क्रिएटर्स सावधान! सिर्फ 36 रुपए में सोशल मीडिया अकाउंट को निशाना बना रहे सुपारी किलर, वेबसाइटों की जांच में चौंकाने वाले दावे
Amresh Kushwaha | Oct 27, 2026, 09:00 IST
महज 36 रुपए में सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराने का दावा
सोशल मीडिया पर अब पैसे लेकर किसी का अकाउंट बंद कराने का दावा किया जा रहा है। इसके लिए कुछ वेबसाइटें लोगों से पैसे वसूल रही हैं। ये Instagram, Facebook और YouTube अकाउंट को निशाना बनाने की बात कहती हैं। जांच में ऐसी पांच वेबसाइटें सामने आई हैं। इनमें कुछ सेवाओं की कीमत महज 36 रुपए से शुरू होती है।
वहीं फेसबुक प्रोफाइल बंद कराने के लिए 17 हजार रुपए मांगे जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है
सोशल मीडिया पर किसी अकाउंट की शिकायत करने का विकल्प मिलता है। इसका इस्तेमाल गलत कंटेंट और नियम तोड़ने वाले अकाउंट की रिपोर्ट करने के लिए होता है।
लेकिन कुछ लोग इसी सुविधा का गलत इस्तेमाल करने का दावा कर रहे हैं। वे एक ही अकाउंट के खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें भेजते हैं। इसे Mass Reporting कहा जाता है।
इसका मकसद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का ध्यान उस अकाउंट की तरफ खींचना होता है। हालांकि ज्यादा रिपोर्ट आने से अकाउंट बंद होना जरूरी नहीं है। प्लेटफॉर्म अपने नियमों के आधार पर शिकायतों की जांच करता है।
इंडिया टुडे की OSINT जांच में पांच वेबसाइटों का पता चला है। ये वेबसाइटें पैसे लेकर सोशल मीडिया अकाउंट पर रिपोर्टिंग कराने की सेवाएं देती हैं। एक वेबसाइट ने फेसबुक प्रोफाइल हटवाने के लिए करीब 17 हजार रुपए की कीमत बताई है। वहीं बिजनेस पेज के लिए 23 हजार रुपए मांगे जा रहे हैं। फेसबुक ग्रुप बंद कराने की कीमत 28 हजार रुपए बताई गई है।
एक अन्य वेबसाइट यूट्यूब अकाउंट बंद कराने की पेशकश करती है। उसका कहना है कि पहले संबंधित अकाउंट की जांच होगी। इसके बाद कीमत और समय की जानकारी दी जाएगी। हालांकि इन वेबसाइटों के दावे कितने सही हैं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
Naizop नाम की वेबसाइट इंस्टाग्राम के लिए रिपोर्टिंग सेवाएं बेचने का दावा करती है। इसकी एक सेवा की कीमत 36 रुपए बताई गई है। वेबसाइट के मुताबिक उसके प्रीमियम पैकेज में पुराने और सक्रिय दिखने वाले अकाउंट इस्तेमाल किए जाते हैं।
यह वेबसाइट किसी अकाउंट के फॉलोअर्स और लाइक्स में अचानक बढ़ोतरी को रिपोर्ट करने की सलाह भी देती है। इसका मकसद इंस्टाग्राम के ऑटोमेटेड सिस्टम का ध्यान खींचना बताया गया है। हालांकि वेबसाइट अकाउंट बंद होने की गारंटी नहीं देती।
SMM Pirat नाम की वेबसाइट भी ऐसी सेवाएं देने का दावा करती है। इस पर इंस्टाग्राम रिपोर्टिंग के 20 अलग-अलग प्लान बताए गए हैं। इनकी शुरुआती कीमत 46 रुपए है। वेबसाइट अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी रिपोर्टिंग की सुविधा देने की बात कहती है।
कुछ विक्रेता दावा करते हैं कि उनकी सेवाएं फर्जी अकाउंट और ट्रोल्स के खिलाफ उपयोगी हैं। कई वेबसाइटें ग्राहकों की पहचान छिपाकर रखने का भरोसा भी देती हैं।
