कलेक्टर के सामने BJP नेता के हाथ में सरकारी बंदूक! दतिया में फायरिंग के वीडियो से उठे गंभीर सवाल

Ram Krishna Gautam | Oct 24, 2026, 24:06 IST
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कलेक्टर की मौजूदगी में हुई फायरिंग पर उठे गंभीर सवाल
कलेक्टर की मौजूदगी में हुई फायरिंग पर उठे गंभीर सवाल

दतिया में दशहरे पर हुई शस्त्र पूजा का एक वीडियो चर्चा में है। इस वीडियो में प्रशासनिक अधिकारी सरकारी राइफल से फायरिंग करते दिख रहे हैं। इसी दौरान एक पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष भी सरकारी राइफल से गोलियां चलाते नजर आते हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि उन्हें सरकारी हथियार चलाने की अनुमति किसने दी। क्या किसी राजनीतिक नेता को सरकारी राइफल चलाने की अनुमति मिल सकती है?

शस्त्र पूजा में BJP नेता ने चलाई राइफल

मध्य प्रदेश के दतिया में दशहरे पर शस्त्र पूजा का आयोजन हुआ था। कार्यक्रम में कलेक्टर स्वप्निल वानखेडे और एसपी मयूर खंडेलवाल मौजूद थे। एडिशनल एसपी मंजीत चावला भी कार्यक्रम में शामिल थे। बताया जा रहा है कि शस्त्र पूजा के बाद अधिकारियों ने फायरिंग की। इसके बाद सरकारी राइफल पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह बुंदेला के हाथ में पहुंच गई। वीडियो में कलेक्टर उन्हें राइफल सौंपते नजर आ रहे हैं। इसके बाद बुंदेला भी राइफल से गोलियां चलाते दिखाई देते हैं। यहीं से पूरा मामला चर्चा में आ गया। सवाल है कि एक राजनीतिक नेता को सरकारी हथियार क्यों दिया गया?

किसने दी सरकारी राइफल चलाने की अनुमति?

इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या विक्रम सिंह बुंदेला को सरकारी राइफल चलाने की अनुमति थी? अगर अनुमति थी तो किस अधिकारी ने दी थी? क्या कार्यक्रम में फायरिंग के लिए कोई लिखित आदेश जारी हुआ था? क्या सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम किए गए थे? फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। सरकारी हथियारों के इस्तेमाल के लिए तय नियम और प्रक्रियाएं होती हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि राइफल किस अधिकारी की जिम्मेदारी में थी।

साड़ी पहनकर AK-47 चलाने पर एसपी अंकिता शर्मा से पुलिस मुख्यालय ने मांगा जवाब, शस्त्र पूजन में हर्ष फायरिंग पर विवाद | SP Ankita Sharma asked for a reply from Police Headquarters for firing AK-47 while wearing a saree, controversy over celebratory firing during Shastra Pujan
साड़ी पहनकर AK-47 चलाना एसपी अंकिता शर्मा को पड़ा भारी, शस्त्र पूजन में हर्ष फायरिंग पर पुलिस मुख्यालय ने मांगा जवाब
22 Oct 2026 ,
By VINAY VERMA
राजनांदगांव में विजयादशमी के दिन पुलिस लाइन में हुआ शस्त्र पूजन अब महकमे के लिए सवालों का मामला बन गया है। एसपी अंकिता शर्मा ने साड़ी पहनकर AK-47 से हर्ष फायरिंग की थी। उस समय इसे शस्त्र पूजन की परंपरा का हिस्सा माना गया, लेकिन तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद फायरिंग के तरीके और पुलिस के शस्त्र नियमों को लेकर सवाल उठने लगे।
राजनांदगांव में विजयादशमी के दिन पुलिस लाइन में हुआ शस्त्र पूजन अब महकमे के लिए सवालों का मामला बन गया है। एसपी अंकिता शर्मा ने साड़ी पहनकर AK-47 से हर्ष फायरिंग की थी। उस समय इसे शस्त्र पूजन की परंपरा का हिस्सा माना गया, लेकिन तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद फायरिंग के तरीके और पुलिस के शस्त्र नियमों को लेकर सवाल उठने लगे।

क्या कहते हैं सरकारी हथियारों के नियम?

