पार्षद जीतू यादव को महापौर ने MIC से हटाया, संभागायुक्त पार्षद पद से भी ऐसे हटा सकते हैं
Sanjay Gupta | Jan 11, 2025, 16:57 IST
Councilor Jeetu Yadav Indore Mayor removed from MIC Photograph: (thesootr)
जानकारों ने बताया कि जीतू जाटव उर्फ यादव अभी मध्यप्रदेश के इंदौर में नगर निगम पार्षद बने रहेंगे। पार्टी से निष्कासन से पार्षदी नहीं जाती है, लेकिन वह अब निर्दलीय पार्षद हो चुके हैं। वहीं पार्षद पद भी उनका जा सकता है। इसके भी एक्ट में प्रावधान...
INDORE. समर्थक गुंडों को पार्षद कालरा के घर पर भेजकर गुंडागर्दी करने वाले आदतन अपराधी जीतू यादव को बीजेपी ने 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दिल्ली से पीएम नरेंद्र मोदी की सख्ती के बाद बीजेपी जागी और यह कदम उठाया। वहीं निष्कासन के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी उन्हें एमआईसी पद से बाहर कर दिया है।
पालिक निगम एक्ट 1956 की धारा 37 के प्रावधान के तहत जीतेंद्र कुमार (जीतू) को मेयर इन काउंसिल के सदस्य पद से मुक्त किया जाता है।
जीतू यादव का इस्तीफा नामंजूर, मोदी की नाराजगी से BJP ने पार्टी से बाहर किया
जानकारों ने बताया कि जीतू जाटव उर्फ यादव अभी पार्षद बने रहेंगे। पार्टी से निष्कासन से पार्षदी नहीं जाती है। लेकिन वह अब निर्दलीय पार्षद हो चुके हैं। वहीं पार्षद पद भी उनका जा सकता है। इसके भी एक्ट में प्रावधान।
संभागीय आयुक्त को यदि लगता है कि किसी का पार्षद के रूप में बने रहना (म.प्र. अधिनियम सं. 18, 1997 द्वारा प्रतिस्थापित) की राय में, जनता या निगम के हित में वांछनीय नहीं है तो वह पार्षद पद से हटा सकता है।
(जिस तरह से गुंडागर्दी की है और जनता में आक्रोश है, उससे यह केस पार्षद पद से हटाने के लिए फिट है)
MIC मेंबर जीतू यादव की ट्रिक फेल, इधर इस्तिफा दिया उधर पार्टी ने ही निकाल दिया | पूरा मामला क्या ?
thesootr
महापौर ने पत्र में यह लिखा
जीतू यादव का इस्तीफा नामंजूर, मोदी की नाराजगी से BJP ने पार्टी से बाहर किया
अब सवाल क्या वह पार्षद रहेंगे
इस तरह जा सकती है जीतू की पार्षदी...
(जिस तरह से गुंडागर्दी की है और जनता में आक्रोश है, उससे यह केस पार्षद पद से हटाने के लिए फिट है)
MIC मेंबर जीतू यादव की ट्रिक फेल, इधर इस्तिफा दिया उधर पार्टी ने ही निकाल दिया | पूरा मामला क्या ?
-
वहीं यदि निगम ने कुल पार्षदों की कम से कम दो-तिहाई संख्या द्वारा समर्थित संकल्प द्वारा यह अनुशंसा की है कि कोई पार्षद अपने कर्तव्यों के निर्वहन में कदाचार या अपमानजनक आचरण के कारण पार्षद के रूप में बने रहने के योग्य नहीं है और इसलिए उसे हटा दिया जाना चाहिए। तो इस प्रस्ताव के आधार पर भी संभागीय आयुक्त पद से हटा सकते हैं। हालांकि इन दोनों ही स्थितियों में पार्षद को पहले कारण बताओ नोटिस जाएगा और पक्ष सुना जाएगा।
-
कोई व्यक्ति जो पार्षद नहीं रह जाता है, वह स्वतः ही निगम में अपने सभी पदों को रिक्त कर देगा, जो वह पार्षद होने के कारण धारण करता है।
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari