दतिया: भाजपा से मिश्रा अकेले दावेदार, कांग्रेस में जंग, जातियों के भरोसे सभी दल
Pawan Modiya | Jul 03, 2026, 17:09 IST
दतिया उपचुनाव
दतिया विधानसभा उपचुनाव की तारीखें तय हो गई हैं। 30 जुलाई को वोटिंग और 3 अगस्त को नतीजे आएंगे। भाजपा से नरोत्तम मिश्रा और एएसपी से दामोदर यादव लगभग तय हैं। कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान जारी है। जातिगत समीकरण भी इस सीट पर बड़ी भूमिका निभाएगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को वोटिंग होगी और 3 अगस्त को नतीजे आएंगे।
- यहां जातिगत समीकरण चुनाव में हमेशा बड़ी भूमिका निभाता आया है
- भाजपा से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम लगभग तय माना जा रहा है।
- आजाद समाज पार्टी यानी एएसपी (Azad Samaj Party) से दामोदर यादव अकेले दावेदार हैं।
- कांग्रेस में टिकट के लिए कई नेता आपस में दावेदारी जता रहे हैं।
भाजपा से नरोत्तम मिश्रा लगभग तय
नरोत्तम मिश्रा साल 2008 से लगातार दतिया से विधायक चुने जाते रहे हैं। 2023 में हार के बाद भी वे क्षेत्र में सक्रिय बने रहे। हाल ही में उन्होंने भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब आधा घंटे तक चली थी। इसके बाद से उपचुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
जातिगत समीकरण निभाएगा अहम भूमिका
इसके बाद यादव और क्षत्रिय समाज के करीब 14 से 15 हजार वोटर हैं। रावत, लोधी और वैश्य समाज के भी करीब 10-10 हजार वोटर हैं। नरोत्तम मिश्रा को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जाता है। पिछले कई सालों से उन्हें इस समाज का मजबूत समर्थन मिलता रहा है। भाजपा इसी जातिगत गणित के आधार पर उन्हें फिर मैदान में उतार सकती है।
कांग्रेस में टिकट पर घमासान, बगावत का अंदेशा
वहीं दूसरी तरफ अवधेश नायक भी टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। अवधेश नायक पिछले चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। वे पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट बंटवारे से असंतोष बढ़ सकता है। अगर अवधेश नायक को टिकट मिलता है तो भारती परिवार नाराज हो सकता है। ऐसी स्थिति में अनुज भारती निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकते हैं। इससे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बंट सकते हैं। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।
एएसपी से दामोदर ठोंक रहे ताल
दामोदर यादव ने दावा किया कि पार्टी उन्हें उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। उनके अनुसार सिर्फ औपचारिक ऐलान बाकी है। यादव ने कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है। उन्होंने भाजपा और नरोत्तम मिश्रा पर भी कई आरोप लगाए। उनका दावा है कि इस बार नतीजे अलग होंगे।
सीट क्यों हुई खाली
इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने 2 अप्रैल को सीट खाली घोषित कर दी। संविधान के नियमों के अनुसार छह महीने में सीट पर चुनाव जरूरी होता है। इसी वजह से अब दतिया में उपचुनाव कराया जा रहा है। चुनाव आयोग ने वोटिंग और मतगणना की तारीखें भी तय कर दी हैं। 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को परिणाम आएंगे। नामांकन की प्रक्रिया 6 जुलाई से 13 जुलाई तक चलेगी।
2023 में क्यों हारे मिश्रा
दसवें राउंड तक भारती करीब आठ हजार वोटों से आगे चल रहे थे। बसई के शहरी इलाके ने 2018 में मिश्रा को जीत दिलाई थी। लेकिन 2023 में यह चमत्कार नहीं दोहराया जा सका। आखिरी राउंड में मिली बढ़त भी हार टालने के लिए काफी नहीं थी। इसी हार के चलते भाजपा अब यह सीट वापस चाहती है।
मंत्री विजयवर्गीय का दावा
आगे क्या होगा
जरूरी FAQ
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारिता बैंक धोखाधड़ी मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराया था। एमपी एमएलए कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई। विधानसभा सचिवालय ने 2 अप्रैल को सीट को खाली घोषित किया, और संवैधानिक प्रावधान के तहत छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना जरूरी है।
दतिया विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण क्या है?
दतिया सीट पर ब्राह्मण और कुशवाहा समाज के वोटर करीब बराबर और निर्णायक हैं, दोनों की संख्या करीब 27 से 30 हजार के बीच है। इसके बाद यादव और क्षत्रिय समाज के करीब 14 से 15 हजार वोटर हैं, जबकि रावत, लोधी और वैश्य समाज के भी करीब 10-10 हजार वोटर हैं। नरोत्तम मिश्रा को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जाता है, जिन्हें इस समाज का मजबूत समर्थन मिलता रहा है।
दतिया से किन पार्टियों के उम्मीदवार तय माने जा रहे हैं?
भाजपा से पूर्व गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का नाम लगभग तय है, हालांकि पार्टी ने अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आजाद समाज पार्टी (एएसपी) से दामोदर यादव को उम्मीदवार बनाया जाना तय माना जा रहा है। कांग्रेस में अभी टिकट को लेकर अनुज भारती और अवधेश नायक के बीच खींचतान जारी है।
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