भोजशाला पर ASI रिपोर्ट में लिखा पूर्व संरचना मंदिर की, जल्दबाजी में तोड़कर बनी मस्जिद
Sanjay Gupta | Feb 24, 2026, 14:10 IST
dhar bhojshala asi survey report temple evidence
धार की प्रसिद्ध भोजशाला का विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इंदौर हाईकोर्ट में इस मामले की अंतिम सुनवाई शुरू हो गई है। पूरा मामला जानने के लिए खबर आखिरी तक पढ़िए।
Indore. धार की भोजशाला मामले के सभी पक्षकारों को ASI ( आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट मिल गई है।
द सूत्रके पास 2 हजार 189 पन्नों की यह रिपोर्ट है। इसका पूरा अध्ययन करने के बाद साफ है कि भोजशाला मंदिर सह कमाल मौला मस्जिद,परमार कालीन 10-11वीं में बनाया गया मंदिर ही है।
इस रिपोर्ट पर दो सप्ताह में दावे, सुझाव आएंगे। इसके बाद 16 मार्च को सुनवाई होगी।
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एएसआई ने साफ-साफ लिखा है कि 1455 ईसवी में हिजरी के खिलची बादशाह महमूद शाह की आयत भी यहां अंकित है। ये आयत धार में स्थित अब्दुल्ला शाह चांगल के मकबरे के द्वार पर अंकित है।
इसमें 17वीं आयत में लिखा है कि यह वीर पुरुष लोगों की भीड़ के साथ इस पुराने मठ के धर्म केंद्र तक पहुंचा था। वहीं, 18वीं आयत में ये बताया गया कि उसने मूर्तियों को तोड़कर मंदिर को हिंसक तरीके से मस्जिद में बदल दिया था।
एएसआई को मौके पर 94 मूर्तियां मिली हैं। इनमें देवी-देवताओं की आकृतियां शामिल थीं। इसके अलावा भगवान गणेश, ब्रह्मा भगवान की पत्नी की आकृति, भगवान नरसिंह, भैरव, और मानव व पशु आकृतियां भी थीं, जैसे कुत्ता, बंदर, हाथी, घोड़ा, सांप आदि।
मस्जिद में मानव और पशु आकृतियों की अनुमति नहीं होती। इसलिए इन मूर्तियों को तराशकर और काटकर हटा दिया गया था। ये बदलाव पूर्वी स्तंभों पर साफ दिखाई देते हैं।
सर्वे में यह साफ है कि दो शिलालेख, ओम सरस्वती नमः और ओम नमः शिवाय जैसे देवताओं के आह्वान से शुरू होते हैं। पहले यहां संस्कृत और प्राकृत शब्दों का इस्तेमाल हुआ था। इन छवियों को बाद में उपयोग करने के लिए हटाया गया था। विकृत किया गया था।
यहां बने स्तंभों की कतार की कला और वास्तुकला से यह साफ संकेत मिलता है कि ये पहले मंदिर का हिस्सा थे।
पहली कविता के अंत में अवनिकुर्मा शतम् लिखा हुआ है। इसके रचयिता महाराजाधिराज भोजदेव माने जाते हैं। एक शिलालेख पर परिजातमंजरी नाटिका या विजयश्री भी लिखा है। इसमें यह बताया गया कि इसका प्रदर्शन देवी सरस्वती के मंदिर में हुआ था। इससे यह साबित होता है कि यह एक शिक्षण केंद्र के अस्तित्व की परंपरा को दर्शाता है, जिसे माना जाता है कि भोज ने स्थापित किया था।
इंदौर हाईकोर्ट के आदेश से मार्च 2024 में यह सर्वे हुआ था। इस सर्वे में प्रमुख एडिशनल डायरेक्टर जनरल एएसआई आलोक त्रिपाठी थे। इसके अलावा टीम में जुल्फिकार अली, डॉ. भुवन विक्रम, डॉ. गौतमी भट्टाचार्य भी शामिल थे। साथ ही मनोज कुर्मी, डॉ. इजहार आलम हाश्मी, डॉ. आफताब हुसैन, डॉ. शंभूनाथ यादव और डॉ. नीरज मिश्रा भी टीम का हिस्सा थे।
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द सूत्रके पास 2 हजार 189 पन्नों की यह रिपोर्ट है। इसका पूरा अध्ययन करने के बाद साफ है कि भोजशाला मंदिर सह कमाल मौला मस्जिद,परमार कालीन 10-11वीं में बनाया गया मंदिर ही है।
इस रिपोर्ट पर दो सप्ताह में दावे, सुझाव आएंगे। इसके बाद 16 मार्च को सुनवाई होगी।
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सर्वे रिपोर्ट में लिखा जल्दबाजी में तोड़कर बनी मस्जिद
इस सर्वे रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा गया है कि यह स्तर थ्री लेयर का है। ऊपर का हिस्सा यानी जो वर्तमान स्ट्रक्चर है, वो पुरानी संरचना को तोड़कर जल्दबाजी में बनाया गया है। ये संरचना परमार कालीन मंदिर की है। रिपोर्ट के वॉल्यूम वन के पेज 144 पर बिंदु 18 में ये साफ किया गया है कि शिलालेख, मूर्तियों और स्थापत्य तत्वों के अंशों से ये पता चलता है कि इस पत्थर की संरचना का ऊपर वाला हिस्सा बाद में संशोधित किया गया है। फिर उसे मस्जिद में बदल दिया गया।
आयतों में लिखा मंदिर तोड़ मस्जिद बनाई
इसमें 17वीं आयत में लिखा है कि यह वीर पुरुष लोगों की भीड़ के साथ इस पुराने मठ के धर्म केंद्र तक पहुंचा था। वहीं, 18वीं आयत में ये बताया गया कि उसने मूर्तियों को तोड़कर मंदिर को हिंसक तरीके से मस्जिद में बदल दिया था।
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मानव, पशु आकृति हटाई, क्योंकि मस्जिद में प्रतिबंधित
मस्जिद में मानव और पशु आकृतियों की अनुमति नहीं होती। इसलिए इन मूर्तियों को तराशकर और काटकर हटा दिया गया था। ये बदलाव पूर्वी स्तंभों पर साफ दिखाई देते हैं।
दो शिलालेख में ऊं शब्द लिखा है
यहां बने स्तंभों की कतार की कला और वास्तुकला से यह साफ संकेत मिलता है कि ये पहले मंदिर का हिस्सा थे।
पहली कविता के अंत में अवनिकुर्मा शतम् लिखा हुआ है। इसके रचयिता महाराजाधिराज भोजदेव माने जाते हैं। एक शिलालेख पर परिजातमंजरी नाटिका या विजयश्री भी लिखा है। इसमें यह बताया गया कि इसका प्रदर्शन देवी सरस्वती के मंदिर में हुआ था। इससे यह साबित होता है कि यह एक शिक्षण केंद्र के अस्तित्व की परंपरा को दर्शाता है, जिसे माना जाता है कि भोज ने स्थापित किया था।
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इन्होंने किया सर्वे, बनाई रिपोर्ट
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