चेकिंग के बाद पंचनामा की हार्ड कॉपी नहीं दे रही बिजली कंपनी, ऊर्जा मंत्री को शिकायत

Sanjay Dhiman | Jun 02, 2026, 22:41 IST
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Photograph: (the sootr)

बिजली कंपनी चेकिंग के बाद पंचनामा की हार्ड कॉपी नहीं दे रही है। इससे उपभोक्ता तय समय में अपनी आपत्ति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं और भारी जुर्माना भरने को मजबूर हैं।

रतन मिश्रा@ग्वालियर. मध्य प्रदेश में बिजली विभाग का एक नया खेल सामने आया है। अब चेकिंग के दौरान उपभोक्ताओं को कोई कागज नहीं थमाया जाता है। सारी जानकारी सीधे विजिलेंस मोबाइल एप में दर्ज कर ली जाती है। अधिकारियों का मानना है कि उपभोक्ता को एसएमएस से जानकारी मिल जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

लाखों उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर आज भी सिस्टम में दर्ज नहीं हैं। कई लोगों के नंबर पूरी तरह से गलत फीड किए गए हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग इस तरह के एसएमएस देख ही नहीं पाते हैं। इस वजह से आम जनता को चेकिंग की कोई खबर नहीं होती है। जब तक नया बिल आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

नियमों की अनदेखी कर लगा रहे जुर्माना

विद्युत अधिनियम के अनुसार चेकिंग के समय प्रारूप 4 देना अनिवार्य होता है। इसके बाद जांच अधिकारी अंतिम आदेश के लिए प्रारूप 5 जारी करता है। उपभोक्ता को अपनी बात रखने के लिए पूरा मौका मिलना चाहिए। अंत में अंतिम निर्धारण आदेश के रूप में प्रारूप 6 जारी होता है। लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है।

सॉफ्टवेयर का बहाना बनाकर अधिकारी अपनी गलती सुधारने से साफ मना कर देते हैं। अगर पंचनामे में किसी का नाम गलत दर्ज हो गया, तो सुधार नहीं होता। किसी के घर का लोड अगर गलती से ज्यादा लिख दिया, तो वही फाइनल है। अधिकारी कहते हैं कि उनके पास सॉफ्टवेयर में बदलने का कोई अधिकार नहीं है।

इनवर्टर को भी बना दिया कमाई का जरिया

बिजली कंपनी हर हफ्ते मेंटेनेंस के नाम पर अघोषित कटौती करती रहती है। इस कटौती से बचने के लिए उपभोक्ता अपने घरों में इनवर्टर लगाते हैं। अब बिजली कंपनी इस इनवर्टर के लोड को भी कुल लोड में जोड़ रही है। गैर-घरेलू उपभोक्ताओं पर धारा 126 के तहत भारी बिलिंग की जा रही है। यह पूरी तरह से अनुचित है।

इनवर्टर तो केवल मुख्य बिजली सप्लाई बंद होने पर ही काम करता है। इनवर्टर की बैटरी चार्ज होने में जो बिजली लगती है, वह मीटर में दर्ज होती है। इससे बिजली कंपनी को कोई भी राजस्व का नुकसान नहीं होता है। इनवर्टर कोई अतिरिक्त लोड नहीं है, बल्कि बिजली कटौती का एक पूरक साधन है।

ग्वालियर से उठी विरोध की आवाज, ऊर्जा मंत्री ने दिया आश्वासन

अब यह मामला सीधे सरकार तक पहुंच गया। ग्वालियर चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस डिजिटल तानाशाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं की इस बड़ी समस्या को लेकर ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखा गया। हालांकि, शिकायत के बाद भी जमीनी स्तर पर अभी तक कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा है।

डॉ. प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ कॉमर्स, ग्वालियर: > "बिजली कंपनी पूरी तरह से अपनी मनमानी पर उतारू हो चुकी है। उपभोक्ताओं को पंचनामा की हार्ड कॉपी हर हाल में मिलनी चाहिए। लिखित कॉपी न मिलने से लोग समय पर अपनी आपत्ति नहीं जता पाते हैं। इसके खिलाफ हमने ऊर्जा मंत्री को भी कड़ा पत्र लिखा है।"

विनोद कटारे, मुख्य महाप्रबंधक, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी: > "यह पूरी तरह से कंपनी की पॉलिसी से जुड़ा हुआ मामला है। अगर सरकार या मंत्री जी की तरफ से कोई नया आदेश आता है, तो हम उसका पालन करेंगे। उपभोक्ताओं को इस संबंध में सीधे उच्च स्तर पर बात करनी चाहिए।"

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, मध्य प्रदेश शासन: > "मामला मेरे संज्ञान में आया है और यह काफी गंभीर विषय है। मैं इस नीति के संबंध में कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) से बात करूंगा। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए जरूरी आदेश जल्द जारी किए जाएंगे।"

उपभोक्ताओं के अधिकार: जिन्हें जानना बेहद जरूरी है

हर उपभोक्ता को चेकिंग के समय सजग रहने की सख्त जरूरत है। चेकिंग के दौरान प्रारूप 4 की मूल प्रति मांगना आपका कानूनी अधिकार है। अंतिम निर्धारण आदेश यानी प्रारूप 5 की कॉपी भी आपको मिलनी चाहिए। यदि पंचनामे में कोई भी जानकारी गलत दर्ज है, तो उसे तुरंत सुधरवाएं। स्थानीय स्तर के अधिकारियों को इन गलतियों को सुधारने का अधिकार मिलना चाहिए।

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