दतिया उपचुनाव में कुशवाह से लेकर ब्राह्मण तक, हर वर्ग को रिझाने भाजपा-कांग्रेस की तैनाती

Amresh Kushwaha | Jul 13, 2026, 08:49 IST
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दतिया उपचुनाव
दतिया उपचुनाव

दतिया उपचुनाव में भाजपा-कांग्रेस ने जातिगत समीकरण साधने की रणनीति बनाई है। ब्राह्मण, कुशवाहा, अहिरवार-जाटव और यादव जैसी जातियों के लिए अलग नेता तैनात किए गए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • दतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं।
  • दोनों दलों ने जातिगत समीकरण साधने की खास रणनीति बनाई है।
  • हर बड़ी जाति के लिए अलग-अलग प्रभावशाली नेता तैनात किए गए हैं।
  • ब्राह्मण, कुशवाहा, अहिरवार-जाटव और यादव समाज पर खास फोकस है।
  • टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा दिल्ली पहुंचे और पार्टी का समर्थन किया।

जाति ही तय करेगी हार-जीत

दतिया विधानसभा उप-चुनाव में मुकाबला अब सीधा जातिगत समीकरण पर टिक गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों मानते हैं कि जीत-हार जाति के वोट से तय होगी। इसी वजह से दोनों पार्टियों ने अलग रणनीति बनाई है।

हर दल ने 10 प्रमुख जातियों के प्रभावशाली नेताओं को मैदान में उतारा है। ये नेता विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहेंगे। इनका काम अपनी-अपनी जाति के वोटरों को साधना है।

दतिया जैसी सीट पर यह रणनीति नई नहीं है। मध्य प्रदेश में कई सीटों पर जातीय गणित से उम्मीदवार तय होते हैं। इस बार दतिया में यह रणनीति और ज्यादा साफ नजर आ रही है।

कांग्रेस की जातिगत चाल

कांग्रेस ने कुशवाहा समाज को साधने के लिए दो बड़े चेहरे उतारे हैं। सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाह को यह जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही पूर्व मंत्री लक्ष्मण सिंह को भी यह काम सौंपा गया है। दोनों नेता कुशवाह समाज में अच्छी पकड़ रखते हैं।

ब्राह्मण वर्ग के लिए पार्टी ने तीन नेताओं की टीम बनाई है। इसमें हेमंत कटारे, पंकज उपाध्याय और अवनीश भार्गव शामिल हैं। यह टीम अलग-अलग इलाकों में जनसंपर्क करेगी।

अहिरवार-जाटव समाज के लिए कांग्रेस ने फूल सिंह बरैया को जिम्मेदारी दी है। बरैया इस समाज के बड़े चेहरों में गिने जाते हैं।

यादव, लोधी, रावत और पाल समाज के लिए अलग नेता तय हुए हैं। कांग्रेस का मानना है कि हर जाति तक अलग संदेश पहुंचाना जरूरी है।

भाजपा का जातीय समीकरण

भाजपा ने ब्राह्मण समाज को साधने का जिम्मा नरोत्तम मिश्रा को दिया है। उनके साथ प्रदेश महामंत्री शैलेंद्र बरुआ भी सक्रिय रहेंगे। दोनों नेता क्षेत्र में लगातार बैठकें कर रहे हैं।

अहिरवार-जाटव समाज के लिए भाजपा ने दो बड़े नाम उतारे हैं। इसमें डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और सांसद संध्या राय शामिल हैं। इन दोनों नेताओं की समाज में मजबूत पकड़ मानी जाती है।

यादव, लोधी, रावत और पाल समाज के लिए भाजपा ने भी नेता उतारे हैं। दोनों दलों की रणनीति लगभग एक जैसी दिख रही है। बस चेहरे अलग-अलग हैं। दोनों पार्टियां मानती हैं कि छोटी सी चूक भी नतीजे बदल सकती है।

किस जाति की कितनी आबादी

दतिया सीट पर जातिगत आबादी का गणित भी बेहद अहम है। यहां ब्राह्मण समाज की आबादी करीब 14.8 प्रतिशत है। अहिरवार-जाटव समाज की आबादी 14.7 प्रतिशत के आसपास है। कुशवाहा और काछी समाज की आबादी करीब 12.2 प्रतिशत है। यादव समाज करीब 7.4 प्रतिशत वोटर रखता है। लोधी समाज की हिस्सेदारी लगभग 6.9 प्रतिशत है। बघेल और पाल समाज मिलाकर 5.3 प्रतिशत हैं।

