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पांच प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
1. डोमिनोज से वेज पिज्जा का ऑर्डर किया गया था, लेकिन चिकन पिज्जा पहुंचा।
2. वीगन एक्टिविस्ट स्वाति गौरव ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ऑर्डर किया था।
3. पिज्जा के बॉक्स में कॉर्न न देखकर स्वाति ने इसकी जांच की।
4. पिज्जा में चिकन मिलने के बाद स्वाति ने कंपनी से शिकायत की।
5. स्वाति परिवार का कहना है कि यह धार्मिक आस्था पर सीधा हमला था और वे कोर्ट जा रहे हैं।
न्यू ईयर पर भोपाल के कोलार रोड स्थित डोमिनोज आउटलेट से स्वाति गौरव ने वेज गोल्डन कॉर्न पिज्जा ऑर्डर किया था। पिज्जा की कीमत लगभग 650 रुपए थी। हालांकि, जैसे ही बॉक्स खोला गया, पिज्जा पर कॉर्न नहीं दिखा, जिससे स्वाति को शक हुआ। जांच के बाद पता चला कि यह पिज्जा वेज नहीं, बल्कि चिकन पिज्जा था।
कैसे खुली गड़बड़ी की पोल?
स्वाति ने पहले खुद पिज्जा को ध्यान से देखा और फिर आस-पास के नॉनवेज खाने वाले लोगों से पुष्टि की। जब यह साफ हो गया कि पिज्जा चिकन का था, तो स्वाति ने तुरंत डोमिनोज को इसकी शिकायत की।
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धार्मिक आस्था और वीगन लाइफस्टाइल पर चोट
स्वाति गौरव ब्राह्मण परिवार से हैं और सालों से शाकाहारी जीवन शैली (Vegetarian lifestyle) फॉलो कर रही हैं। उनके लिए मांसाहार के अलावा दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स भी रोक हैं। ऐसे में उनके घर नॉनवेज पिज्जा का पहुंचना न केवल धार्मिक रूप से आपत्तिजनक था, बल्कि मानसिक रूप से भी पीड़ादायक अनुभव रहा।
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कंपनी की सफाई और परिवार की नाराजगी
Domino's ने शिकायत के बाद अपनी गलती मानी, लेकिन न तो नया पिज्जा भेजा गया और न ही पैसे रिफंड किए गए। स्वाति का कहना है कि उनका मुद्दा पैसे का नहीं, बल्कि भोजन की शुद्धता और धार्मिक भावनाओं का है। इसे सिर्फ कस्टमर केयर कॉल से हल नहीं किया जा सकता। वेज ऑर्डर | कस्टमर राइट्स Dominos pizza
कोर्ट का रुख और बड़े सवाल
स्वाति का कहना है कि यह मामला कंज्यूमर राइट्स से ज्यादा गंभीर है, क्योंकि यह धार्मिक आस्था और वेज-नॉनवेज किचन सेपरेशन की विश्वसनीयता से जुड़ा है। उनके अनुसार, डोमिनोज जैसे बड़े ब्रांड को किचन सेपरेशन, ऑर्डर मैनेजमेंट और स्टाफ ट्रेनिंग में सुधार करना चाहिए। वे अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही हैं।
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