FDR घोटाले की पड़ताल में उलझी ईडी-पुलिस, कहां गए छात्रों के हक के 800 करोड़

एमपी की RGPV यूनिवर्सिटी में एफडी घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में 800 करोड़ रुपए गायब हो गए हैं। छात्रों के लिए जमा पैसे की हेराफेरी की गई।

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Sanjay Sharma
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BHOPAL.एमपी की सबसे बड़ी सरकारी टेक्निकल यूनिवर्सिटी RGPV में घपले-घोटालों की परतें खुल रही हैं। यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व कुलगुरु प्रो. सुनील कुमार गुप्ता ने खुलासा किया। तत्कालीन रजिस्ट्रार आरएस राजपूत, फाइनेंस कंट्रोलर ऋषिकेश वर्मा और बैंक मैनेजर की मिलीभगत से 19 करोड़ की हेराफेरी हुई। यह रकम अब 800 करोड़ तक पहुंच गई है।

यह एफडी घोटाला मध्यप्रदेश के सरकारी शैक्षणिक संस्थान का सबसे बड़ा घोटाला बन गया है। जांच में पुलिस के पस्त पड़ने के बाद ईडी ने जांच शुरू की। अब तक 800 करोड़ की एफडी गायब होने की बात सामने आई है। विश्वविद्यालय प्रबंधन गायब हुई एफडी का हिसाब नहीं दे पा रहा है। 800 करोड़ की एफडी किसके इशारे पर तोड़ी गई, यह स्पष्ट नहीं हुआ। यह फंड किस अकाउंट में ट्रांसफर किए गए, इसका भी पता नहीं चला। उच्च शिक्षा विभाग भी जिम्मेदारी तय करने से बच रहा है।

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पूर्व कुलगुरु की हेराफेरी ने खोली परतें 

साल 2024 में आरजीपीवी में तत्कालीन कुलगुरु प्रो.सुनील कुमार के इशारे पर एफडी की हेराफेरी के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। इस दौरान प्रो. सुनील कुमार द्वारा 19 करोड़ की एफडी निजी खाते में ट्रांसफर करने का खुलासा हुआ था। 

जांच के आगे बढ़ने पर छात्रों की फीस और अन्य मदों से जमा हुए करोड़ों रुपए के फिक्स डिपॉजिट गायब होने के मामले सामने आए। विश्वविद्यालय से गायब फिक्स डिपॉजिट की राशि 800 करोड़ तक पहुंच गई है।

इतनी भारी भरकम राशि गायब होने की जांच प्रवर्तन निदेशालय के हाथ में है। ईडी बीते नो महीनों से एफडी ही हेराफेरी के तार जोड़ने की कोशिश कर रही है लेकिन अब भी कई कड़ियां जुड नहीं पाई हैं। 

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फिक्स डिपॉजिट से 790 करोड़ खुदबुर्द 

वहीं घोटाले की जांच के दौरान ईडी को पता चला कि विश्वविद्यालय के कुल 2425 एफडीआर अलग-अलग बैंकों में हैं। भोपाल की लगभग सभी प्रमुख बैंक शाखाएं के अलावा कुछ दूसरे शहरों के बैंकों में भी एफडी कराई गई हैं। पिछली ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध फिक्स डिपॉजिट में 1540 करोड़ रुपए से ज्यादा थी। 

इन एफडीआर को अलग- अलग पर कई बार तोड़ा और फिर जमा कराया जाता रहा। 1540 करोड़ रुपए के एफडीआर को इसके तरीके से खुदबुर्द करने की साजिश रची गई। अब यह राशि 750 करोड़ रह गई है। विश्वविद्यालय की अकाउंट शाखा के पास 790 करोड़ का कोई रिकॉर्ड नहीं है। ईडी को कुछ एफडीआर नंबर मिले हैं, लेकिन बैंकों से इनकी पुष्टि नहीं हो पाई। ऐसे में विश्वविद्यालय के करोड़ों रुपए के फर्जी एफडीआर रिकॉर्ड के जरिए डकारे जाने का अंदेशा है।

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अकाउंट शाखा से गायब करोड़ों का हिसाब

