सीएम मोहन यादव : पर्यावरण दिवस से गंगादशमी तक जल स्रोतों के संरक्षण - पुनर्जीवन के लिए चलेगा अभियान
Ravi Singh | May 28, 2024, 18:42 IST
water conservation campaign
5 जून पर्यावरण दिवस से गंगा दशमी पर्व तक जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए संपूर्ण प्रदेश में अभियान चलाया जाएगा। यह काम जनसहभागिता से होगा।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ( Chief Minister of Madhya Pradesh Dr. Mohan Yadav ) ने कहा है कि 5 जून पर्यावरण दिवस से गंगा दशमी पर्व ( Ganga Dashami festival from 5th June Environment Day ) तक जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए संपूर्ण प्रदेश में अभियान चलाया जाएगा। अभियान की अवधि में हर जिले में जल के स्रोतों, जैसे नदी, कुएं, तालाब, बावड़ियों आदि को स्वच्छ रखने और आवश्यकता होने पर उनके गहरीकरण के लिए गतिविधियां संचालित की जाएंगी। यह कार्य जनसहभागिता से होगा। इससे जल स्रोतों के प्रति सामाजिक चेतना जागृत करने और जनसामान्य का जल स्रोतों से जीवंत संबंध विकसित करने में मदद मिलेगी।
गंगा दशमी पर्व माँ गंगा का अवतरण दिवस है और माँ गंगा से ही भारतीय संस्कृति विश्व में जानी जाती है। शहरी औऱ ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान का नेतृत्व जनप्रतिनिधि करेंगे और जिला कलेक्टर गतिविधियों का समन्वय करेंगे। जल ही जीवन है, केवल स्लोगन नहीं, हम जलस्रोतों से ही जीवन पाते हैं, ऐसा मत मुख्यमंत्री डॉ. यादव का है। उन्होंने सभी सामाजिक, शासकीय, अशासकीय संस्थाओं, जनअभियान परिषद से जुड़े संगठनों से अभियान में शामिल होने का अनुरोध किया है।
जनसहभगिता से जल संरचनाओं का चयन किया जाएगा और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सघन जनजागृति के कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इससे भविष्य के लिए जल संरक्षण के संबंध में कार्य योजना बनाने में मदद मिलेगी। इस अवधि में होने वाले धार्मिक मान्यताओं के कार्यक्रम जैसे उज्जैन की शिप्रा परिक्रमा, चुनरी उत्सव, नर्मदा जी के किनारे होने वाले धार्मिक कार्यक्रम भी पूरी श्रद्धा के साथ आयोजित किए जाएंगे।
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प्रदेश में 212 से अधिक नदियां हैं, पेयजल की आपूर्ति में नदियां, बावड़ियां, कुएँ और तालाब महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जल संरचनाओं को जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। अभियान के दौरान नदियों और तालाबों से गाद या खाद के रूप में निकलने वाली मिट्टी, किसानों को खेतों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
जल संरचनाओं पर किए गए अतिक्रमणों को जिला प्रशासन द्वारा हटाया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान के संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रारंभिक रूप से यह अभियान 5 से 15 जून तक चलाया जाएगा। इसके बाद अभियान की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
नमामि गंगे परियोजना के नाम से आरंभ हो रहे जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के विशेष अभियान के लिए ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय क्षेत्र में नगरीय विकास एवं आवास, नोडल विभाग होंगे। जल संरचनाओं के चयन और उन्नयन कार्य में जीआईएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इन स्थलों की मोबाइल एप के माध्यम से जियो -टैगिंग की जाएगी। सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जल संरचनाओं के आसपास स्वच्छता बनाए रखने, जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण रोकने के लिए फेंसिंग के रूप में वृक्षारोपण करने जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा और जल संरचनाओं के किनारों पर बफर जोन तैयार कर उन्हें हरित क्षेत्र या पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। जल संरचनाओं में मिलने वाले गंदे पानी के नाले-नालियों को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत डायवर्जन उपरांत शोधित कर जल संरचनाओं में छोड़ा जाएगा।
अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत जल संरचनाओं के उन्नयन का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से कराया जाएगा। इसके अंतर्गत नदी, झील, तालाब, कुओं, बावड़ी आदि के पुनर्जीवीकरण, संरक्षण व संरचनाओं के उन्नयन का कार्य स्थानीय सामाजिक, प्रशासकीय संस्थाओं के साथ मिलकर जनभागीदारी से कराए जाएंगे। प्रयास होगा कि जल संरचनाओं का उपयोग जल प्रदाय अथवा पर्यटन, भू-जल संरक्षण, मत्स्य पालन अथवा सिंघाड़े के उत्पादन के लिए भी किया जा सके। रिहायशी इलाकों में बंद पड़े रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई कर उनके पुन: उपयोग के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