मुस्लिम और बनिया समाज की आबादी 3.7-3.7 प्रतिशत है। ठाकुर-राजपूत समाज करीब 3 प्रतिशत है। रावत और मीणा समाज की आबादी लगभग 2.9 प्रतिशत है। यही आंकड़े दोनों दलों की रणनीति की बुनियाद बने हैं। किसी भी एक जाति के पास पूर्ण बहुमत नहीं है। इसलिए हर जाति का वोट अहम माना जा रहा है।

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नरोत्तम मिश्रा पहुंचे दिल्ली

टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा सीधे दिल्ली पहुंचे। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मिश्रा ने कहा कि वे पार्टी के फैसले के साथ हैं। उन्होंने कहा कि वे पूरी ताकत से प्रत्याशी का समर्थन करेंगे। इस बयान से भाजपा खेमे में असंतोष की अटकलों पर विराम लगा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि एकजुटता से चुनाव लड़ा जाएगा।

आगे की रणनीति

दोनों दल अब जातिगत सम्मेलन और छोटी बैठकों पर जोर दे रहे हैं। स्थानीय नेता घर-घर जाकर वोटरों से संपर्क कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों जातीय गोलबंदी को अंतिम हथियार मान रही हैं। हर जाति के प्रभावशाली लोगों को जोड़ने की कोशिश तेज हो गई है।

छोटी-छोटी सामाजिक बैठकों में उम्मीदवारों का प्रचार भी शुरू हो चुका है। आने वाले दिनों में यह मुकाबला और तेज हो सकता है। दतिया उपचुनाव का नतीजा प्रदेश की राजनीति पर भी असर डालेगा। यह नतीजा आने वाले चुनावों के लिए भी दिशा तय कर सकता है।

मुकाबला क्यों अहम

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छोटी सीटों पर जातीय गणित असर करता है। दतिया जैसी सीट पर हर वोट मायने रखता है। इसी वजह से दोनों दलों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। पार्टियों ने अपने सबसे भरोसेमंद नेताओं को मैदान में उतारा है।

यह दिखाता है कि उपचुनाव को दोनों दल कितनी गंभीरता से ले रहे हैं। आने वाले हफ्तों में प्रचार अभियान और तेज होने की उम्मीद है। मतदाताओं को भी अब हर दिन नए दांव-पेच देखने को मिल सकते हैं। दोनों दल जनसभाओं और छोटी सभाओं में इस रणनीति को और मजबूत करेंगे।

स्थानीय स्तर पर भी संगठन की टीमें सक्रिय हो गई हैं। कुल मिलाकर दतिया उपचुनाव अब सिर्फ दो उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं रहा। यह हर जाति और समाज के भरोसे की भी परीक्षा बन गया है।

बीजेपी के आशुतोष और कांग्रेस के घनश्याम आज भरेंगे पर्चा

दतिया उपचुनाव के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन है। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी दोपहर 2:30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, डॉ. महेन्द्र सिंह, अजय जामवाल, जगदीश देवड़ा और डॉ. नरोत्तम मिश्रा समेत पार्टी के बड़े नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल करेंगे।

वहीं कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह सुबह 11 बजे पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, हरीश चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के साथ नामांकन भरेंगे। दोनों दलों ने इस मौके पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी की है।

दतिया उपचुनाव का पूरा शेड्यूल

चुनाव आयोग ने दतिया उपचुनाव की पूरी प्रक्रिया की समय-सारणी पहले ही जारी कर दी है। नीचे दी गई जानकारी से पूरा शेड्यूल आसानी से समझा जा सकता है।

चुनाव प्रक्रिया 6 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और इसी दिन राजपत्र में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई थी। इच्छुक उम्मीदवार 13 जुलाई तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके अगले दिन यानी 14 जुलाई को सभी नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच की जाएगी। जिन उम्मीदवारों को अपना नाम वापस लेना होगा, उनके लिए 16 जुलाई तक का समय तय किया गया है।

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