दतिया में स्कूल की छत पर झंडा लगाते वक्त हाईटेंशन लाइन से जिंदा जला छात्र
Sanjay Dhiman | Aug 15, 2026, 12:42 IST
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दतिया में स्कूल की छत पर झंडा लगाते समय छात्र हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया। करंट लगने से उसकी मौत हो गई। परिवार ने स्कूल प्रबंधन पर आरोप लगाए हैं।
मध्य प्रदेश के दतिया में एक बड़ा हादसा हुआ। स्कूल की छत पर झंडा लगाते समय छात्र करंट की चपेट में आ गया। लोहे का पाइप हाईटेंशन लाइन से छू गया। छात्र मौके पर ही झुलस गया और उसकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने उसे जबरदस्ती बुलाया था।
यह घटना लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल की है। छात्र का नाम राज कुशवाह था। वह गांव जोनिया का रहने वाला था। राज कक्षा 11वीं में पढ़ता था।
स्कूल की छत के ऊपर से एक हाईटेंशन लाइन गुजरती है। इसकी क्षमता 11 हजार केवी (KV – Kilovolt) बताई गई है। स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के लिए छत पर झंडा लगाया जा रहा था। राज लोहे के पाइप से झंडा लगाने का प्रयास कर रहा था। पाइप हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया। करंट पाइप से सीधे उसके शरीर में उतर गया।
छात्र की चमड़ी बुरी तरह उधड़ गई। हाथ और उंगलियां पूरी तरह जल गईं। उंगलियां अकड़ गईं। वह मौके पर ही गंभीर रूप से झुलस गया। कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।
परिजन के मुताबिक, राज एक मकान में किराए से रहता था। यह मकान स्कूल संचालक नंदकिशोर कुशवाह का था। शुक्रवार को स्कूल करीब डेढ़ बजे बंद हुआ। छुट्टी के बाद राज घर लौट गया था।
इसके बाद स्कूल संचालक ने उसे दोबारा बुलाया। उसे छत पर झंडा लगाने भेजा गया। कुछ ही देर में यह हादसा हो गया।
राज के चचेरे भाई ने बताया कि करंट लगने की जानकारी तुरंत नहीं मिली। स्कूल ने परिवार को खुद फोन नहीं किया। परिवार को यह खबर एक रिश्तेदार के फोन से मिली। परिवार का कहना है कि उन्हें पैसों की जरूरत नहीं है। उन्हें सिर्फ न्याय चाहिए। परिजन ने स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
राज की मां ने बताया कि उनका बेटा घर से बाहर कम जाता था। उन्होंने कहा कि बेटे को जबरदस्ती स्कूल बुलाया गया था। हादसे के वक्त स्कूल में सिर्फ एक शिक्षक मौजूद थे। मां का आरोप है कि स्कूल ने घटना छिपाने की कोशिश की।
अस्पताल में बेटे का शव देखते ही मां-पिता बदहवास हो गए। दोनों खुद को संभाल नहीं पाए। परिवार के अन्य सदस्यों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला।
परिवार में चार सदस्य हैं। माता-पिता, बड़ा भाई और राज। राज परिवार में सबसे छोटा था। उसके पिता गांव में खेती-किसानी करते हैं। बेटे को खोने के बाद पूरा परिवार सदमे में है। गांव में भी मातम का माहौल है।
सिटी कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया। कोतवाली थाना प्रभारी दिनेश राजपूत ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है। यह जांच परिजन की शिकायत के आधार पर हो रही है। जांच में दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि छात्र को छत पर किसने भेजा। परिवार की शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
इस हादसे ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल है स्कूल भवनों के पास बिजली लाइनों की सुरक्षा का। आमतौर पर ऐसे भवनों के पास हाईटेंशन लाइन के लिए मानक तय होते हैं। इन मानकों में सुरक्षित दूरी और ऊंचाई शामिल होती है। मानकों का पालन न होने पर हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
छत के ऊपर से लाइन गुजरना गंभीर लापरवाही की तरफ इशारा करता है। सवाल यह भी है कि बिजली विभाग को इसकी जानकारी थी या नहीं। क्या स्कूल को पहले आगाह किया गया था, यह भी देखना होगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि झंडारोहण जैसे कार्यक्रमों से पहले जांच जरूरी होती है। छत और आसपास की बिजली लाइनों की जांच होनी चाहिए। लोहे या धातु की वस्तु लाइन के पास ले जाना खतरनाक होता है। ऐसी वस्तुएं करंट को तेजी से शरीर तक पहुंचा सकती हैं।
पूरे देश में स्कूल इन दिनों स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटे हैं। ज्यादातर स्कूलों में झंडारोहण और सजावट का काम चल रहा है। ऐसे मौकों पर अक्सर विद्यार्थियों की मदद ली जाती है।
