थाने में (जो राउ विधानसभा क्षेत्र में आता है) गंभीर धाराओं में सात अपराध दर्ज है। एडिशनल क्राइम डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि साल 2017 के किसान आंदोलन में यह स्थाई वारंट जारी था। राजेंद्र नगर थाने में यह खुद पेश हुए थे, जहां से गिरफ्तार कर कोर्ट भेजा गया, वहां से जेल भेजा गया। स्थाई वारंट तामील कराया गया था।
यह है नाना पर अपराध दर्ज- इसमें 2017 में दर्ज केस को लेकर दो स्थाई वारंट थे...
निजी व्यक्ति ने आपत्ति ली, आठ सरकारी वकील उतरे
इस गिरफ्तारी के बाद मामला कानूनी होने जगह राजनीतिक अखाड़ा अधिक बन गया। शुक्रवार दोपहर में जमानत के लिए सुनवाई हुई तो इसमें एक-दो नहीं आठ सरकारी वकील खड़े हो गए और उन्होंने जमानत पर आपत्ति ली। निजी व्यक्ति द्वारा इसमें नाना की गिरफ्तारी पर आपत्ति बिना शपथ पत्र के लगाई गई। सरकारी वकील द्वार कहा गया कि पुलिस को इस मामले में जब्ती करना है और पूछताछ करना है इसलिए जमान नहीं दी जाए।
निजी व्यक्ति कैस ले रहा आपत्ति, पुलिस ने ही रिमांड नहीं मांगी
लेकिन नाना पटवारी की ओर से वकील जय हार्डिया ने तर्क दिए कि जब सरकारी काम में बाधा का केस तो फिर निजी व्यक्ति आपत्ति कैसे ले सकता है? खुद फरियादी (जो पुलिस थी) उनके द्वारा ही आपत्ति नहीं ली गई है। साथ ही यदि पुलिस को उनसे कोई जब्ती करना या पूछताछ करना होती तो फिर पुलिस रिमांड मांगी, लेकिन पुलिस ने रिमांड मांगी ही नहीं और उन्हें जेल भेजा गया, यानि पुलिस को इसमें अभी आगे उनकी जरूरत ही नहीं है। इन सभी तर्कों के आधार पर कोर्ट ने नाना सहित अन्य आरोपियों की 25-25 हजार की राशि पर जमानत राशि पर जमानत मंजूर कर ली।
नाना पर एक-दो नहीं, भाई की विधानसभा थाने में ही सात केस
नाना पटवारी पर साल 2012 से लेकर 2018 के बीच में राजेंद्र नगर थाने में (जो राउ विधानसभा क्षेत्र में आता है) गंभीर धाराओं में सात अपराध दर्ज है। एडिशनल क्राइम डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि साल 2017 के किसान आंदोलन में यह स्थाई वारंट जारी था। राजेंद्र नगर थाने में यह खुद पेश हुए थे, जहां से गिरफ्तार कर कोर्ट भेजा गया, वहां से जेल भेजा गया। स्थाई वारंट तामील कराया गया था।
यह है नाना पर अपराध दर्ज- इसमें 2017 में दर्ज केस को लेकर दो स्थाई वारंट थे...
- अपराध क्रमांक 632/12- आईपीसी 341 और 147
- अपराध क्रमांक 91/15- आईपीसी 323,294,506,34, 336
- अपराध क्रमांक 312/17- आईपीसी 147, 148, 149, 307, 332, 353, 435
- अपराध क्रमांक 313/17- आईपीसी 147, 148, 149,336, 341
- अपराध क्रमांक 314/17- आईपीसी 147, 148, 149, 323, 336, 341, 346, 506
- अपराध क्रमांक 316/17- आईपीसी 147, 148, 307, 325, 332, 353
- अपराध क्रमांक 782/18- आईपीसी 147, 148, 149, 294, 323, 354 (क), 353 ए, 452स 506
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