सीएस अशोक बर्णवाल भड़के, कलेक्टर दबाव में, पटवारी विरोध में, स्वामित्व अधिकार बंधक लोन में चार साल पहले ही आदेश

Sanjay Gupta | Oct 09, 2026, 13:58 IST
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मध्यप्रदेश सरकार स्वामित्व अधिकार अभिलेख के पंजीयन नहीं होने से मचा बवाल।
मध्यप्रदेश सरकार स्वामित्व अधिकार अभिलेख के पंजीयन नहीं होने से मचा बवाल।

Indore. मध्यप्रदेश में मुफ्त रजिस्ट्री योजना शुरू होते ही विवादों में घिर गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस योजना की शुरुआत की थी। सरकार का लक्ष्य था कि एक महीने में 50 लाख रजिस्ट्रियां हो जाएं। लेकिन पटवारी शुरू से ही इसका विरोध कर रहे हैं।

इसी वजह से अब तक एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। अब सरकार काम नहीं करने वाले पटवारियों पर कार्रवाई कर रही है। दूसरी तरफ पटवारी भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वे कलेक्टरों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और आंदोलन पर अड़े हैं।

इस बीच मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी कलेक्टरों को सख्त चेतावनी दे दी है। उन्होंने साफ कहा है कि सात दिन के अंदर पटवारियों से काम कराइए। ऐसा नहीं हुआ तो कलेक्टरों को भोपाल बुलाकर जवाब मांगा जाएगा।

अब हालत यह है कि ऊपर से कलेक्टरों पर दबाव बढ़ रहा है और नीचे पटवारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। इंदौर में भी अब तक एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई है। यानी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल पटवारियों और प्रशासन के बीच खींचतान में फंस गई है।

सरकार ने क्यों रजिस्ट्री जरूरी बताई

इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार ने सबसे अहम कारण बताया था। सरकार ने कहा था कि इससे भूधारकों के पास औपचारिक दस्तावेज होंगे और वे बैंक से लोन ले सकेंगे।

लेकिन 2102 हितग्राही ले चुके 175 करोड़ का बैंक लोन-

अब इस मामले में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मध्यप्रदेश में अधिकार अभिलेख के आधार पर अब तक दो हजार 102 लोग बैंकों से लोन ले चुके हैं। इन लोगों ने अपने दस्तावेज बैंक में गिरवी रखकर कर्ज लिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि बैंकों ने इन दस्तावेजों के आधार पर कुल 175 करोड़ 57 लाख रुपए का लोन दे दिया है। इनमें धार, इंदौर, खरगोन और नीमच समेत प्रदेश के कई जिले शामिल हैं।

2100 ले चुके 175 करोड़ लोन
2100 ले चुके 175 करोड़ लोन

सरकार तो चार साल पहले बैंकों को दे चुकी आदेश

अब इस मामले में एक और बड़ा खुलासा देखिए। दरअसल मध्यप्रदेश के गांवों में जो लोग सालों से सरकारी जमीन पर काबिज हैं, उन्हें साल 2022 में अधिकार अभिलेख के दस्तावेज दिए गए थे। यानी जिस जमीन पर उनका कब्जा था, उसके पट्टे दे दिए गए थे। इन दस्तावेजों में जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज है।

इतना ही नहीं, इन दस्तावेजों के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में भी जमीन संबंधित व्यक्ति के नाम पर दर्ज कर दी गई है। यानी जो जमीन पहले सरकारी रिकॉर्ड में थी, उस पर अब अधिकार अभिलेख धारक का नाम भी चढ़ गया है।

इस मामले में 13 अप्रैल 2022 को तत्कालीन भू-अभिलेख आयुक्त श्रीमन शुक्ल ने एक आदेश भी जारी किया था। यह आदेश राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के सभी समन्वयकों और महाप्रबंधकों को भेजा गया था। इसमें अधिकार अभिलेख के आधार पर बैंक लोन देने को लेकर बैंकों ने जो सवाल उठाए थे, उनका जवाब देकर स्थिति साफ की गई थी। इसमें साफ लिखा था कि:

  • अधिकार अभिलेख में भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 107 के तहत ग्राम आबादी का नक्शा तैयार किया गया है। साथ ही, इसमें चतुर्सीमा भी तय की गई है।
  • कब्जाधारक सालों से काबिज हैं और इसी आधार पर अधिकार अभिलेख बने हैं और इसमें धारण की तिथि अंकित होना जरूरी नहीं है।
  • इस भूखंड पर गृह निर्माण के लिए निवेश एरिया में टीएंडसीपी से मंजूरी और बाहर के लिए पंचायत से मंजूरी लेनी होगी।
  • इसमें अलग से डायवर्सन की जरूरत नहीं है। यह आवासीय उपयोग के हैं।
  • प्रॉपर्टी को बंधक करने पर बैंक उसी तरह चार्ज लेगा जैसे कि कृषि जमीन के बंधक के लिए करता है।
  • यदि धारक बैंक लोन नहीं चुका पाता है तो उस पर भी सरफेसी एक्ट लागू होगा यानी बैंक उसे कुर्क कर सकेंगे।
  • भूखंड का हस्तांतरण किया जा सकता है। इनकी दर गाइडलाइन से ही तय होगी।
  • अधिकार अभिलेख पहली बार दिए गए हैं इसलिए बैंकों को इसके पहले के क्रय-विक्रय की सर्च करने की जरूरत नहीं है।
बैंक में बंधक रख अभी भी होते हैं लोन
बैंक में बंधक रख अभी भी होते हैं लोन