दतिया के इस हादसे ने एक अहम सवाल भी खड़ा किया है। क्या कम उम्र के छात्रों को जोखिम भरे काम सौंपे जाने चाहिए। परिवार का कहना है कि राज को छुट्टी के बाद दोबारा बुलाया गया। यह उसकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं था।
राज की मौत की खबर फैलते ही गांव जोनिया में मातम छा गया। गांव के लोग बड़ी संख्या में परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश की। पड़ोसियों का कहना है कि राज शांत स्वभाव का लड़का था। वह ज्यादातर समय घर पर ही रहता था।
परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण है। पिता खेती-किसानी से घर चलाते हैं। राज की मौत से परिवार को गहरा आघात पहुंचा है। गांव के लोग प्रशासन से जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी नजर पुलिस जांच के नतीजों पर टिकी है। परिवार को उम्मीद है कि जिम्मेदारी तय होगी। उन्हें उम्मीद है कि दोषियों पर कार्रवाई भी होगी। स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग से भी जांच की मांग उठ रही है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है। स्कूल परिसरों में बिजली सुरक्षा जरूरी है। जांच पूरी होने तक अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन परिवार के दर्द और सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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हादसा कैसे हुआ
स्कूल की छत के ऊपर से एक हाईटेंशन लाइन गुजरती है। इसकी क्षमता 11 हजार केवी (KV – Kilovolt) बताई गई है। स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के लिए छत पर झंडा लगाया जा रहा था। राज लोहे के पाइप से झंडा लगाने का प्रयास कर रहा था। पाइप हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया। करंट पाइप से सीधे उसके शरीर में उतर गया।
छात्र की चमड़ी बुरी तरह उधड़ गई। हाथ और उंगलियां पूरी तरह जल गईं। उंगलियां अकड़ गईं। वह मौके पर ही गंभीर रूप से झुलस गया। कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।
फिर बुलाया गया स्कूल
इसके बाद स्कूल संचालक ने उसे दोबारा बुलाया। उसे छत पर झंडा लगाने भेजा गया। कुछ ही देर में यह हादसा हो गया।
परिवार का आरोप
राज की मां ने बताया कि उनका बेटा घर से बाहर कम जाता था। उन्होंने कहा कि बेटे को जबरदस्ती स्कूल बुलाया गया था। हादसे के वक्त स्कूल में सिर्फ एक शिक्षक मौजूद थे। मां का आरोप है कि स्कूल ने घटना छिपाने की कोशिश की।
परिवार पर दुखों का पहाड़
परिवार में चार सदस्य हैं। माता-पिता, बड़ा भाई और राज। राज परिवार में सबसे छोटा था। उसके पिता गांव में खेती-किसानी करते हैं। बेटे को खोने के बाद पूरा परिवार सदमे में है। गांव में भी मातम का माहौल है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि छात्र को छत पर किसने भेजा। परिवार की शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
हाईटेंशन लाइन पर सवाल
छत के ऊपर से लाइन गुजरना गंभीर लापरवाही की तरफ इशारा करता है। सवाल यह भी है कि बिजली विभाग को इसकी जानकारी थी या नहीं। क्या स्कूल को पहले आगाह किया गया था, यह भी देखना होगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि झंडारोहण जैसे कार्यक्रमों से पहले जांच जरूरी होती है। छत और आसपास की बिजली लाइनों की जांच होनी चाहिए। लोहे या धातु की वस्तु लाइन के पास ले जाना खतरनाक होता है। ऐसी वस्तुएं करंट को तेजी से शरीर तक पहुंचा सकती हैं।
स्वतंत्रता दिवस से पहले हादसा
दतिया के इस हादसे ने एक अहम सवाल भी खड़ा किया है। क्या कम उम्र के छात्रों को जोखिम भरे काम सौंपे जाने चाहिए। परिवार का कहना है कि राज को छुट्टी के बाद दोबारा बुलाया गया। यह उसकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं था।
गांव में शोक की लहर
परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण है। पिता खेती-किसानी से घर चलाते हैं। राज की मौत से परिवार को गहरा आघात पहुंचा है। गांव के लोग प्रशासन से जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है। स्कूल परिसरों में बिजली सुरक्षा जरूरी है। जांच पूरी होने तक अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन परिवार के दर्द और सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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