भारत में हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियम आर्म्स एक्ट 1959 में दिए गए हैं। इसके अलावा आर्म्स रूल्स 2016 भी लागू होते हैं। हालांकि पुलिस के सरकारी हथियारों के लिए अलग विभागीय प्रक्रियाएं होती हैं। इनका इस्तेमाल संबंधित आदेशों और सुरक्षा नियमों के तहत किया जाता है। सरकारी राइफल किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी में रहती है। उसके इस्तेमाल और रखरखाव का रिकॉर्ड भी रखा जाता है। इसे Weapon Safety का अहम हिस्सा माना जाता है। अब सवाल है कि दतिया में सरकारी राइफल किसकी जिम्मेदारी में थी। इसे पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष को किस आधार पर सौंपा गया?

क्या शस्त्र पूजा में फायरिंग की छूट है?

दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। कई जगह पुलिस और प्रशासन के अधिकारी हथियारों की पूजा करते हैं। कुछ कार्यक्रमों में पूजा के बाद फायरिंग भी होती है। हालांकि शस्त्र पूजा और असली गोलियां चलाना अलग-अलग बातें हैं।

पूजा एक धार्मिक परंपरा है। वहीं फायरिंग का सीधा संबंध लोगों की सुरक्षा से है। किसी व्यक्ति का राजनीतिक पद पर होना हथियार चलाने की अनुमति नहीं देता। हालांकि केवल वीडियो से नियमों के उल्लंघन का फैसला भी नहीं किया जा सकता। इसके लिए हथियार का रिकॉर्ड और संबंधित आदेश देखने होंगे। यहां Safety Protocol का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।

फायरिंग के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?

दतिया की घटना में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फायरिंग किस जगह की गई थी? गोलियां किस दिशा में चलाई गई थीं? उस समय आसपास कितने लोग मौजूद थे?

क्या फायरिंग के लिए सुरक्षित जगह तय की गई थी?

इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। सरकारी हथियार का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है। यह नियम अधिकारियों और दूसरे लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा है।

आईपीएएस अंकिता शर्मा के मामले से उठे सवाल

दतिया की इस घटना की चर्चा के बीच एक दूसरा मामला भी सामने है। दशहरे पर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में एसपी अंकिता शर्मा ने एके-47 से फायरिंग की थी। इस मामले में आईजी ने उन्हें नोटिस जारी किया है। भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने भी इस घटना पर सवाल उठाए थे। अंकिता शर्मा भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी हैं। इसके बावजूद उनकी फायरिंग को लेकर विभागीय स्तर पर सवाल उठे। ऐसे में दतिया की घटना को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं। आखिर पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष को सरकारी राइफल चलाने की अनुमति कैसे मिली?

सवाल सुनते ही एसपी ने काटा फोन

इस मामले में द सूत्र ने पुलिस का पक्ष जानने की कोशिश की। ग्वालियर से द सूत्र के विशेष संवाददाता रतन मिश्रा ने दतिया एसपी को फोन किया। उनसे सरकारी राइफल से हुई फायरिंग को लेकर सवाल पूछा गया। रिपोर्ट के मुताबिक एसपी ने सवाल सुनने के बाद फोन काट दिया। इस कारण उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। अब इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

जांच में किन बातों का पता लगाना जरूरी?

इस मामले में सबसे पहले सरकारी राइफल का रिकॉर्ड देखना जरूरी है। इससे पता चलेगा कि हथियार किसकी जिम्मेदारी में था। इसके अलावा जारी किए गए कारतूसों का हिसाब भी देखा जाना चाहिए। कितने कारतूस जारी हुए और कितनी गोलियां चलाई गईं?

कार्यक्रम की अनुमति और सुरक्षा इंतजामों की भी जांच होनी चाहिए। यह पूरा मामला सरकारी हथियारों के इस्तेमाल में Accountability यानी जवाबदेही से जुड़ा है। अगर जांच में नियम टूटने की बात सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं फायरिंग नियमों के मुताबिक हुई थी तो प्रशासन को स्थिति साफ करनी चाहिए।

सरकारी हथियारों के इस्तेमाल पर बड़ा सवाल

दतिया की घटना केवल शस्त्र पूजा तक सीमित नहीं है। यह सरकारी हथियारों की सुरक्षा और इस्तेमाल से भी जुड़ी है। सरकारी राइफल आम लोगों की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होती है। इसलिए इसका इस्तेमाल तय नियमों के तहत होना चाहिए। प्रशासन आम लोगों से हथियारों के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की उम्मीद करता है। ऐसे में सरकारी कार्यक्रमों में भी सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह बुंदेला को सरकारी राइफल किसने और क्यों सौंपी?
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