MP में आदिवासियों के सहारे सत्ता वापसी की तैयारी, कांग्रेस का 101 सीटों पर फोकस
Amresh Kushwaha | May 31, 2026, 09:26 IST
congress tribal vote bank mission 2028-mp
मध्य प्रदेश में मिशन 2028 के लिए कांग्रेस ने आदिवासी वोट बैंक को साधने की बड़ी रणनीति तैयार की है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई है। इसमें 101 सीटों पर फोकस तय किया गया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- MP में 230 विधानसभा सीटों में से 101 पर आदिवासी वोटरों का सीधा असर है।
- कांग्रेस ने ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में मिशन 2028 का रोडमैप तैयार किया है।
- PCC चीफ जीतू पटवारी ने 25 साल में 1.26 लाख हेक्टेयर जमीन बेचने का आरोप लगाया है।
- बड़े नेताओं को सिर्फ अपनी सीट तक नहीं, आसपास की सीटों पर भी काम करने को कहा है।
- MP देश का सबसे बड़ा आदिवासी राज्य है, जहां करीब 1 करोड़ 95 लाख वोटर इसी वर्ग से हैं।
आदिवासी वोट से बनती है MP में सरकार
बैठक में एक दिलचस्प बात सामने आई। हर बार जब भी कांग्रेस को आदिवासी वोट मिले, पार्टी ने सत्ता हासिल की। और जब ये वोट छिटके, कांग्रेस हारी। 47 में से 30 सीटें जीतने पर सरकार बनी, यही समीकरण अब कांग्रेस को फिर से साधना है।
101 सीटों का गणित क्यों अहम?
इसके अलावा 54 सामान्य सीटें भी हैं, जहां आदिवासी मतदाता 16 से 39 फीसदी तक हैं। ये किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना किसी भी पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है।
पटवारी का BJP पर सीधा हमला
सिंगरौली, उमरिया, झाबुआ, रतलाम, धार, पन्ना और छतरपुर में आदिवासियों की जमीन का अंधाधुंध अधिग्रहण हो रहा है। पटवारी ने यह भी कहा कि सिंगरौली में कॉर्पोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है। जल, जंगल और जमीन के असली मालिक आदिवासी हैं। कांग्रेस इसके खिलाफ नए सिरे से शंखनाद करेगी।
NSCR (National Sample Count Report) के आंकड़ों का हवाला देते हुए पटवारी ने कहा कि MP में सबसे ज्यादा बलात्कार आदिवासी बहनों के साथ हो रहे हैं। यह सुरक्षा का भी बड़ा मुद्दा है।
पड़ोसी सीट फॉर्मूला क्या है?
यह रणनीति इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कई आदिवासी सीटें एक-दूसरे से जुड़ी हैं। एक नेता की मेहनत कई सीटों पर असर डाल सकती है।
दिग्विजय और उमंग की केमिस्ट्री
आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों की बैठक में दिग्गजों का जमावड़ा रहा। राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, पूर्व मंत्री बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, सुखदेव पांसे, पीसी शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम भी मौजूद रहे।
तीन चेहरों पर बड़ी जिम्मेदारी
MP है सबसे बड़ा ट्राइबल स्टेट
यही वजह है कि कांग्रेस इस बार इस मुद्दे को पार्टी की मुख्य धारा से जोड़ रही है। पहले यह काम आदिवासी सेल तक सीमित था। अब पूरी पार्टी इसी दिशा में काम करेगी।
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