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सभी शामिल हो- मुख्यमंत्री डॉ. यादव
गंगा दशमी पर्व माँ गंगा का अवतरण दिवस है और माँ गंगा से ही भारतीय संस्कृति विश्व में जानी जाती है। शहरी औऱ ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान का नेतृत्व जनप्रतिनिधि करेंगे और जिला कलेक्टर गतिविधियों का समन्वय करेंगे। जल ही जीवन है, केवल स्लोगन नहीं, हम जलस्रोतों से ही जीवन पाते हैं, ऐसा मत मुख्यमंत्री डॉ. यादव का है। उन्होंने सभी सामाजिक, शासकीय, अशासकीय संस्थाओं, जनअभियान परिषद से जुड़े संगठनों से अभियान में शामिल होने का अनुरोध किया है।
नर्मदा जी के किनारे होंगे कार्यक्रम
जनसहभगिता से जल संरचनाओं का चयन किया जाएगा और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सघन जनजागृति के कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इससे भविष्य के लिए जल संरक्षण के संबंध में कार्य योजना बनाने में मदद मिलेगी। इस अवधि में होने वाले धार्मिक मान्यताओं के कार्यक्रम जैसे उज्जैन की शिप्रा परिक्रमा, चुनरी उत्सव, नर्मदा जी के किनारे होने वाले धार्मिक कार्यक्रम भी पूरी श्रद्धा के साथ आयोजित किए जाएंगे।
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Sharab Mafia : MP से गुजरात जा रहे अंग्रेजी शराब से भरे 9 ट्रक पकड़े
प्रदेश में 212 से अधिक नदियां हैं, पेयजल की आपूर्ति में नदियां, बावड़ियां, कुएँ और तालाब महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जल संरचनाओं को जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। अभियान के दौरान नदियों और तालाबों से गाद या खाद के रूप में निकलने वाली मिट्टी, किसानों को खेतों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
5 से 15 जून तक चलाया अभियान
जल संरचनाओं पर किए गए अतिक्रमणों को जिला प्रशासन द्वारा हटाया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान के संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रारंभिक रूप से यह अभियान 5 से 15 जून तक चलाया जाएगा। इसके बाद अभियान की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
अभियान के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय विकास एवं आवास होंगे नोडल विभाग
नमामि गंगे परियोजना के नाम से आरंभ हो रहे जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के विशेष अभियान के लिए ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय क्षेत्र में नगरीय विकास एवं आवास, नोडल विभाग होंगे। जल संरचनाओं के चयन और उन्नयन कार्य में जीआईएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इन स्थलों की मोबाइल एप के माध्यम से जियो -टैगिंग की जाएगी। सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जल संरचनाओं के आसपास स्वच्छता बनाए रखने, जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण रोकने के लिए फेंसिंग के रूप में वृक्षारोपण करने जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा और जल संरचनाओं के किनारों पर बफर जोन तैयार कर उन्हें हरित क्षेत्र या पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। जल संरचनाओं में मिलने वाले गंदे पानी के नाले-नालियों को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत डायवर्जन उपरांत शोधित कर जल संरचनाओं में छोड़ा जाएगा।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए चलेगा जागरूकता अभियान
अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत जल संरचनाओं के उन्नयन का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से कराया जाएगा। इसके अंतर्गत नदी, झील, तालाब, कुओं, बावड़ी आदि के पुनर्जीवीकरण, संरक्षण व संरचनाओं के उन्नयन का कार्य स्थानीय सामाजिक, प्रशासकीय संस्थाओं के साथ मिलकर जनभागीदारी से कराए जाएंगे। प्रयास होगा कि जल संरचनाओं का उपयोग जल प्रदाय अथवा पर्यटन, भू-जल संरक्षण, मत्स्य पालन अथवा सिंघाड़े के उत्पादन के लिए भी किया जा सके। रिहायशी इलाकों में बंद पड़े रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई कर उनके पुन: उपयोग के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
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