पूर्व मंत्री के रिश्तेदार शोभित त्रिपाठी गिरफ्तार, विवाह सहायता योजना में 30 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप

Sourabh Bhatnagar | Sept 05, 2026, 12:44 IST
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मध्य प्रदेश में विवाह सहायता योजना में कथित 30.18 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े के मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन और निलंबित सीईओ शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है।

मध्य प्रदेश में विवाह सहायता योजना में कथित करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED की भोपाल टीम ने सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन और निलंबित मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है।



ED ने त्रिपाठी को 2 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 3 सितंबर को उन्हें विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने पूछताछ के लिए त्रिपाठी को 9 सितंबर तक ED की रिमांड पर भेज दिया है। बता दें कि शोभित पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं।



शोभित त्रिपाठी पर क्या आरोप है

शोभित त्रिपाठी पर आरोप है कि उन्होंने सिरोंज जनपद पंचायत में CEO रहते हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना में करीब 30.18 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। ED अब इस मामले में मनी लांड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है।



त्रिपाठी को शिवराज सरकार के समय सागर से आने वाले एक पूर्व मंत्री का रिश्तेदार भी बताया जाता है। हालांकि इस मामले में जांच एजेंसियां आरोपों की जांच कर रही हैं।



5,923 मामलों में गड़बड़ी का आरोप

ED के मुताबिक यह पूरा मामला साल 2019 से नवंबर 2021 के बीच का है। इस दौरान सिरोंज जनपद पंचायत में मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना के तहत बड़ी संख्या में संदिग्ध भुगतान किए गए।



जांच एजेंसी का आरोप है कि करीब 5 हजार 923 मामलों में नियमों को दरकिनार कर सरकारी राशि मंजूर की गई और भुगतान किया गया।



इस योजना में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की पात्र बेटियों की शादी के लिए सरकार की ओर से 51 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। आरोप है कि इस राशि को गलत तरीके से कई अपात्र लोगों तक पहुंचाया गया।



फर्जी दस्तावेजों से खोले गए खाते

ED की जांच में सामने आया कि कथित फर्जीवाड़े के लिए फर्जी आवेदन और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।



आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खोले गए। इसके बाद योजना की राशि इन खातों में ट्रांसफर की गई और कई बार नकद निकासी की गई।



जांच एजेंसी का कहना है कि कई ऐसे लोगों को भी योजना का लाभ दिया गया, जो इसके लिए पात्र नहीं थे।



कोरोना काल में भी हुए संदिग्ध भुगतान

ED के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान जब बड़ी संख्या में विवाह कार्यक्रमों पर रोक लगी हुई थी, तब भी इस योजना के तहत कई संदिग्ध भुगतान किए गए।



जांच में इन भुगतानों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ED अब पूरे मामले में जुड़े लोगों और पैसों के लेन-देन की जांच कर रही है।



2022 में सामने आया था मामला

विवाह सहायता योजना में गड़बड़ी का मामला साल 2022 में सामने आया था। इसके बाद पुलिस ने शोभित त्रिपाठी समेत दो बाबुओं को गिरफ्तार किया था।



मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने त्रिपाठी के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था।



तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया था और अधिकारियों से कार्रवाई के निर्देश दिए थे।



अब ED इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी तरीके से निकाली गई राशि कहां-कहां इस्तेमाल हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।



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