शिवाजी वाले बयान पर धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी, कहा- लोगों ने मेरे बयान का गलत मतलब निकाला
Aman Vaishnav | Apr 27, 2026, 12:09 IST
dhirendra shastri apology shivaji maharaj controversy
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने शिवाजी महाराज पर दिए बयान पर माफी मांगी है। धीरेंद्र शास्त्री ने साफ किया कि उनका मकसद किसी का अपमान करना नहीं था। साथ ही चार बच्चे पैदा करने वाले बयान पर भी शास्त्री ने अपना स्पष्टीकरण दिया है।
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हाल ही में छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी के बारे में अपनी टिप्पणी को लेकर विवादों में घिर गए थे। अब उन्होंने माफी मांग ली है।
26 अप्रैल को नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कुछ लोगों ने मेरे बयान का गलत मतलब निकाला। मैं जिस स्वराज और हिंदू राष्ट्र की बात करता हूं, उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का स्थान सबसे ऊंचा है। उनके बारे में नकारात्मक कुछ कहना तो दूर, मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता।
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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा कि संदर्भ बिल्कुल अलग था। छत्रपति शिवाजी महाराज की अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी और संतों के प्रति गहरी श्रद्धा थी। हम सिर्फ एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति भक्ति की बात कर रहे थे। ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में अर्जुन ने भगवान कृष्ण से कहा था कि, वह अपने ही रिश्तेदारों से युद्ध नहीं करेंगे तब कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था।
हमारा मकसद सिर्फ छत्रपति शिवाजी महाराज की महानता को दिखाना था कि वे संतों के प्रति कितने समर्पित थे। एक छोटे से हिस्से को संदर्भ से बाहर निकालकर उसे फैलाया गया।
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नागपुर के एक कार्यक्रम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शिवाजी महाराज को लेकर एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थक चुके थे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को छोड़ने की इच्छा जताई थी। शास्त्री के मुताबिक महाराज अपना मुकुट लेकर गुरु समर्थ रामदास के पास गए थे।
शिवाजी महाराज ने अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया था। शास्त्री ने यह भी कहा कि तब गुरु रामदास ने मुकुट वापस शिवाजी के सिर पर रखा। उन्हें सिखाया कि चाहे कितनी भी थकान हो, अपनी जिम्मेदारियों को निभाना ही असली सेवा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा, कुछ लोगों ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। हम कभी भी उन लोगों की आलोचना बर्दाश्त नहीं करेंगे, जिनके स्वराज्य ने हमें हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए प्रेरित किया है।
मैंने अपने शब्दों में महाराज और संतों के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कोशिश की थी।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज में आस्था रखने वाले सभी लोग हमारे अपने हैं। हम ऐसे मुद्दों पर आपस में बहस करेंगे तो इससे सिर्फ दूसरों को ही फायदा होगा। मेरा किसी के प्रति कोई गलत इरादा नहीं था। मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है तो मैं क्षमा प्रार्थी हूं।
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पूर्व राज्यसभा सदस्य संभाजीराजे छत्रपति ने कहा कि जिस मध्यप्रदेश से शास्त्री आते हैं वहां के महान योद्धा छत्रसाल बुंदेला ने शिवाजी महाराज से प्रेरित होकर मुगलों के खिलाफ लड़ाई जीती थी।
संभाजीराजे ने शास्त्री के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए उन्हें अपने ही राज्य का इतिहास न जानने वाला बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे पाखंडी बाबाओं के कार्यक्रमों पर राज्य में रोक लगाई जानी चाहिए।
महाराष्ट्र के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे इतिहास बदलने की साजिश बताया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी माफी की मांग की है। इस पर फडणवीस ने कहा कि इतिहास की किताबों में ऐसा कोई प्रसंग नहीं मिलता है। उन्होंने लोगों से जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील की है।