 विश्वविद्यालय में छात्रों की फीस और अन्य मदों से करोड़ों रुपए आते हैं। इसके लिए पूरी अकाउंट शाखा जिम्मेदार है। यह शाखा हर खर्च का रिकॉर्ड रखती है। 2022 से 2025 के बीच 790 करोड़ के फिक्स डिपॉजिट गायब हैं। फाइनेंस कंट्रोलर और लेखाअधिकारी इसका जवाब नहीं दे पाए। विश्वविद्यालय में जमा राशि का भी पूरा ब्यौरा नहीं है। इससे करोड़ों के गोलमाल की साजिश का अंदेशा है। ईडी के अधिकारी 9 महीनों से रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। बही खातों को इतना उलझाया गया है कि जांच एजेंसियां भी पस्त हो रही हैं।

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छात्र कर रहे सीबीआई जांच और ऑडिट की मांग

आरजीपीवी के बैंक खातों से करोड़ों का फिक्स डिपॉजिट गायब होने के मामले में जांच एजेंसियां गहराई से पड़ताल कर रही हैं। वहीं ABVP की अगुवाई में छात्र अपने शैक्षणिक संसाधनों के लिए जमा राशि की हेराफेरी के विरोध में मोर्चा खोले बैठे हैं। लगातार आंदोलन और प्रदर्शन के बाद उच्च शिक्षा मंत्री भी कई बार विश्वविद्यालय का दौरा कर चुके हैं। 

इसके बावजूद विश्वविद्यालय में हुए मध्य प्रदेश के शैक्षणिक इतिहास के सबसे बड़े घोटाले पर उच्च शिक्षा विभाग संजीदा नहीं है। ईडी की जांच में घोटाले की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से नाराज छात्र सीबीआई से जांच की मांग कर रहे हैं। विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्री केतन देसाई ने सरकार से विश्वविद्यालय में दखल देने की अपील की है। उन्होंने एजीएमजी से फाइनेंशियल ऑडिट की भी मांग की है।

फिक्स डिपॉजिट से मिले ब्याज का भी ब्यौरा नहीं 

आरजीपीवी द्वारा भोपाल के लगभग हर बैंक में फिक्स डिपॉजिट कराए हैं। संत हिरदाराम नगर स्थित निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई  बैंक में विश्वविद्यालय के 100 करोड़ की एफडी है। कटरा स्थित एक्सिस बैंक में 25-25 करोड़ की तीन एफडीआर दो- दो साल की अवधि के लिए कराई गईं। 

इस फिक्स डिपॉजिट से विश्वविद्यालय को तगड़ा ब्याज मिलना था। यानी दो साल में इन चार एफडीआर से 36 करोड़ रुपए मिले लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बिना जरूरत ये एफडीआर तोड़ दिए। हांलाकि इसका रिकॉर्ड भी व्यवस्थित नहीं हैं इस वजह से मिलने वाले ब्याज की स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। 

आरजीपीवी रजिस्ट्रार मोहन सेन का कहना है कि अभी जांच जारी है। एफडी किसके आदेश पर तोड़ी गईं, उनसे मिलने वाले ब्याज की राशि कहां गई। जिन एफडीआर का पता नहीं चल रहा है उनका रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। जांच के अंतिम नतीजे के आधार पर विभाग कार्रवाई तय करेगा। 

प्रबंधन ने उड़ाए करोड़ों रुपए, छात्र सुविधाओं को तरसे

 प्रदेश की इकलौती सरकारी तकनीकी यूनिवर्सिटी में बीते तीन-चार साल में फिक्स डिपॉजिट से करोड़ों रुपए गायब कर दिए गए। इन रुपयों से छात्रों के लिए शैक्षणिक सुविधाएं, आधुनिक संसाधन और दूसरी सुविधाएं जुटाई जानी थी। छात्र इन सुविधाओं के लिए तरसते रहे और विश्वविद्यालय प्रबंधन बजट की कमी का रोना रोता रहा। 

छात्रों के हिस्से के करोड़ों रुपए गायब होने पर एबीवीपी प्रदेश मंत्री केतन देसाई ने कहा कि विश्वविद्यालय में एक के बाद एक कई घोटाले हुए हैं। छात्रों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर खरीदारी में घपला किया गया है। खेल गतिविधियों के नाम पर करोड़ों रुपए बर्बाद कर दिए गए। 

इन कामों के उपयोगिता सर्टिफिकेट भी अब तक उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं। छात्रों ने उच्च शिक्षा विभाग से लेकर सरकार से कई बार शिकायतें कीं लेकिन उन्हें जांच का भरोसा दिलाकर चुप करा दिया गया। छात्रों के कल्याण के लिए जमा राशि की बंदरबाट की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। इससे करोड़ों रुपए  हड़पने वालों के चेहरे सामने आ जाएंगे।

सुनील कुमार मध्यप्रदेश ABVP RGPV आरजीपीवी
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