DAVV में नया विवाद: हॉस्टल टाइमिंग को लेकर छात्रा पहुंची सीएम हेल्पलाइन
Manya Jain | Jul 27, 2026, 12:10 IST
davv hostel time curfew rule controversy
DAVV इंदौर के कमला नेहरू गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की। लड़कों को रात 10 और लड़कियों को 8 बजे की समय सीमा पर विवाद। प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा।
इंदौर की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में हॉस्टल के नियमों पर विवाद खड़ा हो गया है। कमला नेहरू गर्ल्स हॉस्टल की एक छात्रा ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में कहा गया कि लड़कियों को शाम 8 बजे तक हॉस्टल लौटना होता है, जबकि लड़कों को रात 10 बजे तक की छूट मिलती है।
छात्रा ने हॉस्टल की सफाई, खाने की क्वालिटी और पानी की समस्या का भी जिक्र किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है और जांच का भरोसा दिया है।
यह शिकायत कमला नेहरू गर्ल्स हॉस्टल की एक छात्रा ने दर्ज कराई। उसने CM हेल्पलाइन पर सीधे संपर्क किया। शिकायत में हॉस्टल टाइमिंग को लेकर पुरानी नाराजगी सामने आई। छात्रा ने लिखा कि यह नियम कई सालों से बिना बदलाव के चला आ रहा है। इस मामले ने एक बार फिर लैंगिक भेदभाव की बहस छेड़ दी है।
DAVV में कुल 12 हॉस्टल हैं। इनमें से 6 हॉस्टल लड़कियों के लिए हैं। बाकी 6 हॉस्टल लड़कों के लिए आरक्षित हैं। हर हॉस्टल का अपना वार्डन और नियम होते हैं। लेकिन एंट्री टाइमिंग को लेकर लड़कों और लड़कियों में साफ फर्क है।
विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव विष्णु मिश्रा ने शिकायत मिलने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि शिकायत को चीफ हॉस्टल वार्डन के पास भेजा जाएगा। वार्डन इस मामले को देखेंगे और समाधान निकालेंगे। मिश्रा ने कहा कि प्रक्रिया के तहत हर शिकायत की जांच होती है।
चीफ हॉस्टल वार्डन जीएल प्रजापति ने कहा कि अलग टाइमिंग का नियम कई सालों से लागू है। उनके मुताबिक यह नियम सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया था। प्रजापति ने कहा कि शिकायत मिलने पर छात्रा से बातचीत की जाएगी। सफाई और अन्य सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों की भी जांच होगी।
कई छात्राओं का कहना है कि यह नियम भेदभावपूर्ण है। एक छात्रा ने कहा कि क्लास, इंटर्नशिप या प्रतियोगिता की वजह से देर हो सकती है। उसका सवाल था कि फिर सिर्फ लड़कियों को ही जल्दी लौटना क्यों जरूरी है। छात्राओं का कहना है कि इससे उन्हें मानसिक तनाव होता है।
एक अन्य छात्रा ने बताया कि यह मुद्दा नया नहीं है। हर बैच की छात्राएं इस बारे में शिकायत करती आई हैं। उसने कहा कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ पाबंदी लगाना सही तरीका नहीं है। उसके मुताबिक कैंपस में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था ज्यादा असरदार समाधान हो सकता है।
शिकायत के अनुसार 8 बजे के बाद पहुंचने वाली छात्राओं को अक्सर बाहर इंतजार करना पड़ता है। कई बार उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना भी करना पड़ता है। इसके बाद ही उन्हें हॉस्टल में एंट्री मिलती है। छात्राओं का कहना है कि यह प्रक्रिया उनके लिए असहज और अपमानजनक होती है।
शिकायत में सिर्फ टाइमिंग का मुद्दा नहीं है। छात्रा ने हॉस्टल में सफाई की कमी की बात भी लिखी। खाने की क्वालिटी को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई। पीने के पानी की समस्या बार-बार सामने आने का भी जिक्र किया गया।
एक्सपर्ट कोट्स
“शिकायत को चीफ हॉस्टल वार्डन के पास भेजा जाएगा, जो मामले को देखकर उसका समाधान निकालेंगे।” — विष्णु मिश्रा, सहायक कुलसचिव, DAVV
“ये नियम कई सालों से लागू हैं और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। शिकायत मिलने पर छात्रा से बातचीत की जाएगी।” — जीएल प्रजापति, चीफ हॉस्टल वार्डन, DAVV
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शिकायत में कहा गया कि लड़कियों को शाम 8 बजे तक हॉस्टल लौटना होता है, जबकि लड़कों को रात 10 बजे तक की छूट मिलती है।
छात्रा ने हॉस्टल की सफाई, खाने की क्वालिटी और पानी की समस्या का भी जिक्र किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है और जांच का भरोसा दिया है।
छात्रा की शिकायत से हलचल
DAVV में कुल कितने हॉस्टल
प्रशासन ने क्या कहा
चीफ हॉस्टल वार्डन जीएल प्रजापति ने कहा कि अलग टाइमिंग का नियम कई सालों से लागू है। उनके मुताबिक यह नियम सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया था। प्रजापति ने कहा कि शिकायत मिलने पर छात्रा से बातचीत की जाएगी। सफाई और अन्य सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों की भी जांच होगी।
छात्राओं की आपत्ति
एक अन्य छात्रा ने बताया कि यह मुद्दा नया नहीं है। हर बैच की छात्राएं इस बारे में शिकायत करती आई हैं। उसने कहा कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ पाबंदी लगाना सही तरीका नहीं है। उसके मुताबिक कैंपस में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था ज्यादा असरदार समाधान हो सकता है।
देर होने पर क्या होता है
अन्य समस्याएं भी उठीं
एक्सपर्ट कोट्स
“शिकायत को चीफ हॉस्टल वार्डन के पास भेजा जाएगा, जो मामले को देखकर उसका समाधान निकालेंगे।” — विष्णु मिश्रा, सहायक कुलसचिव, DAVV
“ये नियम कई सालों से लागू हैं और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। शिकायत मिलने पर छात्रा से बातचीत की जाएगी।” — जीएल प्रजापति, चीफ हॉस्टल वार्डन, DAVV
FAQ
- DAVV हॉस्टल में लड़कियों और लड़कों की टाइमिंग में क्या फर्क है?
लड़कियों को शाम 8 बजे तक हॉस्टल लौटना होता है। लड़कों को रात 10 बजे तक की छूट मिलती है। यही फर्क विवाद की वजह बना है। - शिकायत किसने और कहां दर्ज कराई?
कमला नेहरू गर्ल्स हॉस्टल की एक छात्रा ने यह शिकायत की। उसने मध्यप्रदेश CM हेल्पलाइन पर संपर्क किया। शिकायत में टाइमिंग के साथ अन्य समस्याएं भी बताई गईं। - विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या जवाब दिया?
प्रशासन ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। मामला चीफ हॉस्टल वार्डन को भेजा जाएगा। वार्डन का कहना है कि नियम सुरक्षा कारणों से बनाए गए थे।
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