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और हर्षवर्धन सपकाल ने इसे इतिहास का विकृत रूप बताया है। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि शिवाजी महाराज एक संप्रभु शासक थे।
यह कहना कि उन्होंने अपना राज्य किसी और को सौंप दिया था एक ऐतिहासिक पाप है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे बयानों के लिए मंच मुहैया करा रही है।
एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने बाबा के महाराष्ट्र में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब यह बयान दिया जा रहा था तब राज्य के सत्ताधारी नेता मंच पर मौजूद थे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो जनता खुद उन्हें सबक सिखाएगी।
नागपुर में उसी कार्यक्रम में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था कि हर किसी को चार बच्चे पैदा करने चाहिए। उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को देना चाहिए। उनके इस बयान पर भी काफी विवाद हुआ था।
शास्त्री ने इस पर स्पष्टीकरण दिया। कहा कि संघ को पुत्र देने का मतलब है उसे राष्ट्रवादी बनाना। चाहे वह कलेक्टर हो, शिक्षक हो या कुछ और, मेरा इरादा यही था कि बच्चे सनातनी विचारधारा के हों।
शास्त्री ने यह भी कहा कि वे भविष्य में विवाह करेंगे और वे स्वयं भी हिंदू आबादी बढ़ाने में योगदान देंगे।
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26 अप्रैल को नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कुछ लोगों ने मेरे बयान का गलत मतलब निकाला। मैं जिस स्वराज और हिंदू राष्ट्र की बात करता हूं, उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का स्थान सबसे ऊंचा है। उनके बारे में नकारात्मक कुछ कहना तो दूर, मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता।
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धीरेंद्र शास्त्री- गुरु-शिष्य की भक्ति बता रहे थे
हमारा मकसद सिर्फ छत्रपति शिवाजी महाराज की महानता को दिखाना था कि वे संतों के प्रति कितने समर्पित थे। एक छोटे से हिस्से को संदर्भ से बाहर निकालकर उसे फैलाया गया।
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ये बोले थे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
शिवाजी महाराज ने अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया था। शास्त्री ने यह भी कहा कि तब गुरु रामदास ने मुकुट वापस शिवाजी के सिर पर रखा। उन्हें सिखाया कि चाहे कितनी भी थकान हो, अपनी जिम्मेदारियों को निभाना ही असली सेवा है।
धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी
मैंने अपने शब्दों में महाराज और संतों के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कोशिश की थी।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज में आस्था रखने वाले सभी लोग हमारे अपने हैं। हम ऐसे मुद्दों पर आपस में बहस करेंगे तो इससे सिर्फ दूसरों को ही फायदा होगा। मेरा किसी के प्रति कोई गलत इरादा नहीं था। मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है तो मैं क्षमा प्रार्थी हूं।
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शास्त्री के ज्ञान पर उठाए सवाल
संभाजीराजे ने शास्त्री के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए उन्हें अपने ही राज्य का इतिहास न जानने वाला बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे पाखंडी बाबाओं के कार्यक्रमों पर राज्य में रोक लगाई जानी चाहिए।
नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस से माफी की मांग
बाबा के महाराष्ट्र में प्रवेश पर रोक
यह कहना कि उन्होंने अपना राज्य किसी और को सौंप दिया था एक ऐतिहासिक पाप है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे बयानों के लिए मंच मुहैया करा रही है।
एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने बाबा के महाराष्ट्र में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब यह बयान दिया जा रहा था तब राज्य के सत्ताधारी नेता मंच पर मौजूद थे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो जनता खुद उन्हें सबक सिखाएगी।
धीरेंद्र शास्त्री का चार बच्चे वाला बयान
शास्त्री ने इस पर स्पष्टीकरण दिया। कहा कि संघ को पुत्र देने का मतलब है उसे राष्ट्रवादी बनाना। चाहे वह कलेक्टर हो, शिक्षक हो या कुछ और, मेरा इरादा यही था कि बच्चे सनातनी विचारधारा के हों।
शास्त्री ने यह भी कहा कि वे भविष्य में विवाह करेंगे और वे स्वयं भी हिंदू आबादी बढ़ाने में योगदान देंगे।
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