इन सेवाओं को बेचने वाले कई लोग WhatsApp और Telegram के जरिए संपर्क करते हैं। कुछ वेबसाइटें केवल क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान लेने की बात कहती हैं।
Naizop का दावा है कि वह अपने काम करने के तरीके गोपनीय रखती है। इसी कारण सेवा पूरी होने का सबूत भी नहीं देती। ऐसे में यह साफ नहीं है कि पैसे देने के बाद वास्तव में कोई अकाउंट बंद होता है या नहीं।
मास रिपोर्टिंग का मामला चेन्नई के फाइनेंस इन्फ्लुएंसर वी. हरीश की मौत के बाद चर्चा में आया है। 27 साल के हरीश सोशल मीडिया पर Finance With Harish नाम से मशहूर थे। उनके दस लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे। 20 अक्टूबर को आत्महत्या से उनकी मौत हो गई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौत से पहले उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का एक्सेस खो दिया था। उनके चैनल को कई बार मास रिपोर्टिंग का सामना भी करना पड़ा था।
पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया है। हालांकि मास रिपोर्टिंग और उनकी मौत के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।
भारत में सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बहुत से लोग वीडियो और ऑनलाइन कंटेंट से कमाई कर रहे हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की 2025 की प्रेस रिलीज के मुताबिक भारत की Creator Economy से 20 से 25 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष राजस्व जुड़ा है।
अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 100 से 125 अरब डॉलर हो सकता है। Boston Consulting Group यानी BCG के मुताबिक भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स हर साल 350 अरब डॉलर से ज्यादा की खरीदारी को प्रभावित करते हैं।
2030 तक यह आंकड़ा एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। Google के मुताबिक 2025 में YouTube के क्रिएटिव इकोसिस्टम ने भारत की GDP में 18 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का योगदान दिया। इसके अलावा नौ लाख छह हजार से ज्यादा पूर्णकालिक नौकरियों को समर्थन मिला।
सोशल मीडिया अकाउंट अब केवल मनोरंजन का जरिया नहीं रह गए हैं। लाखों लोग इनसे अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। क्रिएटर्स को विज्ञापन और ब्रांड प्रमोशन से कमाई होती है। कई लोगों के लिए यही आय का मुख्य जरिया है।
ऐसे में अकाउंट बंद होने या उसकी पहुंच घटने से कमाई प्रभावित हो सकती है। इसका असर वीडियो एडिटर और दूसरे सहयोगियों पर भी पड़ सकता है।
Facebook और Instagram की मालिक कंपनी Meta ने रिपोर्टिंग सिस्टम के गलत इस्तेमाल को खतरा बताया है। कंपनी के मुताबिक संगठित तरीके से झूठी शिकायतें करके लोगों की आवाज दबाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि किसी अकाउंट के खिलाफ शिकायत आने पर प्लेटफॉर्म उसकी समीक्षा करता है।
सिर्फ ज्यादा शिकायतें आने से अकाउंट बंद होना तय नहीं है। इसलिए किसी अकाउंट के निलंबन को बिना सबूत मास रिपोर्टिंग का नतीजा नहीं माना जा सकता। यह मामला सोशल मीडिया क्रिएटर्स की सुरक्षा और ऑनलाइन कमाई से जुड़ी चिंताओं को सामने लाता है।
क्या है मास रिपोर्टिंग का मामला?