राजस्व विभाग से भी हुए थे 2021 में ये आदेश

इसी तरह राजस्व विभाग के तत्कालीन सचिव ज्ञानेश्वर बी पाटिल ने 27 मार्च 2021 को भी आदेश जारी किए थे। इसमें कहा था कि बैंकों को लोन देने के लिए केवल खसरे में की गई इंट्री ही पर्याप्त है। इसके लिए डायवर्सन की मांग नहीं की जाएगी। इस संबंध में सभी बैंकों को निर्देश दिए जाएं जिससे नागरिकों को आसानी से लोन मिल सके।

राजस्व विभाग का 2021 का आदेश
राजस्व विभाग का 2021 का आदेश

फिर रजिस्ट्री की योजना क्यों

अब इस पूरे मामले में एक और बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। आमतौर पर जमीन खरीदने के बाद पहले उसकी रजिस्ट्री होती है। इसके बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होती है। यानी राजस्व रिकॉर्ड में जमीन के संबंधित सर्वे नंबर पर खरीदार का नाम चढ़ता है।

वहीं, अधिकार अभिलेख के मामले में तस्वीर कुछ अलग है। यहां साल 2022 से 2025 के बीच ही लोगों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो चुके हैं। पटवारियों ने पहले रिपोर्ट तैयार की कि कौन व्यक्ति कहां और कब से काबिज है। इसके बाद जमीन की सीमाएं तय की गईं है। फिर संबंधित लोगों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हैं। इसी आधार पर उन्हें अधिकार अभिलेख भी दे दिए गए हैं।

अब सवाल यह है कि जब राजस्व रिकॉर्ड में नाम पहले ही चढ़ चुके हैं, तो सरकार दोबारा रजिस्ट्री क्यों करा रही है? सरकार का तर्क है कि इससे लोगों को बैंक लोन लेने में आसानी होगी। वहीं, हकीकत यह है कि अधिकार अभिलेख के आधार पर लोग पहले से ही बैंक लोन ले रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी इस संबंध में बैंकर्स कमेटी को साल 2022 में ही आदेश जारी कर चुकी है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब जमीन के दस्तावेज मौजूद हैं, राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज हैं और बैंक लोन भी मिल रहा है, तो अब मुफ्त रजिस्ट्री कराने की जरूरत क्यों पड़ी?

इन सभी बातों को देखें तो यह योजना सिर्फ जमीन की रजिस्ट्री तक सीमित नहीं दिखती। इसके पीछे राजनीतिक मकसद होने का सवाल भी उठ रहा है। प्रदेश के करीब 50 लाख घरों तक पहुंचने की कोशिश के तौर पर भी इस योजना को देखा जा सकता है।

शासन का 2022 का बैंको को आदेश-1
शासन का 2022 का बैंको को आदेश-1

पटवारी क्यों कर रहे विरोध

पटवारियों को इस योजना के तहत रजिस्ट्री के लिए डीड तैयार करनी है। भू धारक इसके लिए आवेदन करेगा और पूरी डीड पटवारी तय करेगा। फिर वह आगे बढ़ाएगा जिसमें नायब तहसीलदार/तहसीलदार पंजीयन करेंगे। पटवारियों को इसमें शासकीय जमीन विक्रेता के रूप में बताया गया है और भू धारक को इसमें क्रेता बताया गया है।

पटवारियों का कहना है कि वह विक्रेता के रूप में कैसे हो सकते हैं, वह भी सरकारी जमीन पर। ऐसे में कल कोई भी कोर्ट केस होगा तो वह इसमें पक्षकार बनेंगे। वह विक्रेता के रूप में इस योजना में नहीं आना चाहते हैं। मुख्य विवाद इसी बात को लेकर है।

शासन का 2022 का बैंको को आदेश-2
शासन का 2022 का बैंको को आदेश-2

जिले के कलेक्टरों ने भी उठाया था यही मुद्दा

यह मुद्दा गुरुवार, 08 अक्टूबर की शाम को सीएस बर्णवाल की वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी उठा है। इसमें मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ ने पूछा कि अधिकार अभिलेख तो पहले से हैं फिर पंजीयन की जरूरत क्यों है? इसी तरह इंदौर संभागायुक्त भास्कर लाक्षकार ने कहा कि मामला सिविल कोर्ट में जाएगा तो क्या होगा? मंदसौर कलेक्टर दिव्यांक सिंह ने भी पूछा कि सिविल कोर्ट का इश्यू बन सकता है, क्योंकि रजिस्ट्री पटवारी करने वाला है। वहीं मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्व की धारा 57 व 117 में सब साफ है। सात दिन में सभी कलेक्टर इस काम को लेकर प्रगति दिखाएं।

अभी तक कितने पटवारियों पर कार्रवाई

उधर सरकार पटवारियों को लेकर सख्ती के मूड में है। सीएस इस बात से खफा हैं कि पटवारी कलेक्टर के खिलाफ कैसे नारेबाजी कर सकते हैं। अभी तक मध्यप्रदेश में 3430 पटवारियों को नोटिस हो चुके हैं, 129 सस्पेंड हो चुके हैं और 29 पटवारियों को बर्खास्त किया जा चुका है। देवास में तो कार्रवाई पर जमकर हंगामा हुआ और पटवारियों ने धरना दिया और नारेबाजी की। उधर पटवारियों ने अब हर राजस्व ग्राम में बने सरकारी ग्रुपों को छोड़ना शुरू कर दिया है। उधर रास्ता निकालने के लिए अधिकारी प्रोबेशनर पटवारी पर दबाव बना रहे हैं कि नौकरी चली जाएगी। लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
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