रोजगार-आत्मनिर्भर योजना के सहारे बैंक और सरकार को 72 लाख का चूना

भोपाल में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में 72 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा हुआ। बैंक से लोन लेकर फर्जी फर्म से क्रेन खरीदी गई। EOW ने FIR दर्ज की है।

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Sanjay Sharma
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BHOPAL. रोजगार के मामले में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना में एक महीने में दो फर्जीवाड़े सामने आए हैं। ताजा मामला भोपाल का है। एक महीने पहले ग्वालियर में फर्जी फर्म के सहारे सरकारी अनुदान हासिल करने वालों पर केस दर्ज किया गया था। 

राजधानी भोपाल में उद्यम क्रांति योजना के माध्यम से बैंक से सरकारी अनुदान पर 72 लाख रुपए का लोन लिया गया था। इसके लिए दस्तावेजों से लेकर ऋण से क्रेन खरीदने तक जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। 

मामला सामने आने पर बैंक द्वारा की गई शिकायत पर EOW ने जांच करते हुए हितग्राही सहित सेंट्रल बैंक के तत्कालीन मैनेजर, कार्गो लॉजिस्टिक कंपनी के संचालक पर अपराध दर्ज कर लिया है। 

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत 120 टन क्षमता की पुरानी क्रेन खरीदने के लिए मंडीदीप की फर्म एसबी/एसवी इंटरप्राइजेज ने लोन के लिए आवेदन किया था।

इस आवेदन के आधार पर योजना के तहत सेंट्रल बैंक ने मंडीदीप ब्रांच से 85 लाख रुपए का भुगतान किया। यह भुगतान 2017 के मार्च और अप्रैल के बीच ऑल कार्गो फर्म के बैंक खाते में किया गया। इसके बाद फर्म को सरकारी अनुदान का लाभ मिला।

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लोन मिलने के बाद किश्त लौटाना किया बंद

लोन मिलने के बाद फर्म द्वारा साल 2020 में किश्तें जमा कराना बंद कर दिया गया। कई नोटिस के बावजूद बैंक द्वारा लोन अकाउंट को एनपीए घोषित कर दिया गया। 

लोन की राशि न लौटाने पर बैंक प्रबंधन द्वारा जांच करने पर फर्म की हेराफेरी सामने आ गई। जिस वाहन पर फर्म द्वारा लोन लिया गया था। वह एक अन्य फर्म लियो इंजीनियरिंग के नाम पर रजिस्टर थी। इस क्रेन पर एक अन्य फाइनेंस कंपनी से भी लोन लिया गया था।

रीजनल ऑफिस की अनुमति बिना दिया लोन

धोखाधड़ी का पता चलने पर बैंक प्रबंधनक द्वारा लोन के लिए जमा कराए गए दस्तावेजों की जांच कराई गई तो उनमें भी गड़बड़ी सामने आ गई। वहीं लोन की प्रक्रिया में सेंट्रल बैंक की मंडीदीप ब्रांच के तत्कालीन मैनेजर और अन्य कर्मचारियों की लापरवाही का भी खुलासा हुआ। इस लोन को स्वीकृत करने के लिए ब्रांच मैनेजर द्वारा रीजनल ऑफिस से अनुमति ही नहीं ली गई थी। जिस वाहन पर लोन स्वीकृत किया गया उसकी एनओसी भी नहीं मांगी गई। 

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सरकारी अनुदान और लाखों का त्रण हड़पा

बैंक प्रबंधन की शिकायत पर EOW ने जांच शुरू की। पता चला कि लोन लेने वाला विजय पाल सिंह परिहार लियो इंजीनियरिंग सर्विसेज के संचालक ज्ञानेन्द्र असवाल का कर्मचारी था। 

ज्ञानेन्द्र ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का लाभ लेने के लिए विजय पाल सिंह के नाम पर एसबी/एसवी इंटरप्राइजेज फर्म बनाई। इसी फर्म के नाम पर मंडीदीप स्थित सेंट्रल बैंक से 72 लाख रुपए का लोन स्वीकृत कराया। 

ज्ञानेन्द्र ने लोन के लिए अपने बैंक खाते से 28 लाख रुपए की मार्जिन मनी जमा की और 21 लाख रुपए का सरकारी अनुदान हासिल किया। उसने पहले से निजी बैंक की बंधक क्रेन को खरीदना दिखाया और बैंक से लोन हासिल किया। लोन मिलने के बाद कुछ महीने तक किश्तें जमा की और फिर बंद कर दी।

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चार साल चली EOW की जांच

 सरकारी अनुदान और बैंक से लाखों रुपए का लोन हासिल करने के मामले में EOW की जांच चार साल तक चली। सामने आए तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में सेंध लगाने वालों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। 

इसमें विजयपाल सिंह परिहार, ज्ञानेन्द्र सिंह असवाल, ऑल कार्गो लाजिस्टिक लिमिटेड और सेंट्रल बैंक के कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। इन पर धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का अपराध दर्ज किया गया है।

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ग्वालियर में भी हुई योजना में हेराफेरी

 राजधानी में युवा उद्यमी योजना की तरह एक महीने पहले ही हेराफेरी का मामला सामने आ चुका है। इसमें भी जांच के बाद EOW ने हितग्राही सहित छह लोगों पर अपराध दर्ज किया गया है। ग्वालियर की फर्म पूनम ट्रेडिंग कंपनी के संचालक हरवीर सिंह चौहान और प्रेम किशोर शिवहरे ने सरकारी योजना के तहत 9 लाख रुपए का लोन लिया था।

2016 में लोन और सरकारी अनुदान हथियाने के बाद फर्म ने किश्तें भरना बंद कर दिया था। बैंक की जांच में लोन के लिए फर्जीवाड़े का पता चलने पर शिकायत EOW में दर्ज कराई गई थी। 

EOW ने चार साल तक इसकी जांच की तो पता चला कि हरवीर सिंह ने अपनी पुत्री के नाम से फर्म बनाई और फिर खरीदी से लेकर अन्य दस्तावेजों में हेराफेरी कर बैंक से लोन हासिल किया था। 

इस मामले में हरवीर सिंह चौहान, प्रेम किशोर शिवहरे, मीरादेवी शिवहरे, पूनम गुलहरे, कृष्ण कुमार गुप्ता, अनिल सिंह परमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

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