लेकिन कुछ लोग इसी सुविधा का गलत इस्तेमाल करने का दावा कर रहे हैं। वे एक ही अकाउंट के खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें भेजते हैं। इसे Mass Reporting कहा जाता है।
इसका मकसद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का ध्यान उस अकाउंट की तरफ खींचना होता है। हालांकि ज्यादा रिपोर्ट आने से अकाउंट बंद होना जरूरी नहीं है। प्लेटफॉर्म अपने नियमों के आधार पर शिकायतों की जांच करता है।
फेसबुक अकाउंट बंद कराने के लिए 17 हजार
एक अन्य वेबसाइट यूट्यूब अकाउंट बंद कराने की पेशकश करती है। उसका कहना है कि पहले संबंधित अकाउंट की जांच होगी। इसके बाद कीमत और समय की जानकारी दी जाएगी। हालांकि इन वेबसाइटों के दावे कितने सही हैं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
इंस्टाग्राम पर 36 रुपए से रिपोर्टिंग का दावा
यह वेबसाइट किसी अकाउंट के फॉलोअर्स और लाइक्स में अचानक बढ़ोतरी को रिपोर्ट करने की सलाह भी देती है। इसका मकसद इंस्टाग्राम के ऑटोमेटेड सिस्टम का ध्यान खींचना बताया गया है। हालांकि वेबसाइट अकाउंट बंद होने की गारंटी नहीं देती।
SMM Pirat पर रिपोर्टिंग के 20 प्लान
कुछ विक्रेता दावा करते हैं कि उनकी सेवाएं फर्जी अकाउंट और ट्रोल्स के खिलाफ उपयोगी हैं। कई वेबसाइटें ग्राहकों की पहचान छिपाकर रखने का भरोसा भी देती हैं।
WhatsApp और Telegram से संपर्क
Naizop का दावा है कि वह अपने काम करने के तरीके गोपनीय रखती है। इसी कारण सेवा पूरी होने का सबूत भी नहीं देती। ऐसे में यह साफ नहीं है कि पैसे देने के बाद वास्तव में कोई अकाउंट बंद होता है या नहीं।
फाइनेंस इन्फ्लुएंसर की मौत के बाद चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौत से पहले उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का एक्सेस खो दिया था। उनके चैनल को कई बार मास रिपोर्टिंग का सामना भी करना पड़ा था।
पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया है। हालांकि मास रिपोर्टिंग और उनकी मौत के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।
भारत में कितनी बड़ी है क्रिएटर इंडस्ट्री?
अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 100 से 125 अरब डॉलर हो सकता है। Boston Consulting Group यानी BCG के मुताबिक भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स हर साल 350 अरब डॉलर से ज्यादा की खरीदारी को प्रभावित करते हैं।
2030 तक यह आंकड़ा एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। Google के मुताबिक 2025 में YouTube के क्रिएटिव इकोसिस्टम ने भारत की GDP में 18 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का योगदान दिया। इसके अलावा नौ लाख छह हजार से ज्यादा पूर्णकालिक नौकरियों को समर्थन मिला।
अकाउंट बंद होने से कमाई पर असर
ऐसे में अकाउंट बंद होने या उसकी पहुंच घटने से कमाई प्रभावित हो सकती है। इसका असर वीडियो एडिटर और दूसरे सहयोगियों पर भी पड़ सकता है।
Meta ने भी माना सुरक्षा का खतरा
सिर्फ ज्यादा शिकायतें आने से अकाउंट बंद होना तय नहीं है। इसलिए किसी अकाउंट के निलंबन को बिना सबूत मास रिपोर्टिंग का नतीजा नहीं माना जा सकता। यह मामला सोशल मीडिया क्रिएटर्स की सुरक्षा और ऑनलाइन कमाई से जुड़ी चिंताओं को सामने लाता है।
FAQs
- क्या सोशल मीडिया पर किसी का अकाउंट बंद कराने का दावा सच है?
कुछ वेबसाइटें पैसे लेकर सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराने का दावा करती हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। - मास रिपोर्टिंग क्या है और इसका असर क्यों होता है?
मास रिपोर्टिंग वह प्रक्रिया है जिसमें एक ही अकाउंट के खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें भेजी जाती हैं, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उस अकाउंट पर ध्यान देता है। हालांकि, ज्यादा रिपोर्ट आना अकाउंट के बंद होने की गारंटी नहीं है। - क्या इन वेबसाइटों के जरिए पैसे देकर अकाउंट बंद कराना सुरक्षित है?
इन वेबसाइटों का उपयोग करना सुरक्षित नहीं हो सकता, क्योंकि ये केवल पैसे वसूलने का दावा करती हैं और वास्तविकता में नतीजे की कोई गारंटी नहीं देती हैं।
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