लूट और साजिश के आरोपों में घिरे DIG राजेश चंदेल को हाईकोर्ट से राहत, जिला कोर्ट के समन पर रोक

Neel Tiwari | May 20, 2026, 20:56 IST
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भोपाल ग्रामीण DIG राजेश चंदेल को ग्वालियर हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली। उन्होंने लूट और साजिश के मामले में जारी व्यक्तिगत पेशी के समन को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया IPC की गंभीर धाराएं नहीं बनती। अगली सुनवाई तक समन पर रोक लगा दी गई।

News in short

  • ग्वालियर हाईकोर्ट ने DIG राजेश सिंह चंदेल को अंतरिम राहत दी।
  • जिला अदालत के व्यक्तिगत पेशी वाले समन पर अगली सुनवाई तक रोक।
  • हाईकोर्ट ने कहा- प्रथम दृष्टया IPC 392, 201 और 120-B नहीं बनती।
  • मामला थाटीपुर थाने में कथित 30 लाख की अवैध वसूली से जुड़ा।
  • अगली सुनवाई 1 जुलाई 2026 को होगी।

News in detail

ग्वालियर की विशेष अदालत के लूट, डकैती और साजिश मामले में जारी समन पर DIG राजेश चंदेल को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली। हाईकोर्ट ने माना आरोपों से IPC की गंभीर धाराएं नहीं बनतीं। अगली सुनवाई तक समन पर रोक लगा दी गई।

समन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे DIG

भोपाल ग्रामीण में पदस्थ DIG राजेश चंदेल ने ग्वालियर की विशेष अदालत के समन को चुनौती दी। उन्होंने ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई 20 मई को जस्टिस आशीष श्रोती की सिंगल बेंच में हुई। याचिका में कहा गया कि घटना के समय वे ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक थे। उनके खिलाफ सीधे तौर पर किसी अपराध में शामिल होने का ठोस आरोप नहीं है।

चंदेल पर केवल कार्रवाई नहीं करने का आरोप

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता अनूप सिंह राणा द्वारा दर्ज शिकायत में वर्तमान DIG के खिलाफ केवल इतना आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए आवेदन पर कार्रवाई नहीं की। याचिका में कहा गया कि यदि इन आरोपों को सही भी मान लिया जाए, तब भी IPC की धारा 392, 201 और 120-B जैसी गंभीर धाराएं उनके खिलाफ लागू नहीं होतीं।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया माना कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में DIG राजेश चंदेल के खिलाफ ऐसा कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं है जिससे लूट, सबूत मिटाने या साजिश जैसे अपराध बनते हों। इसी आधार पर अदालत ने 11 मई 2026 को पारित आदेश को फिलहाल केवल राजेश चंदेल के संबंध में स्थगित कर दिया।



BNSS और CrPC को लेकर भी उठे कानूनी सवाल

सुनवाई के दौरान चंदेल की ओर से यह भी तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू होने के बावजूद पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के प्रावधानों का उपयोग किया। वरिष्ठ अधिवक्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञान लेने की तारीख यह तय करती है कि कौन सा कानून लागू होगा।

वहीं शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि इस आदेश के खिलाफ आपराधिक पुनरीक्षण (criminal revision) दायर किया जाना चाहिए था। इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के ‘गिरीश कुमार सुनेजा बनाम CBI’ फैसले का हवाला दिया गया। हालांकि आवेदक यानि चंदेल के अधिवक्ता ने ‘प्रभु चावला बनाम राजस्थान राज्य’ निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के बावजूद हाईकोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग कर सकता है। इसके बाद कोर्ट ने राजेश चंदेल को अंतरिम राहत दे दी है।

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क्या है पूरा मामला

पूरा मामला ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अनूप राणा ने पुलिस पर 30 लाख रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगाया। तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह, एसआई अजय सिंह सिकरवार और साइबर आरक्षक संतोष वर्मा पर धमकी, झूठे मामले, जेल भेजने और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगे।

इस मामले में 11 मई 2026 को ग्वालियर की विशेष सत्र अदालत ने आदेश दिया। तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल सहित चार आरोपियों के खिलाफ डकैती, लूट और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए। सभी आरोपियों को 22 जून को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया गया।

अब 1 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में सभी पक्ष उपस्थित हो चुके हैं, इसलिए अब अगली सुनवाई 1 जुलाई 2026 को की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उस दिन याचिका की मेंटेनेबिलिटी सहित सभी कानूनी मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से डीआईजी राजेश सिंह चंदेल को बड़ी राहत मिली है।

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